Jitiya Vrat 2026: कल या परसों, कब है जितिया व्रत? नोट करें नहाय खाय से लेकर पारण तक की तिथियां

Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका व्रत) संतान की लंबी आयु, सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है. यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपने पुत्रों की रक्षा और कल्याण के लिए किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और उसे दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

Advertisement
जितिया व्रत 2026 जितिया व्रत 2026

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:28 PM IST

Jitiya Vrat 2026: हिंदू धर्म में माताएं अपनी संतानों की लंबी उम्र, आरोग्य और उज्जवल भविष्य के लिए कई कठिन व्रत रखती हैं, जिनमें जितिया व्रत का स्थान सर्वोपरि है. जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत और जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और नेपाल के कुछ हिस्सों में अत्यंत श्रद्धा और कठोर नियमों के साथ मनाया जाता है. तीन दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में माताएं बिना अन्न और जल के निर्जला उपवास रखती हैं.

Advertisement

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में जिउतिया व्रत की तिथियों को लेकर माताओं में उत्सुकता बनी हुई है. आइए जानते हैं इस साल जितिया व्रत के नहाय-खाय, मुख्य व्रत और पारण का सटीक समय तथा शुभ मुहूर्त क्या रहेगा.

जितिया व्रत की तिथि और डेट 

जितिया व्रत का यह पावन व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. यह पर्व कुल तीन दिनों तक चलता है, जिसके हर दिन का अपना एक अलग धार्मिक नियम और महत्व है.

पंचांग के अनुसार, जितिया व्रत की तिथि इस बार 3 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. इसी कारण जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार को रखा जाएगा.

जितिया व्रत की मुख्य तिथियां

Advertisement

नहाय-खाय (पहला दिन): 2 अक्टूबर, शुक्रवार सप्तमी तिथि

निर्जला उपवास व पूजा (दूसरा दिन)- 3 अक्टूबर, शनिवार: अष्टमी तिथि

पारण (व्रत का समापन- तीसरा दिन): नवमी तिथि

जितिया व्रत के नियम

इस दिन भोजन में लहसुन-प्याज का प्रयोग वर्जित होता है. कई परंपराओं में इस दिन नोनी का साग और मड़ुआ की रोटी खाने का विशेष विधान है, जिसे बेहद शुद्धता के साथ तैयार किया जाता है.

जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत पूजा शुभ मुहूर्त 

ब्रह्म मुहूर्त - 04:38 एम से 05:26 एम 
प्रातः संध्या - 05:02 एम से 06:15 एम 
अभिजित मुहूर्त - 11:46 एम से 12:34 पीएम 
गोधूलि मुहूर्त - 06:05 पीएम से 06:29 पी एम सायाह्न संध्या - 06:05 पीएम से 07:18 पी एम

जितिया व्रत का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से उत्तरा के गर्भ की रक्षा हुई थी और मृतप्राय बालक जीवित हो उठा था, तभी से इस व्रत की परंपरा चली आ रही है. जिउमाता बच्चों की रक्षा कवच बनकर उनके जीवन में आने वाले सभी दुखों और अकाल मृत्यु के संकट को टालती हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »