जब स्वर्ग में खाने के लिए भोजन की जगह मिला सोना! कहानी दानवीर कर्ण की

पितृपक्ष से महाभारत के दानवीर कर्ण की एक कथा भी बहुत प्रचलित है. कथा के अनुसार, जब राजा कर्ण संसार छोड़कर परलोक गए थे, तब उन्हें स्वर्ग में जाकर खाने के लिए सोना दिया गया था. कर्ण से कहा गया कि आपने पृथ्वी पर सिर्फ सोने का दान किया है. इसलिए आपको खाने में सोना ही दिया जाएगा.

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पितृपक्ष में 16 दिन तक मांगलिक व शुभ कार्य बंद रहते हैं. 16 दिन की इस अवधि में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. (Photo: ITG) पितृपक्ष में 16 दिन तक मांगलिक व शुभ कार्य बंद रहते हैं. 16 दिन की इस अवधि में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है. (Photo: ITG)

उमेश मिश्रा

  • धोलपुर,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:07 PM IST

पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है. इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाले हैं. कुछ लोग इसे श्राद्धपक्ष, कनागत और करणागत भी कहते हैं. पितृपक्ष में 16 दिन तक मांगलिक एवं शुभ कार्य बंद हो जाते हैं. मान्यता है कि 16 दिन की इस अवधि में पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिल सके. लोग पवित्र नदियों के घाट पर जाकर पितरों को तर्पण करते हैं. अपने पितरों को तृप्त करने के लिए लोग अन्न, तिल, चावल, जौं, घी, शहद आदि से बने पिंड अर्पित करते हैं. जल से तर्पण करते है. और परिवार की सुख-संपन्न की प्रार्थना करते हैं.

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शास्त्रों के अनुसार, पितरों को देवताओं से भी उच्च कोटि का स्थान दिया है. इसलिए पितरों की अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति के लिए श्राद्ध किया जाता है, जिससे वह संतुष्ट होकर परिवार को सुख-समृद्धि का वरदान दें. गरुड़ पुराण के अनुसार, पूर्वज का देहांत जिस तिथि पर हुआ है, उसी तिथि पर उनका आव्हान कर श्राद्ध और दान-पुण्य करना चाहिए. फिर कौआ, गाय, कुत्ता व चींटी का भोजन अलग निकालकर गरीब ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए.

दानवीर कर्ण की कथा
पितृपक्ष से महाभारत के दानवीर कर्ण की एक कथा भी बहुत प्रचलित है. कथा के अनुसार, जब राजा कर्ण संसार छोड़कर परलोक गए थे, तब उन्हें स्वर्ग में जाकर खाने के लिए सोना दिया गया था. कर्ण से कहा गया कि आपने पृथ्वी पर सिर्फ सोने का दान किया है. इसलिए आपको खाने में सोना ही दिया जाएगा. लेकिन आपके पुण्य इतने ज्यादा हैं कि आप जो चाहेंगे, वो आपको मिल सकता है. इसके बाद राजा कर्ण ने याचना की और कहा कि मुझे मात्र 15 दिन के लिए पृथ्वी लोक पर वापस भेजा जाए.

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राजा कर्ण की बात मानी गई और उन्हें पुनः धरती पर भेज दिया गया. इसके बाद राजा कर्ण ने 15 दिन तक संसार की हर वस्तु का जी भरकर दान किया. इसके बाद राजा कर्ण का तर्पण पूरा हुआ. कहते हैं कि तभी से आर्य संस्कृति में कारणागतों को प्रमुख रूप से मान्यता दी जाने लगी है. आज देश के विभिन्न हिस्सों में हिंदू समुदाय के लोग इस परंपरा को निभा रहे हैं. लोग अपने पितरों को याद करते हुए उनका श्राद्ध कर रहे हैं. दिल्ली, राजस्थान, देवभूमि उत्तराखंड से लेकर मोक्ष और ज्ञान की धरती गया तक में पितरों का श्राद्ध किया जाता है.

पितृपक्ष 2026 का कैलेंडर
पूर्णिमा श्राद्धा- 26 सितंबर 2026, शनिवार
प्रतिपदा तिथि श्राद्ध- 27 सितंबर 2026, रविवार
द्वितीया श्राद्ध- 28 सितंबर 2026, सोमवार
तृतीया श्राद्ध- 29 सितंबर 2026, मंगलवार
चतुर्थी और पंचमी तिथि का श्राद्ध- 30 सितंबर 2026, बुधवार
षष्ठी तिथि का श्राद्ध- 1 अक्टूबर 2026, गुरुवार
सप्तमी तिथि का श्राद्ध- 2 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
अष्टमी तिथि का श्राद्ध- 3 अक्टूबर 2026, शनिवार
नवमी तिथि का श्राद्ध- 4 अक्टूबर 2026, रविवार
दशमी तिथि का श्राद्ध- 5 अक्टूबर 2026, सोमवार
एकादशी तिथि का श्राद्ध- 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार
द्वादशी तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
मघा तिथि का श्राद्ध- 7 अक्टूबर 2026, बुधवार
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध- 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार
चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध- 9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार
सर्वपितृ अमावस्या-10 अक्टूबर 2026, शनिवार

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