'आजतक पंचायत राजस्थान' के कार्यक्रम में बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल हुए, इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष के विरोध पर तीखा पलटवार किया है. भूपेंद्र यादव ने कहा कि देश में SIR की प्रक्रिया पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि इससे पहले भी आठ बार यह प्रक्रिया अपनाई जा चुकी है.
भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात होनी चाहिए.
आजतक की एक चर्चा के दौरान भूपेंद्र यादव ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि अगर SIR की प्रक्रिया गलत है, तो इसके बाद केरल में बनी सरकार और अलग-अलग राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों को किस नजरिए से देखा जाना चाहिए.
'SIR पहली बार नहीं हो रही, पहले भी 8 बार हो चुकी है'
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि SIR संविधान के मुताबिक हो रहा है, SIR की प्रक्रिया का कानूनी आधार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में है., उनके मुताबिक, इस कानून और इससे जुड़े प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं.
उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया देश में पहले भी आठ बार हो चुकी है और मौजूदा पुनरीक्षण चुनाव आयोग की नियमित जिम्मेदारियों का हिस्सा है. उन्होंने पिछले पुनरीक्षण चक्रों का जिक्र करते हुए कहा कि 1952, 1957, 1961, 1965-66, 1973-74, 1977-79, 1992-95 और 2002-05 के दौरान अलग-अलग चरणों में मतदाता सूचियों का विशेष पुनरीक्षण किया गया था.
भूपेंद्र यादव ने यकहा कि समय के साथ लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने और प्रवास बढ़ने के कारण मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण जरूरी हो जाता है. देश में 9वीं बार एसआईआर की प्रक्रिया हो रही है.
राहुल गांधी के आरोपों पर भूपेंद्र यादव ने उठाए सवाल
भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के उन आरोपों पर सवाल उठाए, जिनमें मतदाता सूची में गड़बड़ियों और SIR की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई गई है, उन्होंने कहा कि आरोप लगाने के साथ-साथ ठोस तथ्य और सबूत भी सामने रखे जाने चाहिए, लेकिन राहुल गांधी कोई सबूत नहीं रख पाते हैं.
उन्होंने राहुल गांधी के कथित बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि केवल किसी बात का संदेह या महसूस होना अपने आप में प्रमाण नहीं है. यादव ने सवाल किया कि यदि विपक्ष को प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसे तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए.
फॉर्म-6 और दस्तावेजों पर भी मंत्री ने दिया जवाब
SIR के तहत फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त जानकारी और माता-पिता या दादा-दादी के जन्मस्थान से जुड़े विवरण मांगे जाने पर सवाल उठाया. इन जानकारियों की जरूरत क्यों पड़ी और क्या इस प्रक्रिया का इस्तेमाल घुसपैठियों की पहचान के लिए किया जा रहा है.
इस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि SIR के दौरान दस्तावेजों की मांग को पूरी तरह नया या कानून के दायरे से बाहर का कदम बताना सही नहीं है, उन्होंने बिहार में हुए पुनरीक्षण और उससे जुड़े सुप्रीम कोर्ट के मामले का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेजों के विकल्पों को लेकर न्यायिक स्तर पर भी चर्चा हुई है.
उन्होंने दावा किया कि पहले सीमित दस्तावेजों के आधार पर पात्रता साबित करने की व्यवस्था थी, जबकि बाद में दस्तावेजों के विकल्प बढ़ाए गए। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को भी निर्धारित दस्तावेजों की सूची में शामिल करने की अनुमति दी थी,
अखिलेश यादव और राहुल गांधी के रुख पर भी चर्चा
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राहुल गांधी के SIR को लेकर अलग-अलग रुख का मुद्दा उठाया. अखिलेश यादव SIR के समर्थन में हैं और राहुल गांधी इसका विरोध कर रहे हैं, तो क्या विपक्षी गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं.
इस पर चर्चा के दौरान विपक्ष की एकजुटता और SIR के विरोध के आधार पर सवाल उठे. भूपेंद्र यादव ने अपने जवाब में दोहराया कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप लगाने के बजाय कानूनी प्रावधानों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर बहस होनी चाहिए.
'चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है मतदाता सूची का पुनरीक्षण'
भूपेंद्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची को अपडेट रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. उनके मुताबिक, SIR को पहली बार हो रही प्रक्रिया या संवैधानिक दायरे से बाहर का कदम बताना उचित नहीं है.
SIR को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच विवाद लगातार राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। जहां सरकार और उसके समर्थक इसे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बताते हैं, वहीं विपक्ष दस्तावेजों की मांग, संभावित मतदाता विलोपन और प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है.
'फॉर्म-7 में गड़बड़ी है तो 1,000 बूथ एजेंटों की सूची दिखाएं'
SIR के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग के आरोपों पर जवाब देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि यदि बूथ स्तर पर गलत तरीके से नाम काटे जा रहे हैं, तो ऐसे मामलों के प्रमाण सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं.
