Ahoi Ashtami 2026: 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, जानें पूजा विधि, व्रत कथा और चंद्रोदय का समय

Ahoi Ashtami 2026: अहोई अष्टमी 2026 का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा. जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, अष्टमी तिथि, तारों के दर्शन का समय, चंद्रोदय और अहोई माता की पूजा विधि.

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अहोई अष्टमी 2026 का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा. अहोई अष्टमी 2026 का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 31 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

Ahoi Ashatami 2026: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की खुशहाली, अच्छी सेहत और लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाता है. इस दिन माताएं पूरे दिन व्रत रखकर शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से अहोई माता की आराधना करने से संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. इस दिन पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोलने की परंपरा है.

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इस साल अहोई अष्टमी का पर्व 1 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा. खास बात यह है कि इस दिन शाम के समय पूजा का विशेष मुहूर्त बन रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं अहोई अष्टमी की सही तिथि, पूजा का समय, तारों के निकलने का समय, चंद्रोदय और व्रत की पूरी पूजा विधि.

अहोई अष्टमी 2026 कब है? 
हिंदू पंचांग के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. साल 2026 में यह तिथि 1 नवंबर को पड़ रही है.
- अष्टमी तिथि शुरू: 1 नवंबर 2026, दोपहर 2:51 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2026, दोपहर 1:10 बजे
- अहोई अष्टमी व्रत: रविवार, 1 नवंबर 2026


अहोई अष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त 
अहोई अष्टमी पर शाम के समय अहोई माता की पूजा करना शुभ माना जाता है. इस साल पूजा के लिए करीब 1 घंटे 18 मिनट का समय मिलेगा.
- पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:36 बजे से 6:54 बजे तक
- तारों के दर्शन का समय: शाम करीब 6:00 बजे
- चंद्रोदय का समय: रात करीब 11:40 बजे (नई दिल्ली)

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ध्यान रखें कि तारों और चंद्रमा के निकलने का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है. अहोई अष्टमी पर अधिकतर महिलाएं तारों को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं, जबकि कुछ परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है.

अहोई अष्टमी का धार्मिक महत्व 
अहोई अष्टमी को अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, तरक्की और खुशहाल जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं.

पहले यह व्रत मुख्य रूप से पुत्र की लंबी उम्र के लिए रखा जाता था, लेकिन अब बेटियों और बेटों दोनों की सुख-समृद्धि के लिए माताएं यह व्रत करती हैं. इसे करवा चौथ के चार दिन बाद मनाया जाता है.

अहोई अष्टमी पूजा सामग्री

अहोई माता की पूजा के लिए पहले से कुछ जरूरी सामग्री एकत्रित कर लेनी चाहिए.
- अहोई माता का चित्र या दीवार पर बना चित्र
- रोली, अक्षत और हल्दी
- फूल और माला
- दीपक, धूप और अगरबत्ती
- गेहूं और जल से भरा कलश
- दूध, फल और मिठाई
- हलवा, पूरी और पुए
- सरई की सात सींके या कपास की कलियां

अहोई अष्टमी पूजा विधि 
1. सुबह स्नान करके लें व्रत का संकल्प

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अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल पर अहोई माता का ध्यान करके संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत का संकल्प लें. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रख सकती हैं.

2. अहोई माता का चित्र स्थापित करें

शाम की पूजा के लिए घर की दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या उनकी तस्वीर स्थापित करें. पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. इसके बाद गेहूं रखकर जल से भरा कलश स्थापित करें.

3. विधि-विधान से करें माता की पूजा

शुभ मुहूर्त में अहोई माता के सामने घी का दीपक जलाएं. माता को रोली, अक्षत, फूल और माला अर्पित करें. इसके बाद हलवा, पूरी, फल और मिठाई का भोग लगाएं. पूजा में सात सरई की सींके रखने की भी परंपरा है.

4. पढ़ें अहोई अष्टमी की व्रत कथा

पूजा के दौरान अहोई अष्टमी की व्रत कथा पढ़ें या परिवार के किसी सदस्य से सुनें. कथा के बाद अहोई माता की आरती करें और संतान के सुखी जीवन की कामना करें.

5. तारों को अर्घ्य देकर खोलें व्रत

शाम को तारे दिखाई देने पर उन्हें जल अर्पित करें. इसके बाद अहोई माता का स्मरण करते हुए व्रत का पारण करें. जिन परिवारों में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है, वे चंद्रोदय के बाद व्रत खोल सकते हैं.

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अहोई अष्टमी पर राधा कुंड स्नान का महत्व
अहोई अष्टमी का संबंध मथुरा के राधा कुंड से भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा कुंड में स्नान करना बेहद पुण्यकारी होता है. मान्यता है कि संतान सुख की कामना करने वाले दंपति इस दिन राधा कुंड में स्नान करके राधा रानी की पूजा करते हैं.

मथुरा के गोवर्धन स्थित राधा कुंड में अहोई अष्टमी की रात विशेष स्नान का आयोजन होता है. इसे अहोई अष्टमी स्नान या राधा कुंड स्नान के नाम से जाना जाता है. मान्यता के अनुसार, इस दिन यहां स्नान और पूजा करने से संतान संबंधी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

अहोई माता की आरती 
अहोई अष्टमी की पूजा के बाद अहोई माता की आरती करने की परंपरा है. 

जय अहोई माता, जय अहोई माता,
तुमको निसदिन ध्यावत, हर विष्णु विधाता.

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमला, तू ही है जगमाता,
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता.

ॐ जय अहोई माता.

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