Ganesh Visarjan 2026: आज शाम तक मिलेंगे गणेश विसर्जन के 4 मुहूर्त, नोट करें भद्रा और पंचक का समय

Ganesh Visarjan 2026: आज गणपति के विसर्जन के लिए सुबह के अलावा भी 4 शुभ मुहूर्त रहेंगे, जिसमें भक्त पूरी श्रद्धा के साथ अपने बप्पा को विदाई दे सकते हैं. जानें गणेश जी के विसर्जन का शुभ समय, भद्रा, पूजा विधि और विसर्जन के नियम.

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गणेश विसर्जन के लिए मिलेंगे 4 अन्य विशेष मुहूर्त (Photo: ITG) गणेश विसर्जन के लिए मिलेंगे 4 अन्य विशेष मुहूर्त (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 8:39 AM IST

Ganesh Visarjan 2026: 10 दिन का बप्पा का महोत्सव आज समाप्त हुआ. आज यानी 25 सितंबर 2026 को देशभर में गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा. इस दिन भक्त पूरे भाव और धूमधाम के साथ अपने प्रिय लाडले बप्पा को जल में प्रवाहित कर उनसे अगले बरस शीघ्र आने की प्रार्थना करते हैं. ज्योतिषीय गणना और पंचांग के अनुसार, आज गणेश विसर्जन के लिए दिन से लेकर शाम तक 4 सबसे श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं.

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इसके साथ ही, आज के दिन पूजा और विसर्जन करते समय भद्रा और पंचक की स्थिति का ध्यान रखना भी बेहद आवश्यक माना गया है. आइए जानते हैं आज शाम तक के विसर्जन मुहूर्त. 

गणेश विसर्जन के शुभ मुहूर्त

अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक

अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक

रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26

आज भद्रा का समय

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज भद्रा लगेगी, जो कि कल सुबह तक प्रभावी रहेगी. यानी आज भद्रा रात 11 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और समापन 26 सितंबर की सुबह 6 बजकर 11 मिनट पर होगा. 

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पंचक का समय

चंद्रमा के कुंभ राशि में विराजमान होने के कारण आज पंचक का प्रभाव भी बना हुआ है. आज पूरे दिन पंचक की छाया रहेगी. 

धर्मशास्त्रों के अनुसार, पंचक में भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन पूरी तरह से शास्त्रसम्मत और शुभ होता है. बस ध्यान रखें कि विसर्जन से पूर्व पंचक शांति के रूप में बप्पा के चरणों में कुशा (घास), अक्षत और ताजे पुष्प अर्पित करें और क्षमा प्रार्थना करके ही जल में प्रवाहित कराएं.

विसर्जन के समय ध्यान रखने योग्य जरूरी बातें

- विसर्जन से ठीक पहले बप्पा को रोली-चंदन का तिलक लगाएं, 21 दूर्वा, मोदक और लाल फूल अर्पित करके आरती उतारें.

- फिर, एक लाल कपड़े में थोड़ा अक्षत, दूर्वा, सिक्के और मोदक बांधकर बप्पा की मूर्ति के साथ रखें.

- उसके बाद, आरती के बाद प्रतिमा को चौकी सहित 2 इंच आगे खिसका दें, जो कि प्रस्थान की अनुमति का प्रतीक है.

- विसर्जन के समय मूर्ति को पानी में फेंकें नहीं, बल्कि बहुत ही आदरपूर्वक और धीरे-धीरे जल में विसर्जित करें.

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