शुक्रवार 21 अगस्त सुबह करीब 5:30 बजे मेरी नींद खुली. रोज की तरह उठकर हाथ-मुंह धोया. करीब 6 बजे ई-पेपर पढ़ने बैठा ही था. तभी व्हाट्सएप पर रात का एक मैसेज दिखा. मैसेज में बताया गया था कि जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा गांव के राजकीय प्राथमिक स्कूल में सुबह 8 बजे धरना होना है.
धरना CJP की ओर से होना था. मुद्दा स्कूल की बदहाली था. खबर मिलते ही मैंने चाय के साथ रात की बची दो रोटियां खाईं. इसके बाद अपने साथी के साथ मौके के लिए निकल पड़ा.
करीब 8:15 बजे हम स्कूल के पास पहुंचे. वहां पहुंचते ही मुझे माहौल सामान्य नहीं लगा. कुछ ग्रामीण युवा एक व्यक्ति को घेरकर खड़े थे. पहले लगा कि किसी बात पर बहस हो रही है.
कुछ ही देर में मामला बढ़ने लगा. ग्रामीण उस व्यक्ति को धक्का देकर वहां से हटाने लगे. मैंने आसपास के लोगों से पूछा तो पता चला कि वह CJP से जुड़ा कार्यकर्ता है. वह CJP नेता आशुतोष रांका के पहुंचने से पहले दो साथियों के साथ स्कूल देखने आया था.
उसने बताया कि वह स्कूल की स्थिति देखने आया है. यह स्कूल भैंसों के बाड़े में चल रहा है. उसकी बात सुनते ही कुछ ग्रामीण युवाओं का गुस्सा बढ़ गया. वहां CJP के खिलाफ नारे लगने लगे.
कुछ लोग बीच-बचाव कर रहे थे. वे CJP कार्यकर्ताओं से वापस जाने को कह रहे थे. लेकिन बात नहीं बनी. ग्रामीणों ने उन्हें वहां से जाने के लिए मजबूर कर दिया.
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रांका के ट्वीट के बाद फिर जुटी CJP की टीम
कुछ ही देर में भीड़ बढ़ गई. ग्रामीण युवा भी उसी जर्जर स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए. हालांकि यह धरना ज्यादा देर नहीं चला. करीब 15 मिनट बाद दरी-पट्टी हटा दी गई.
लेकिन ग्रामीण वहां से गए नहीं. कई युवा गांव में घूमते नजर आए. मुझे ऐसा लग रहा था कि उन्हें CJP की टीम के दोबारा आने की आशंका है. कुछ लोग गांव की सीमा के आसपास भी नजर रख रहे थे.
इसी बीच CJP नेता आशुतोष रांका को अपने कार्यकर्ताओं को वहां से हटाए जाने की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने ट्वीट किया. फिर वह अपनी टीम के साथ रामपुरा-कंवरपुरा के लिए रवाना हो गए.
करीब 5-6 गाड़ियों में लगभग 20 युवक और दो महिला कार्यकर्ता उनके साथ थे. गांव की सीमा के पास एक बड़े अपार्टमेंट के नजदीक गाड़ियां रोक दी गईं. वहां से स्कूल करीब 300 मीटर दूर था.
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रांका और उनकी टीम इसके बाद पैदल स्कूल की ओर बढ़ी. लेकिन गांव के युवा पहले से ही तैयार नजर आए. उन्हें देखकर साफ लग रहा था कि ग्रामीण CJP की टीम को स्कूल तक पहुंचने देना नहीं चाहते.
करीब 10 बजे तक दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए. एक तरफ रांका और उनके साथी थे. दूसरी तरफ ग्रामीण युवा खड़े थे. ग्रामीणों ने गांव के रास्तों पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां और दूसरे वाहन खड़े कर दिए थे. रास्ते रोक दिए गए थे. इससे गांव के अंदर जाना आसान नहीं था.
