Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर यानी कल मनाई जाएगी. भाद्रपद माह की अमावस्या यानी पिठोरी अमावस्या का सनातन धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. यह तिथि जहां एक ओर माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखे जाने वाले व्रत के लिए जानी जाती है, वहीं दूसरी ओर यह पितरों के तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के लिए भी अत्यंत फलदायी मानी गई है.
पिठोरी अमावस्या के दिन की गई एक छोटी सी भूल भी आपके पितरों को नाराज कर सकती है, जिससे घर में पितृदोष उत्पन्न होने की संभावना रहती है. ऐसे में कल पिठोरी अमावस्या के पावन अवसर पर कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कि इस दिन किन गलतियों से बचना चाहिए.
बासी आटे का इस्तेमाल और भोजन की भूल
इस दिन भूलकर भी फ्रीज में रखा बासी या पुराना गूंथा हुआ आटा इस्तेमाल न करें. बासी आटा राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को बढ़ाता है और इसे 'पिंड' के समान माना गया है, जिससे पितृ नाराज होते हैं.
पितरों का तर्पण न करना और समय की अनदेखी
पितरों के नाम से तर्पण या दान दोपहर के समय (कुतूप काल) ही करना चाहिए. सुबह बहुत जल्दी या शाम के समय तर्पण करना वर्जित माना गया है. तर्पण या पितरों के नाम से दिया जलाते समय मुख हमेशा दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि यह पितरों की दिशा मानी जाती है.
द्वार पर आए अतिथि या पशु-पक्षी का अनादर
इस दिन घर में बना पहला भोजन केवल इंसानों के लिए नहीं होता. यदि आप गाय, कौवे, कुत्ते, देव और चींटियों (पंचबलि) के लिए भोजन का अंश नहीं निकालते हैं, तो श्राद्ध-पूजन अधूरा माना जाता है. साथ ही, इस दिन आपके दरवाजे पर कोई गरीब, भिक्षुक या पशु-पक्षी आए, तो उसे भोजन या जल जरूर दें. इनका अपमान करने से सीधा पितृदोष लगता है.
तुलसी पत्र तोड़ने और कुशा उखाड़ने से जुड़े नियम
अमावस्या तिथि के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त मना होता है. पूजा के लिए तुलसी पत्र एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें. यदि आप वर्षभर के पूजा-पाठ के लिए 'कुश' (पवित्र घास) एकत्र कर रहे हैं, तो बिना मंत्र बोले या लोहे के औजार से कुश न उखाड़ें.
घर में क्लेश और तामसिक आचरण
पिठोरी अमावस्या के दिन घर का माहौल शांत और भक्तिमय होना चाहिए. घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान करने या आपस में झगड़ा करने से पितृ रुष्ट होकर लौट जाते हैं. इस दिन घर में मांस-मदिरा, सिगरेट या अन्य तामसिक चीजों का सेवन भूलकर भी न करें.
पितृदोष से बचाव का सरल उपाय
इस दिन संध्याकाल के समय घर के मुख्य द्वार पर और पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों से अपनी भूल-चूक की क्षमा मांगें. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं.
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