जिस घर में गूंजी थी शहनाई, वहां अब मातम... शादी के महज 30 दिन बाद तिरंगे में लिपटकर लौटेंगे मेजर हमजा

एक महीने पहले जिस घर में शहनाइयां गूंजी थीं, जहां दुल्हन के हाथों की मेहंदी का रंग भी अभी गहरा था, उस घर में आज मातम छाया है. राजस्थान के जैसलमेर में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में इंदौर के रहने वाले सेना के मेजर हमजा आरिफ का निधन हो गया है.

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जैसलमेर सड़क हादसे में इंदौर के लाल की मौत.(Photo:ITG) जैसलमेर सड़क हादसे में इंदौर के लाल की मौत.(Photo:ITG)

धर्मेंद्र कुमार शर्मा / विमल भाटिया

  • जैसलमेर/इंदौर,
  • 31 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:44 PM IST

हाथों की मेहंदी का रंग अभी ठीक से उतरा भी नहीं था. महज एक महीना पहले ही शहनाइयों की गूंज के बीच शादी की डोर बंधी थी और नए सपनों का एक आशियाना सज रहा था. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जिस चौखट पर दुल्हन के कदम पड़े थे, वहां अब इंदौर का लाल, भारतीय सेना का मेजर हमजा आरिफ, तिरंगे में लिपटकर अंतिम विदा लेने लौट रहा है.

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यह मार्मिक और दिल दहला देने वाली घटना राजस्थान के जैसलमेर की है, जहां गुरुवार देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे ने एक हंसता-खेलता परिवार और पूरे इंदौर शहर को गहरे शोक में डुबो दिया.

इंदौर के धनवंतरी नगर के रहने वाले 30 साल के हमजा आरिफ बेहद होनहार युवा थे. उन्होंने साल 2016 में इंदौर के चमेली देवी कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. लेकिन उनके सपनों की उड़ान इंजीनियरिंग की दीवारों तक सीमित नहीं थी; उन्होंने देश सेवा का मार्ग चुना.

2017 में NDA कड़ी परीक्षा पास कर वह भारतीय सेना में अधिकारी बने. अपनी निष्ठा, काबिलियत और उत्कृष्ट सेवा के बल पर महज 9 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने तीन पदोन्नतियां हासिल कीं और मेजर के पद पर पहुंचे. वर्तमान में उनकी पदस्थापना राजस्थान के जैसलमेर में थी.

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उस काली रात का खौफनाक हादसा
गुरुवार देर रात लगभग 12:30 बजे, कर्तव्य के बाद जैसलमेर शहर से अपनी काले रंग की टाटा सफारी में 3 सैन्य अधिकारी जैसलमेर मिलिट्री स्टेशन लौट रहे थे. कार खुद मेजर हमजा आरिफ चला रहे थे. उनके साथ दो युवा सहकर्मी लेफ्टिनेंट आयुष्मान गुसाईं और लेफ्टिनेंट अभिनव राठौर भी सवार थे.

जैसलमेर जिला मुख्यालय से करीब 6 किमी दूर, वार म्यूजियम से आगे आर्मी एरिया के पास, अचानक सड़क पर एक ऊंट आ गया.

अंधेरे और तेज रफ्तार के बीच कार संभल न सकी और ऊंट से जा टकराई. टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी 5 बार पलटी खाते हुए करीब 100 मीटर तक घिसटती चली गई. इस भयानक हादसे में ऊंट की भी मौके पर ही मौत हो गई और एसयूवी के परखच्चे उड़ गए.

अस्पताल में टूटी उम्मीद की सांसें
घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. सूचना मिलते ही सेना के जवान और अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे तीनों अधिकारियों को बाहर निकालकर आनन-फानन में मिलिट्री हॉस्पिटल ले जाया गया.

डॉक्टरों ने अथक प्रयास किए, लेकिन गंभीर चोटों के कारण मेजर हमजा आरिफ ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वहीं, दोनों घायल लेफ्टिनेंट अधिकारियों का मिलिट्री हॉस्पिटल में उपचार जारी है. पुलिस अधिकारी एएसआई जगदीश चारण के अनुसार, मृत मेजर के शव को पोस्टमार्टम के लिए जवाहर चिकित्सालय जैसलमेर की मोर्चरी में रखवाया गया.

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एक त्रासदी की दुखद याद
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा ठीक उसी स्थान पर हुआ है, जहां एक साल पहले एक प्राइवेट बस में भीषण आग लग जाने से 29 यात्रियों की जलकर दर्दनाक मौत हो गई थी.

शोक में डूबा इंदौर, नम हुईं आंखें
मेजर हमजा आरिफ के असमय चले जाने की खबर जैसे ही उनके गृह नगर इंदौर पहुंची, हर आंख नम हो गई. धनवंतरी नगर स्थित उनके निवास पर सन्नाटा पसार गया, जहां एक महीने पहले तक खुशियों की गूंज थी.

शुक्रवार को क्षेत्रीय विधायक मधु वर्मा और पार्षद प्रशांत बडवे मेजर के निवास पहुंचे. उन्होंने शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी और इस कठिन समय में हरसंभव मदद का भरोसा जताया.

एक होनहार अधिकारी, एक समर्पित बेटा और महज़ एक महीने पुराना जीवनसाथी मेजर हमजा आरिफ देश के लिए अपनी अमिट छाप छोड़ गए हैं. उनका यह बलिदान और उनकी अंतिम यात्रा हमेशा इंदौर और पूरे देश के दिलों में सम्मान के साथ दर्ज रहेगी.

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