भूपेंद्र यादव ने कहा कि मैं आपके चैनल के माध्यम से राहुल गांधी जी की पार्टी को चुनौती देता हूं. पूरे देश में करीब 15 लाख बूथ हैं. इनमें से 1,000 बूथ एजेंट ऐसे निकालकर दिखा दें, जिन्होंने शिकायत की हो कि गलत तरीके से मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. उन्होंने कहा कि विपक्ष को उन बूथों और शिकायतों की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए, जहां उसके मुताबिक गलत तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
फॉर्म-6 और फॉर्म-7? भूपेंद्र यादव ने समझाया अंतर
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने मतदाता सूची में इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के बीच अंतर भी समझाया. उन्होंने बताया कि फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची मे ंनाम शामिल कराने के लिए किया जाता है. वहीं, फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने या उसके खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है. ऐसे मामलों में मृत्यु, स्थायी रूप से दूसरी जगह चले जाने, दोहरी प्रविष्टि या अन्य निर्धारित आधारों पर आपत्ति की जा सकती है.
यादव ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाते हैं. उन्होंने जोर दिया कि किसी भी नागरिक या राजनीतिक दल को शिकायत करने का अधिकार है, लेकिन शिकायत के आधार और उसके तथ्यों की जांच भी होनी चाहिए.
'गलत जानकारी देने पर कार्रवाई का प्रावधान'
भूपेंद्र यादव ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटवाने के लिए जानबूझकर गलत या दुर्भावनापूर्ण जानकारी देने के मामलों में कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है.
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर किसी मतदाता का नाम हटवाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि विपक्ष यदि ऐसी गड़बड़ियों का आरोप लगा रहा है, तो उसे संबंधित मामलों की शिकायत और सबूत भी सामने रखने चाहिए.
यादव ने कहा कि शिकायत करने का अधिकार सभी को है, चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस हो या कोई अन्य राजनीतिक दल, लेकिन किसी भी आरोप को बिना प्रमाण के सही मान लेना उचित नहीं है.
SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
SIR के तहत दस्तावेजों और फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए अतिरिक्त विवरणों पर उठ रहे सवालों के बीच भूपेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख किया.
उन्होंने कहा कि बिहार में SIR की प्रक्रिया को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी और दस्तावेजों की सूची पर भी अदालत में विचार हुआ। यादव ने अदालत की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने संवैधानिक दायित्व के तहत प्रशासनिक निर्णय लेने का अधिकार है.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और SIR की प्रक्रिया उसके अधिकार क्षेत्र में आती है। उनके मुताबिक, इस मामले में अंतिम कानूनी व्याख्या और विवादों पर निर्णय लेने का अधिकार अदालत के पास है.
हालांकि, फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त विवरण जोड़ने की आवश्यकता और चुनाव आयोग के भीतर इस बदलाव को लेकर कथित असहमति के सवालों पर चर्चा के दौरान बहस जारी रही.
राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन पर भी साधा निशाना
भूपेंद्र यादव ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं को तथ्यों और निर्धारित प्रक्रियाओं के माध्यम से उठाने के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन और मीडिया में चर्चा हासिल करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है.
उन्होंने कहा कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं, अदालतों और चुनाव आयोग के फैसलों पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ ही उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन भी करना चाहिए.
यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना और शिकायत दर्ज कराना नागरिकों का अधिकार है, लेकिन राजनीतिक विरोध के दौरान पुलिसकर्मियों, महिला पत्रकारों और अन्य लोगों के साथ दुर्व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता.
उन्होंने कांग्रेस नेताओं के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए कुछ कथित घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी और उनकी पार्टी के आचरण पर सवाल उठाए.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह को लेकर भी हुई बहस
चर्चा के दौरान जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की अनुमति और प्रदर्शनकारियों के लिए निर्धारित स्थानों का मुद्दा भी उठा। एंकर ने सवाल किया कि यदि सरकार विपक्ष के आंदोलन से दबाव में नहीं है, तो प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर पाबंदियां क्यों लगाई गईं और प्रदर्शनकारियों को दूसरी जगहों पर जाने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
इस पर भूपेंद्र यादव ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान और अनुमति से संबंधित व्यवस्थाएं लागू होती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों को अदालत का दरवाजा खटखटाने और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करने में क्या परेशानी है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर प्रदर्शन के लिए किसी भी स्थान या तरीके को स्वतः मंजूरी मिल जाए.
'विपक्ष को आरोपों के साथ सबूत भी देने चाहिए'
SIR को लेकर अपनी बात दोहराते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों की जांच होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए ठोस शिकायतें और प्रमाण सामने आना जरूरी है.
उन्होंने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि अगर फॉर्म-7 के जरिए बड़े पैमाने पर गलत तरीके से नाम काटे जाने का दावा किया जा रहा है, तो ऐसे मामलों की सूची सार्वजनिक की जाए. उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाने के साथ-साथ विपक्ष को अपनी शिकायतों को निर्धारित व्यवस्था के तहत आगे बढ़ाना चाहिए.
'देश भीड़तंत्र से नहीं, लोकतंत्र से चलता है'
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत में स्वतंत्र चुनाव आयोग और निष्पक्ष न्यायपालिका लोकतंत्र की बुनियाद हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्थाओं की मर्यादा को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है.
