Navratri 2026: शारदीय नवरात्र में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू होती है. इस साल नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है. पहले दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाएगी. धार्मिक मान्यता है कि इन नौ दिनों में पूजा के साथ घर की स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए. घटस्थापना के बाद कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना जाता है. आइए जानते हैं वे कौन-सी गलतियां हैं, जिनसे बचने की सलाह दी जाती है.
1. घटस्थापना के बाद घर को अकेला न छोड़ें
नवरात्र में कलश स्थापना के बाद पूजा स्थल की नियमित देखभाल जरूरी मानी जाती है. अगर घर में अखंड ज्योत जलाई गई है, तो उसकी सुरक्षा का ध्यान रखें. कोशिश करें कि ज्योत की निगरानी के लिए उचित व्यवस्था हो.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, घटस्थापना के बाद घर में ताला लगाकर पूरी तरह खाली छोड़ने से बचना चाहिए. पूजा स्थल को साफ रखें . कलश के आसपास गंदगी न होने दें. अखंड ज्योत जलाते समय आग से सुरक्षा का भी ध्यान रखें.
2. तामसिक भोजन से करें परहेज
नवरात्र में सात्विक भोजन का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज से परहेज करने की सलाह दी जाती है.
व्रत रखने वाले लोग अपने खान-पान में विशेष सावधानी बरतते हैं. वहीं, व्रत न रखने वाले भक्त भी इस दौरान सात्विक भोजन करना पसंद करते हैं. मान्यता है कि संयमित खान-पान से मन शांत रहता है, पूजा-पाठ में ध्यान लगाने में मदद मिलती है.
3. घर में लड़ाई-झगड़े से बचें
नवरात्र को मां दुर्गा की उपासना का पर्व माना जाता है. इस दौरान घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखने की सलाह दी जाती है. बेवजह बहस करने, गुस्सा करने और दूसरों को अपशब्द कहने से बचें.
परिवार के सदस्यों को आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि शांत वातावरण में पूजा-पाठ करने से मन एकाग्र रहता है. इसलिए छोटी-छोटी बातों पर विवाद करने के बजाय धैर्य से काम लें.
पूजा स्थल की साफ-सफाई का रखें ध्यान
घटस्थापना के बाद पूजा की जगह को साफ रखना जरूरी माना जाता है. कलश के आसपास अनावश्यक सामान न रखें. पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को व्यवस्थित रखें. रोज पूजा स्थल की सफाई करें.
कलश स्थापना के लिए साफ जगह चुनें. पूजा की सामग्री पहले से तैयार रखें, ताकि पूजा के दौरान परेशानी न हो. अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं. ऐसे में अपने परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहता है.
नवरात्र में घटस्थापना का क्या है महत्व?
घटस्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है. इसे शारदीय नवरात्र के पहले दिन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विधि के जरिए मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है. इसके साथ नौ दिनों की पूजा शुरू होती है.
कलश स्थापना में कलश, जल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, अक्षत, मौली और फूल जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. कई घरों में कलश के साथ जौ बोने की परंपरा भी है. जौ के अंकुरों को समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है.
घटस्थापना के मुहूर्त का रखें ध्यान
शारदीय नवरात्र में घटस्थापना प्रतिपदा तिथि पर की जाती है. इस साल नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 को हो रही है. पूजा का शुभ समय शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना चाहिए. इसलिए कलश स्थापना से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या किसी जानकार पुरोहित से मुहूर्त की पुष्टि कर लें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में विधि-विधान के साथ श्रद्धा और स्वच्छता का भी महत्व है. नवरात्र के नौ दिनों में नियमित पूजा, संयमित दिनचर्या और शांत वातावरण बनाए रखने का प्रयास करें.
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