Pitra Paksha 2026: जल के बिना क्यों अधूरा है श्राद्ध? भगीरथ की कहानी से जुड़ा तर्पण का महत्व

अक्सर लोग पितरों के नाम से ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन कराते हैं. लेकिन जल देने की परंपरा पर ध्यान नहीं देते हैं. श्राद्ध कर्म में भोजन के साथ जल की व्यवस्था भी जरूरी रखनी चाहिए. तर्पण के दौरान पितरों का नाम और गौत्र स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है.

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इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाला है. (Photo: ITG) इस साल पितृपक्ष 26 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक रहने वाला है. (Photo: ITG)

अंशु पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 24 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:30 PM IST

Pitra Paksha 2026: पितृपक्ष में यदि आप ब्रह्मण को घर बुलाकर भोजन करा रहे हैं तो भोजन के साथ जल भी अवश्य रखें. पितृपक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और भोजन कराने की परंपरा है. इन कर्मों में जल का विशेष महत्व है. पितरों के निमित्त भोजन या अन्य सामग्री अर्पित करने के साथ जल देना भी आवश्यक है. इसे तर्पण कहा जाता है, जिसका भाव पितरों को तृप्त करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना है.

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अक्सर लोग पितरों के नाम से ब्राह्मणों को घर बुलाकर भोजन कराते हैं. लेकिन जल देने की परंपरा पर ध्यान नहीं देते हैं. श्राद्ध कर्म में भोजन के साथ जल की व्यवस्था भी जरूरी रखनी चाहिए. तर्पण के दौरान पितरों का नाम और गौत्र स्मरण कर श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जाता है. इसे दक्षिण दिशा की ओर मुख करके देने का विधान है. ऐसा करते समय यदि आप पितरों की दिशा दक्षिण-पश्चिम में बैठे तो बहुत अच्छा है.

भगीरथ से जुड़ी है परंपरा
पितरों के लिए जल के महत्व को राजा भगीरथ की कथा से समझा जा सकता है. भगीरथ अपने पूर्वजों के उद्धार के लिए गंगा को धरती पर लेकर आए थे. गंगा के अवतरण और उनके जल से पूर्वजों के उद्धार की कथा भारतीय परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है. इसी कारण पितृ कर्म में गंगाजल को विशेष पवित्र माना जाता है. हालांकि तर्पण के लिए केवल गंगाजल ही आवश्यक नहीं माना जाता है. गंगाजल उपलब्ध न होने पर स्वच्छ जल से भी श्रद्धापूर्वक तर्पण किया जा सकता है. जल से अधिक महत्वपूर्ण श्रद्धा और पूर्वजों का स्मरण है.

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ब्रह्म भोज से पहले गऊग्रास निकालें
पितृ पक्ष में यदि किसी पूर्वज की तिथि पर श्राद्ध किया जा रहा है तो उस दिन भोजन तैयार करने के बाद गाय के लिए अलग से ग्रास निकालकर उसे श्रद्धापूर्वक खिलाएं. गाय उपलब्ध न हो तो किसी गौशाला में गायों के लिए हरा चारा या भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है. मान्यता है कि ऐसा करने से हमारे पितृ बहुत प्रसन्न होते हैं और अपनी दया दृष्टि बनाए रखते हैं.

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