लाखों की नौकरी छोड़ विदेश से लौटा, प्रेमानंद महाराज के लिए ला रहा दंडवत कांवड़

फरीदाबाद के सरूरपुर गांव का 28 वर्षीय रमन हरिद्वार से दंडवत कांवड़ यात्रा पर निकला है. वह हाल ही में जॉर्डन से नौकरी छोड़कर भारत आया था. रमन 4 लीटर गंगाजल से भरा कलश लेकर वृंदावन की ओर बढ़ रहा है. रमन का कहना है कि वह प्रेमानंद महाराज के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह यात्रा कर रहा है और वृंदावन पहुंचकर उन्हें गंगाजल से स्नान कराना चाहता है.

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रमन करीब 5 साल पहले जॉर्डन चला गया था. यहां एक कंपनी में काम करते हुए वो प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनता था. (Photo: ITG) रमन करीब 5 साल पहले जॉर्डन चला गया था. यहां एक कंपनी में काम करते हुए वो प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनता था. (Photo: ITG)

सचिन गौड़

  • फरीदाबाद,
  • 09 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

सावन का महीना चल रहा है और भगवान शिव को समर्पित कांवड़ यात्रा अपने आखिरी चरण में है. हरिद्वार और पश्चिमी यूपी से आगे बढ़ चुके कांवड़ियों की भीड़ अब दिल्ली-एनसीआर में भी दिखाई दे रही है. इस भीड़ में एक कांवड़िया ऐसा भी है जो विदेश से लाखों रुपए की नौकरी छोड़कर भारत आया है. और उसने वृंदावन के प्रेमानंद महाराज के उत्तम स्वास्थ्य का संकल्प लेते हुए कांवड़ उठाई है.

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फरीदाबाद के सरूरपुर गांव का 28 वर्षीय रमन हरिद्वार से दंडवत कांवड़ यात्रा पर निकला है. वह हाल ही में जॉर्डन से नौकरी छोड़कर भारत आया था. रमन 4 लीटर गंगाजल से भरा कलश लेकर वृंदावन की ओर बढ़ रहा है. रमन का कहना है कि वह प्रेमानंद महाराज के अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए यह यात्रा कर रहा है और वृंदावन पहुंचकर उन्हें गंगाजल से स्नान कराना चाहता है.

रमन ने करीब 350 किलोमीटर की ये लंबी यात्रा 22 जुलाई को शुरू की थी. फिलहाल वह फरीदाबाद पहुंच चुका है. इस यात्रा में उसके साथ दो भाई और तीन दोस्त शामिल हैं. कुल मिलाकर छह लोग इस यात्रा में शामिल हैं.

रमन मूल रूप से फरीदाबाद के सरूरपुर गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है. इसके बाद फरीदाबाद में एक्सपोर्ट कंपनी में काम किया. करीब 5 साल पहले वह जॉर्डन चला गया था. यहां एक एक्सपोर्ट कंपनी में कोऑर्डिनेटर की नौकरी की. परिवार में माता-पिता, चार भाई और एक बहन हैं. रमन सबसे छोटा है. उसके पिता बदरपुर बॉर्डर पर सिक्योरिटी गार्ड हैं. दो भाई निजी कंपनी में काम करते हैं. जबकि एक भाई की परचून की दुकान है.

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दंडवत कांवड़ लाने का ख्याल क्यों आया?
रमन ने करीब 3 साल पहले प्रेमानंद महाराज के ऑनलाइन प्रवचन सुनने शुरू किए थे. धीरे-धीरे वह उनसे जुड़ता चला गया. वह रोजाना तीन से चार घंटे तक नियमित रूप से उनके प्रवचन सुनता था. जब उसे उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मिली तो उसने दंडवत कांवड़ यात्रा का संकल्प लिया. इसके लिए उसने नौकरी छोड़ दी. 20 अप्रैल को जॉर्डन से रवाना हुआ और 21 अप्रैल को भारत पहुंच गया.

रमन ने बताया कि भारत लौटने के बाद भी वह नियमित रूप से प्रवचन सुनता रहा. इससे पहले वह 12 बार अलग-अलग प्रकार की कांवड़ ला चुका है. लेकिन दंडवत कांवड़ यात्रा पहली बार कर रहा है. शुरुआत में उसने परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी थी. बाद में पता चलने पर परिवार ने उसका साथ दिया. उसके भाई सोनू और कुंदन भी इस यात्रा में शामिल हैं. सभी लोग रास्ते में खाना बनाने का सामान अपने साथ लेकर चल रहे हैं.

प्रेमानंद महाराज को गंगाजल से स्नान कराने का संकल्प
रमन ने बताया कि वह कभी प्रेमानंद महाराज से नहीं मिला, क्योंकि जब से वह उनके प्रवचन सुनने लगा, तब से विदेश में ही था. उसे विश्वास है कि वृंदावन पहुंचने पर उसकी मुलाकात प्रेमानंद महाराज से जरूर होगी. वह उन्हें गंगाजल से स्नान कराना चाहता है. यही उसके जीवन की सबसे बड़ी इच्छा है.

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रमन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में यात्रा के दौरान पुलिस की ओर से अच्छे इंतजाम मिले. हालांकि कालिंदी कुंज के रास्ते हरियाणा में प्रवेश करने के बाद फरीदाबाद में भारी ट्रैफिक के कारण आगे बढ़ने में परेशानी हुई. ट्रैफिक व्यवस्था के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे और उसके साथियों को खुद रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ना पड़ा.

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