नोकझोंक से शुरू हुआ मामला, फिर जमकर हुई हाथापाई
दोनों पक्षों का आमना-सामना होते ही बहस शुरू हो गई. CJP की दोनों महिला कार्यकर्ता सबसे आगे थीं. पहले तीखी नोकझोंक हुई. कुछ ही देर में धक्का-मुक्की शुरू हो गई. महिला कार्यकर्ताओं को किनारे किया गया. इसके बाद आशुतोष रांका के साथ धक्का-मुक्की होने लगी.
रांका को बचाने के लिए उनके साथी चारों तरफ खड़े हो गए. इसी दौरान मैंने एक ग्रामीण युवक को हाथ में पत्थर लेकर CJP कार्यकर्ताओं की तरफ जाते देखा. इसके बाद वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. लोग इधर-उधर भागने लगे. कुछ CJP कार्यकर्ता नीचे गिर गए. धक्का-मुक्की और मारपीट बढ़ गई.
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मैंने कुछ लोगों को पत्थर फेंकते देखा. CJP की गाड़ियों के शीशे भी टूटे. एक CJP कार्यकर्ता सलमान झाड़ियों के पास गिर गया. वहां उसके साथ मारपीट होती दिखी. मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों ने बीच-बचाव किया. इसके बाद उसे वहां से निकाला गया.
CJP की दोनों महिला कार्यकर्ताओं ने बाद में बताया कि उनके साथ मारपीट नहीं हुई. उनका आरोप था कि उनके ऊपर रेत उछाली गई.
पुलिस आई, लेकिन टकराव के समय नहीं थी
पूरे घटनाक्रम में मुझे पुलिस की मौजूदगी काफी कम नजर आई. घटना से कुछ समय पहले पुलिस की एक गाड़ी वहां आई थी. लेकिन बाद में वह भी चली गई.
जब दोनों पक्ष आमने-सामने आए और टकराव शुरू हुआ, उस समय मौके पर पुलिस नहीं थी. घटना के करीब आधे घंटे बाद पुलिस पहुंची. तब तक काफी कुछ हो चुका था. पुलिस कुछ देर मौके पर रुकी. इसके बाद वापस चली गई.
बाद में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी स्कूल पहुंचे. उन्होंने भैंसों के बाड़े में चल रहे स्कूल को देखा. अधिकारियों ने ग्रामीणों की बात सुनी. उन्होंने कहा कि वे भी गांव के रहने वाले हैं और स्कूल की स्थिति समझ सकते हैं. कुछ देर गर्मी में रहने के बाद अधिकारी भी अपनी एसी गाड़ी में बैठकर वहां से निकल गए.
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शिकायत देने थाने पहुंचे ग्रामीण
धीरे-धीरे मौके पर भीड़ कम होने लगी. इसके बाद कुछ ग्रामीण CJP कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत देने के लिए गाड़ियों में बैठकर शिवदासपुरा थाने की ओर निकल गए. मैं भी उनके पीछे थाने पहुंचा. वहां मामला आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद मैं वापस लौट आया.
सुबह करीब 8:15 बजे शुरू हुआ घटनाक्रम कुछ ही घंटों में पूरी तरह बदल गया. पहले नारे लगे. फिर रास्ते बंद हुए. इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आए. बात धक्का-मुक्की तक पहुंची. फिर पथराव हुआ और गाड़ियों के शीशे टूटे.
एक तरफ CJP स्कूल की बदहाली का मुद्दा उठा रही थी. दूसरी तरफ ग्रामीण बाहरी लोगों के स्कूल में आने से नाराज थे. कुछ घंटों में शिक्षा व्यवस्था का सवाल पीछे छूट गया. गांव का माहौल तनाव में बदल गया.
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मेरी नजर में रामपुरा-कंवरपुरा में शुक्रवार को जो हुआ, वह सिर्फ एक स्कूल के निरीक्षण या धरने की कहानी नहीं थी. यह एक ऐसा घटनाक्रम था, जिसमें कुछ ही घंटों में विरोध नारेबाजी से टकराव तक पहुंच गया. इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए.
विशाल शर्मा