उन्होंने कहा, "ये देश भीड़तंत्र से नहीं चलता है, देश लोकतंत्र से चलता है। ये देश जनादेश से चलता है, मर्यादा से चलता है और नियम-कानून से चलता है.
यादव ने कहा कि लोकतंत्र में हर राजनीतिक दल को अपनी बात रखने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। सरकार भी अपने पास उपलब्ध तथ्यों और संवैधानिक संस्थाओं के माध्यम से जवाब देने के लिए तैयार है. हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि किसी भी मुद्दे पर विरोध के नाम पर संस्थाओं की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए.
SIR पर बोले- 'यह कोई पहली बार होने वाली प्रक्रिया नहीं'
SIR को लेकर विपक्ष के विरोध पर भूपेंद्र यादव ने एक बार फिर कहा कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है. उन्होंने दावा किया कि देश में इससे पहले भी आठ बार SIR हो चुकी है और चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायित्व के तहत मतदाता सूची को दुरुस्त करने का काम कर रहा है.
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर किसी को संदेह है, तो वह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायत रख सकता है। यादव के मुताबिक, SIR को लेकर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए.
पुलिस की माफी पर राहुल गांधी और विपक्ष को घेरा
चर्चा के दौरान एंकर ने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। साथ ही बताया कि दिल्ली पुलिस के आयुक्त और केंद्रीय गृह सचिव ने अदालत में बिना शर्त माफी मांगी है.
इस पर भूपेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस के आचरण पर सवाल उठ रहे हैं, तो राजनीतिक नेताओं के व्यवहार की भी समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में सभी नेताओं का आचरण मर्यादित होना चाहिए.
यादव ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध के दौरान पुलिसकर्मियों, महिला पत्रकारों और अन्य लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए.
विपक्ष के एकजुट प्रदर्शन पर उठाया सवाल
जब एंकर ने सवाल किया कि क्या 10 अक्टूबर को भाजपा के विरोध प्रदर्शन से ज्यादा बड़ी चुनौती राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी और अन्य विपक्षी नेताओं की एकजुटता है, तो भूपेंद्र यादव ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतंत्र का अधिकार है.
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी सवाल से ऊपर नहीं है और विपक्ष को अपने मुद्दे उठाने की पूरी स्वतंत्रता है। लेकिन विरोध प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए.
यादव ने कहा, "हम सरकार चला रहे हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि हम सर्वोच्च हैं और हमसे कोई सवाल नहीं करेगा। आप सवाल पूछिए, हम अपने पास उपलब्ध तथ्यों और संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से जवाब देंगे.
बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर विपक्ष पर हमला
SIR को लेकर चर्चा के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का मुद्दा भी उठा. भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों से यह सवाल खड़ा होता है कि वे अवैध रूप से रह रहे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का विरोध क्यों कर रहे हैं.
उन्होंने वामपंथी प्रतिनिधि नेहा बोरा के कथित बयान का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर निशाना साधा। यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष का रुख उसके राजनीतिक इरादों को लेकर सवाल खड़े करता है.
हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए संबंधित व्यक्ति की पात्रता और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है. केवल किसी व्यक्ति के मूल स्थान या राष्ट्रीयता को लेकर लगाए गए आरोप अपने आप में किसी निष्कर्ष का आधार नहीं होते.
'इंडिपेंडेंट चुनाव आयोग और निष्पक्ष न्यायपालिका जरूरी'
भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की बुनियाद एक स्वतंत्र चुनाव आयोग और निष्पक्ष न्यायपालिका है. उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पहले भी चुनाव आयुक्तों के सेवानिवृत्त होने के बाद राजनीतिक पदों पर नियुक्ति और चुनाव लड़ने के उदाहरण रहे हैं.
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखना जरूरी है और राजनीतिक दलों को संस्थाओं पर सवाल उठाते समय अपनी भूमिका और आचरण पर भी विचार करना चाहिए.
यादव ने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान और अनुमति से संबंधित नियमों का पालन जरूरी है. उनके मुताबिक, किसी भी संस्थान में प्रवेश करने या किसी स्थान पर प्रदर्शन करने का निर्णय कानून-व्यवस्था और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुरूप होना चाहिए.
आकाशवाणी और दूरदर्शन में प्रदर्शन पर जताई आपत्ति
चर्चा के दौरान भूपेंद्र यादव ने आकाशवाणी और दूरदर्शन जैसे सार्वजनिक प्रसारण संस्थानों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान संवेदनशील होते हैं और उनकी सुरक्षा तथा कामकाज को ध्यान में रखना जरूरी है.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राजनीतिक प्रदर्शनकारी किसी संस्थान के भीतर जाकर विरोध करने लगें, तो भविष्य में दूसरे समूह भी ऐसा कर सकते हैं। यादव के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के लिए स्थान चुनते समय संस्थानों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का ध्यान रखा जाना चाहिए.
भूपेंद्र यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और असहमति की जगह है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नियमों और कानूनों की अनदेखी की जाए। उन्होंने विपक्ष से संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने और राजनीतिक विरोध को निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ाने की अपील की.
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