स्कूलों तक पहुंचने से पहले गायब हुआ 81 लाख का राशन! कोटा में मिड-डे मील घोटाले की जांच तेज

राजस्थान के कोटा में सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील के लिए आवंटित 3,213 क्विंटल गेहूं और चावल स्कूलों तक नहीं पहुंचे. विभागीय जांच में करीब 81 लाख रुपये के खाद्यान्न की कमी मिली है. गुजरात की भैरवनाथ रोडवेज फर्म पर आरोप लगा है. रसद विभाग की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है और पुलिस खाद्यान्न के गायब होने की जांच कर रही है.

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गुजरात की ट्रांसपोर्ट फर्म पर FIR.(Photo: Screengrab) गुजरात की ट्रांसपोर्ट फर्म पर FIR.(Photo: Screengrab)

चेतन गुर्जर

  • कोटा,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:49 PM IST

राजस्थान के कोटा में स्कूली बच्चों के मिड-डे मील के गेहूं और चावल की सप्लाई में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. सरकारी गोदाम से उठाया गया 3 हजार 213 क्विंटल खाद्यान्न स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं. विभागीय जांच में गुजरात की एक ट्रांसपोर्ट फर्म पर राशन गायब करने का आरोप लगा है. गायब खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये और खुले बाजार में एक करोड़ से 1.10 करोड़ रुपये तक आंकी गई है. रसद विभाग की शिकायत पर नयापुरा थाने में FIR दर्ज की गई है.

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यह मामला कोटा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के पोषाहार के लिए आवंटित गेहूं और चावल से जुड़ा है. राष्ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम के तहत जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के लिए खाद्यान्न आवंटित किया गया था. गोदाम से राशन का शत-प्रतिशत उठाव होने के बावजूद स्कूलों में लगातार मिड-डे मील के लिए खाद्यान्न कम पहुंचने की शिकायतें मिलने लगीं.

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खाद्यान्न का उठाव कोटा के सेंट्रल वेयर हाउस नंबर-1 से 14 जुलाई से 21 जुलाई के बीच किया गया था. इसके परिवहन की जिम्मेदारी गुजरात के हिम्मतनगर स्थित मैसर्स भैरवनाथ रोडवेज को दी गई थी. फर्म को खाद्यान्न पहुंचाने के लिए 32 रुपये 6 पैसे प्रति क्विंटल की दर से वर्कऑर्डर जारी किया गया था.

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जांच में 3,213 क्विंटल गेहूं-चावल की कमी का खुलासा

स्कूलों से लगातार शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने ब्लॉकवार आवंटन और वहां पहुंचाए गए राशन का सत्यापन कराया. जांच में पता चला कि 1,844 क्विंटल गेहूं और 1,369 क्विंटल चावल स्कूलों तक नहीं पहुंचे. इस तरह कुल 3,213 क्विंटल खाद्यान्न की कमी सामने आई.

विभागीय आकलन के मुताबिक, गायब खाद्यान्न की कीमत सरकारी दर पर करीब 81 लाख रुपये है. वहीं, खुले बाजार में इसकी कीमत एक करोड़ से लेकर एक करोड़ 10 लाख रुपये तक बताई गई है. गोदाम से पूरा राशन उठाए जाने और स्कूलों तक इसकी आपूर्ति में अंतर मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई शुरू की गई.

जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) रूप सिंह मीणा ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न उठाए जाने के बावजूद स्कूलों से मिड-डे मील का राशन कम पड़ने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं. इसके बाद सभी सीबीईओ से रिपोर्ट मांगी गई. रिपोर्ट में गोदाम से हुए उठाव और स्कूलों में पहुंची आपूर्ति के बीच अंतर सामने आया. उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग लगातार रसद विभाग को इस बारे में लिख रहा था और स्कूलों में उपलब्ध कराए गए खाद्यान्न की पर्चियां भी मौजूद हैं.

फर्म को नोटिस, जवाब नहीं मिलने पर दर्ज हुई FIR

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जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद रसद विभाग ने ट्रांसपोर्ट फर्म के प्रोपराइटर नारायणलाल शंकर लाल खटीक और उसके सहयोगी अधिकृत व्यक्ति शैलेंद्र शर्मा को 14 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. उनसे 15 अक्टूबर को सुबह 10:30 बजे तक जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय तक कोई जवाब नहीं दिया गया.

इसके बाद रसद विभाग ने नयापुरा थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 316(2), 316(3) और 61(2)(ए) के तहत मामला दर्ज किया है. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सरकारी गोदाम से उठाए गए खाद्यान्न को स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया और कथित गड़बड़ी में किन लोगों की भूमिका है.

बच्चों के पोषाहार की सप्लाई पर उठे सवाल

सरकारी गोदाम से खाद्यान्न का पूरा उठाव होने के बावजूद स्कूलों तक राशन नहीं पहुंचना पोषाहार वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. जुलाई से सितंबर 2026 की दूसरी तिमाही के लिए आवंटित गेहूं और चावल की सप्लाई में सामने आई इस कमी की अब पुलिस जांच कर रही है.

जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि 3,213 क्विंटल खाद्यान्न कहां गया, परिवहन के दौरान क्या हुआ और इस मामले में कौन-कौन जिम्मेदार है. फिलहाल गुजरात की ट्रांसपोर्ट फर्म के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है.

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