सावन का महीना चल रहा है और इस पवित्र महीने में शिवलिंग का जलाभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक जगह पांच ऐसे शिवलिंग भी हैं, जिनका अभिषेक खुद समुद्र देवता करते हैं. गंगेश्वर महादेव मंदिर केंद्र शासित प्रदेश दीव के फुदम गांव के पास अरब सागर के किनारे स्थित है. दीव शहर से यह मंदिर करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर है. समुद्र तट की चट्टानों के बीच स्थित यह मंदिर आकार में भले ही भव्य न हो, लेकिन अपनी अनोखी विशेषता के कारण बेहद खास है.
यहां भगवान शिव के पांच शिवलिंग एकसाथ विराजमान हैं और यही इस स्थान की सबसे बड़ी पहचान है. स्थानीय मान्यता और धार्मिक परंपरा के अनुसार, महाभारत काल में पांच पांडव वनवास के दौरान इस क्षेत्र में आए थे. पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की और पांच शिवलिंग स्थापित किए. कहा जाता है कि पांचों शिवलिंगों का आकार अलग-अलग है. मान्यता के अनुसार पहला शिवलिंग युधिष्ठिर, दूसरा भीम, तीसरा अर्जुन, चौथा सहदेव और पांचवां नकुल से जुड़ा है. पांडवों ने अपने कद के हिसाब से शिवलिंग बनाए थे.
कैसे शिवलिंग तक पहुंचता है समुद्र?
गंगेश्वर महादेव मंदिर समुद्र के बेहद करीब स्थित है. जब समुद्र में ज्वार आता है तो अरब सागर की लहरें चट्टानों के बीच से आगे बढ़ती हैं और शिवलिंग तक पहुंच जाती हैं. समुद्र का पानी शिवलिंग को स्पर्श करता है और इस तरह भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक होता है. लहरें आती हैं, शिवलिंग को स्पर्श करती हैं और फिर वापस समुद्र में समा जाती हैं. यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए बेहद आध्यात्मिक और अद्भुत अनुभव होता है.
जब समुद्र में भाटा आता है तो पानी का स्तर नीचे चला जाता है और चट्टानों के बीच स्थित पांचों शिवलिंग अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं. इसी कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ज्वार-भाटा के समय का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. एक तरफ विशाल अरब सागर दूसरी तरफ प्राकृतिक चट्टानें और इनके बीच भगवान शिव के पवित्र शिवलिंग. समुद्र की लहरों की आवाज और हर-हर महादेव के जयघोष से यहां का वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
सावन के महीने में दूर-दूर से आते हैं भक्त
श्रावण मास और महाशिवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है. भक्त भगवान शिव को जल, बिल्वपत्र और फूल अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं. गंगेश्वर महादेव मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम का भी प्रतीक है. दीव आने वाले पर्यटकों के लिए समुद्र तट, प्राकृतिक चट्टानें और समुद्र के बीच स्थित यह अनोखा मंदिर एक अलग अनुभव प्रदान करता है.
इनपुट- दिलीप मोरी
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