सयानी घोष बरुईपुर रेप पीड़िता के परिवार से मिलने गई थीं. आस पास के लोगों ने घेर लिया, और उनको देखकर 'गद्दार-बेईमान' चिल्लाने लगे. हालात बिगड़ते और बेकाबू होते देख सयानी घोष को वहां से तुरंत ही निकलना पड़ा - लोग यहां तक पूछने लगे थे, 'बिकने के लिए कितने पैसे लिए?'
पश्चिम बंगाल का बरुईपुर सयानी घोष के संसदीय क्षेत्र जादवपुर में ही पड़ता है. 4 जुलाई को बरुईपुर में 12 साल की एक बच्ची गायब हो गई थी. अगले ही दिन उसका शव सूर्यपुर हाट इलाके में एक बोरी में भरा हुआ मिला. बाद में सामने आए CCTV फुटेज में बच्ची को (गायब होने से कुछ देर पहले) आरोपी के साथ देखा गया. एक आरोपी इंद्रजीत तंती को भीड़ ने पहले ही पीट पीट कर मार डाला था.
अपडेट है कि बरुईपुर रेप केस के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को बुधवार (8 जुलाई) तड़के पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया. बंगाल पुलिस का दावा है कि आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएशन के लिए घटनास्थल पर ले जाया गया था, तभी आरोपी ने अचानक एक पुलिसवाले का हथियार छीनकर गोली चला दी, और मौके से भागने की कोशिश की. पुलिस के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई में आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गया, और बरूईपुर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सयानी घोष से नाराजगी क्यों?
सयानी घोष वैसे ही लिबास में अपने संसदीय क्षेत्र जादवपुर के बरुईपुर पहुंची थीं, जैसे चुनाव कैंपेन के दौरान उनको देखा जाता रहा. नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी में, जिसकी ममता बनर्जी की सिग्नेचर स्टाइल से तुलना की जाती थी. बरुईपुर दौरे से पहले सयानी घोष ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने बच्ची के साथ रेप और हत्या का मामला उठाया था. आश्वासन भी लिया था. और, सोशल मीडिया पर उसके बारे में विस्तार से बताया भी था.
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सयानी घोष को ऐसे लोगों से घिरे देखा जा सकता है, जो चिल्लाते हुए पूर्व टीएमसी नेता को 'गद्दार' और 'बेईमान' और दलबदलू बोल रहे हैं. भीड़ में से कोई पूछ रहा है, 'तुम कितने में बिकी?', तो कोई पूछ रहा है, 'कोतो टका बिक्री होले...' यानी 'बिकने के लिए कितने रुपये लिए?'
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद टीएमसी के जो 20 सांसद ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एक गुमनाम पार्टी NCPI में शामिल हो गए थे, जादवपुर की सांसद सयानी घोष भी उनमें शामिल हैं. बरुईपुर में लोगों के गुस्से को देखते हुए सयानी घोष के सुरक्षाकर्मियों को दखल देना पड़ा, और वहां से सुरक्षित लेकर चले गए.
बरुईपुर की घटना के ठीक बाद सयानी घोष ने सोशल साइट X पर लिखा था, मैं बरुईपुर, सुरजापुर, दक्षिण 24 परगना में नाबालिग लड़की को निशाना बनाकर हुए जघन्य घटना की कड़ी निंदा करती हूं. मैं पीड़िता और उसके परिवार के साथ होकर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करती हूं. मैंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से बात की है, और उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे खुद पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं. गिरफ्तारियां हो रही हैं, SIT बना दी गई है, वे परिवार से संपर्क में हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. न्याय जल्दी मिले यह सुनिश्चित किया जाएगा. मैं त्वरित और आवश्यक कार्रवाई के लिए उनका आभार व्यक्त करती हूं
सयानी घोष ने कहा, बरुईपुर का प्रतिनिधित्व करने वाली सांसद के रूप में, मैं इन सभी मुद्दों को विशेष रूप से मुख्यमंत्री को लिखित रूप में दूंगी. साथ ही, यह याद रखना जरूरी है कि सभ्य समाज में भीड़तंत्र या मानसिक उन्माद की कोई जगह नहीं है. कानून का राज स्थापित होना चाहिए. अपने हाथों में कानून लेना पूरी तरह अस्वीकार्य है और उसके लिए कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. मैं एसपी बरुईपुर के साथ लगातार संपर्क में हूं और न्याय सुनिश्चित होने तक हर संभव प्रयास करती रहूंगी.
तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर सयानी घोष 2024 के आम चुनाव में जादवपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को 2,58,201 वोटों के अंतर से हराया था. अब सयानी घोष NCPI की सांसद हो गई हैं, जो लोकसभा में सत्ताधारी एनडीए सरकार का सपोर्ट करती है.
सवाल है कि सयानी घोष तो पश्चिम बंगाल चुनाव कैंपेन में खासी लोकप्रिय थीं, लेकिन अब उनके इलाके के लोग ही विरोधी क्यों बन गए? चुनाव बाद सयानी घोष की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने पाला बदलने के अपने फैसले को जनादेश का सम्मान बताकर खुद को सही ठहराया था. अब अगर सयानी घोष ने भी जनादेश का सम्मान किया है, तो अपने ही इलाके में ऐसे विरोध क्यों झेलना पड़ रहा है?
