महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर संशोधन विधेयक लाया जाना पक्का हो चुका है. संशोधन विधेयक के लिए संसद का बजट सत्र 13 दिन के ब्रेक के बाद 16 अप्रैल से फिर शुरू होगा. यह सत्र तीन दिन तक चलेगा, और स्पीकर के मुताबिक, सत्र के दौरान प्रश्नकाल या शून्यकाल जैसी चीजें नहीं होंगी, केवल सरकारी काम होंगे.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कोशिश है कि महिला आरक्षण कानून 2029 के आम चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू किया जा सके. मौजूदा कानून में संशोधन के लिए दो बिल लाए जाने की चर्चा है - एक बिल, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए होगा, और दूसरा परिसीमन कानून में बदलाव से जुड़ा हो सकता है.
देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने, और चुनावी फायदे के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है. कांग्रेस ने इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया है.
स्पेशल सेशन या सत्र का एक्सटेंशन
केंद्र सरकार ने 2023 में संसद के विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण कानून पास कराया था, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा जाता है. 16 अप्रैल से शुरू होने जा रहे सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए दो विधेयक लाए जाने वाले हैं.
संसदीय कैलेंडर के हिसाब से 2 अप्रैल को संसद को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाना था. बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 13 फरवरी तक, और दूसरा फेज 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक तय था - लेकिन अब एक्सटेंशन दे दिया गया है.
लोकसभा से CAPF बिल पास होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने बताया, संसदीय कार्य मंत्री की तरफ से मुझे एक अनुरोध प्राप्त हुआ है. उसके अनुसार सरकारी काम के लिए हम 16 अप्रैल को फिर बैठेंगे. उस दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और प्राइवेट मेंबर्स का समय नहीं होगा. सिर्फ सरकारी कार्य होगा.
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए चुनाव काल में राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश का आरोप लगाया है. कांग्रेस का कहना है कि ये काम 29 अप्रैल के बाद होना चाहिए, जब राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग हो जाए. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ये मुद्दा राज्यसभा में भी उठाया था.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजिजू ने 16 मार्च को मल्लिकार्जुन खड़गे जी को पत्र लिखकर कहा था कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर बातचीत करना चाहती है. जयराम रमेश के अनुसार, खड़गे जी ने उसी दिन जवाब देते हुए कहा, मुझे आपका पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन कृपया सर्वदलीय बैठक बुलाएं. सभी विपक्षी दलों को एक साथ बुलाएं. हम इस पर चर्चा करेंगे. कृपया अपना प्रस्ताव लिखित में प्रस्तुत करें. 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों ने इस पत्र से सहमति जताई. राहुल गांधी और सभी नेताओं ने किरेन रिजिजू को जवाब में लिखा कि आप संविधान में संशोधन करना चाहते हैं, कृपया सर्वदलीय बैठक बुलाएं. 24 मार्च को सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से कहा कि 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए.
1. जयराम रमेश का कहना है, 24 मार्च को सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से अनुरोध किया कि सर्वदलीय बैठक 29 अप्रैल के बाद आयोजित की जाए, क्योंकि चुनाव आयोग की आचार संहिता उस तारीख तक लागू रहेगी। उन्होंने बताया कि सभी दल वर्तमान में चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं।
2. 26 मार्च को किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर कांग्रेस पार्टी से बातचीत के लिए मिलने की अपनी मांग दोहराई, ताकि प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर आगे बढ़ा जा सके। आधे घंटे के भीतर ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने किरेन रिजिजू को जवाब भेजकर अपने पहले के रुख को दोहराया-सभी दलों को आमंत्रित करें.
3. सरकार ने पहले ही अपना मन बना लिया था. उनका प्राथमिक उद्देश्य 2, 3 या 4 अप्रैल को विशेष सत्र बुलाना था. चूंकि पत्रों का यह आदान-प्रदान 8 से 9 दिनों तक चला, लिहाजा सरकार ने एकतरफा निर्णय लिया कि एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा. 16, 17 और 18 तारीख को सत्र आयोजित किया जाए, ठीक उसी समय जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव होने हैं और यह सत्र चुनाव प्रचार अवधि के दौरान आयोजित किया जाएगा, जबकि आदर्श आचार संहिता लागू है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि आम चुनाव 2029 में होने हैं, और सरकार महिलाओं को लोकसभा और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है. किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की गुजारिश करते हुए कहा है कि इस मुद्दे पर राजनीति न हो, क्योंकि यह राजनीति का विषय नहीं है.
विधानसभा चुनाव और महिला कानून में संशोधन
कांग्रेस ने आने वाले संसद सत्र को चुनावी सत्र बताया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश कहते हैं, यह चुनावी सत्र है जिसमें प्रधानमंत्री श्रेय लेंगे कि मैं महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करूंगा.
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग 9 अप्रैल से शुरू हो रही है. तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को, जबकि पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को होने जा रहा है.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने महिला आरक्षण कानून में संशोधन के लिए बुलाए गए संसद सत्र को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया है.
चुनाव में जो महिला वोटर है खासकर पश्चिम बंगाल की, मोदी सरकार उनके हित में कुछ बड़ा करने जा रही है. जहां बीजेपी का मुकाबला एक महिला प्रतिद्वंद्वी यानी ममता बनर्जी से है. जबकि विरोधी कह रहे हैं कि ऐन चुनाव के बीच इस सत्र का मतलब है कि चुनाव प्रचार छोड़ सांसद दिल्ली पहुंचे, जो संभव नहीं है.
कांग्रेस को दिक्कत क्या है
कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के साथ परिसीमन का भी एकतरफा फैसला किया, और इसके बारे में विपक्ष के साथ कोई बातचीत नहीं की.
जयराम रमेश का कहना है, 2023 में विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति अधिनियम पारित कराया गया था, और कहा गया था कि जनगणना और परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू होगा. उस वक्त खड़गे जी ने महिला आरक्षण को तत्काल लागू किए जाने की मांग की थी. कहते हैं, 30 महीने तक सरकार सोती रही, और अब कह रही है कि नई जनगणना से पहले इसे लागू किया जाएगा क्योंकि जनगणना में तीन-चार साल लगेंगे.
कांग्रेस नेता का कहना है, यह जानकारी भी मिली है कि विशेष सत्र सिर्फ महिला आरक्षण अधिनियम को लेकर नहीं, बल्कि परिसीमन को लेकर भी है, जबकि परिसीमन के बारे में पहले कोई बात नहीं की गई थी.
जयराम रमेश के अनुसार, सरकार की ओर से जो परिसीमन की बात की जा रही है वह खतरनाक है. उनका कहना है, यह जानकारी भी मिली है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समानुपातिक वृद्धि की जाएगी, और अगर ऐसा होता है तो दक्षिण, पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत के छोटे राज्यों को नुकसान होगा.
सरकार के प्रस्ताव में क्या है
लंबे अर्से तक किसी न किसी कारण से टलता चला आ रहा महिला आरक्षण विधेयक, 2023 आखिरकार संसद के विशेष सत्र में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पास हुआ था. अब उसे लागू करने के लिए संशोधन विधेयक लाने की तैयारी है.
1. रिपोर्ट के अनुसार, संशोधन विधेयक पास होने के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 हो सकती है.
2. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा कानून में संशोधन के लिए दो बिल लाए जा सकते हैं - एक, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के लिए, और दूसरा - परिसीमन कानून में बदलाव को लेकर.
3. महिला आरक्षण में एससी/एसटी की महिलाओं के लिए कोटे का प्रावधान तो है, लेकिन ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण देने वाली डिमांड पर तस्वीर साफ नहीं है.
मृगांक शेखर