भले ही बरुईपुर के लोगों ने सयानी घोष पर महुआ मोइत्रा और अभिषेक बनर्जी की तरह अंडे नहीं फेंके, लेकिन विरोध का स्तर और तरीका तो मिलता जुलता ही है.
जब महुआ और अभिषेक शिकार हुए
1 जुलाई को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के ट्रांजिट दफ्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अंडों की बौछार की थी. महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि अंडे फेंके जाने की घटना के पीछे पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी बीजेपी का हाथ है, और पुलिस ने लोगों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की. अपनी प्रतिक्रिया में बीजेपी ने इस घटना को टीएमसी के प्रति आम लोगों का गुस्सा बताया था.
महुआ मोइत्रा ने सोशल साइट एक्स पर पश्चिम बंगाल के डीजीपी को टैग करते हुए लिखा, मुझ पर बीजेपी के गुंडों के नेतृत्व में हमला हुआ. महुआ मोइत्रा ने घटना का वीडियो भी शेयर किया. एक वीडियो पोस्ट में बीजेपी को निशाना बनाते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा, बीजेपी समर्थक एक घंटे से ज्यादा वक्त से लगातार ऑफिस की खिड़की को निशाना बनाकर अंडे और सब्जियां फेंक रहे हैं... मैंने डीजीपी से भी बात की है. पुलिस काफी देर के बाद मौके पर पहुंची, लेकिन हमला करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की, सिर्फ तमाशा देखती रही.
ऐसे ही तृणमूल कांग्रेस सांसद और महासचिव अभिषेक बनर्जी पर बंगाल के सोनारपुर में 30 मई, 2026 को लोगों ने अंडों से हमला किया था. और वैसे ही, 15 जून को ममता बनर्जी के कालीघाट आवास के बाहर टीएमसी नेता कुणाल घोष पर अंडों से हमला किया गया था. रिपोर्ट के अनुसार, 4 मई को पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजे आने के बाद से सौमित्र बनर्जी, मदन मित्रा, बापादित्य दासगुप्ता, देबाशीष साहा, सुजय हाजरा और सपन सामंता जैसे टीएमसी नेता भी अंडा अटैक के शिकार हो चुके हैं.
ये कौन लोग हैं, कहां से आ रहे हैं?
अंडा फेंकने की घटनाओं का मामला कलकत्ता हाई कोर्ट तक पहुंच चुकी हैं. मामले से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट कलकत्ता बंगाल पुलिस से अंडा फेंकने की सभी घटनाओं पर रिपोर्ट भी मांगी थीं. और, घटनाओं पर सवाल उठाते हुए सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए हैं? सुनवाई कर रही हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
पश्चिम बंगाल के बरूईपुर में रेप और हत्या के मामले में पानीहाटी से बीजेपी विधायक रत्ना देबनाथ ने सूबे के मौजूदा हालात और पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया है. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां रत्ना देबनाथ कहती हैं, तृणमूल सरकार और इससे पहले जो भी सरकारें रहीं... वे स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान देने के बजाय युवाओं के बीच जुए और शराब को बढ़ावा दे रही थीं. उसी का नतीजा है कि आज समाज में ये सब हो रहा है.'
महुआ मोइत्रा और अभिषेक बनर्जी का विरोध होना, और सयानी घोष के खिलाफ प्रोटेस्ट और उनको 'गद्दार' कहा जाना अलग अलग बातें हैं. महुआ मोइत्रा और टीएमसी नेताओं की तरफ से सयानी घोष जैसे नेताओं को 'गद्दार' कहा जा रहा है, और बरुईपुर में भी सयानी घोष को वैसा ही सुनना पड़ा है. बल्कि, और भी ज्यादा सुनना पड़ा है.
सवाल यह है कि अगर पश्चिम बंगाल के लोग महुआ मोइत्रा और अभिषेक बनर्जी सहित कुछ टीएमसी नेताओं पर गुस्सा निकाल रहे हैं, लेकिन सयानी घोष लोगों के गुस्से का शिकार क्यों हो रही हैं?
महुआ मोइत्रा का आरोप है कि बीजेपी के लोग टीएमसी नेताओं को टार्गेट कर रहे हैं, बीजेपी कह रही है कि तृणमूल कांग्रेस नेता आम लोगों के गुस्से का शिकार हो रहे हैं - ऐसे में सवाल उठता है कि सयानी घोष का विरोध करने वाले कौन लोग हैं?
क्या सयानी घोष का विरोध करने वाले भी आम लोग ही हैं? लेकिन सवाल यह भी है कि जब सयानी घोष बीजेपी के साथ खड़ी हैं, तो आम लोग उनका विरोध क्यों कर रहे हैं? क्या सयानी घोष का विरोध करने वाले भी बीजेपी के लोग हो सकते हैं? महुआ मोइत्रा और बाकी टीएमसी नेता हमलावरों को बीजेपी कार्यकर्ता बता रहे हैं, अगर वे बीजेपी कार्यकर्ता हैं तो सयानी घोष पर हमला क्यों कर रहे हैं?
मृगांक शेखर