क्या पंजाब में कांग्रेस केरल जैसा मौका देख रही है? पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार की हालत भी केरल की एलडीएफ सरकार जैसी ही हो गई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद विवादों में हैं. बीजेपी के प्रयास पहले के मुकाबले बेहतर जरूर लगते हैं. कुछ सक्रिय होने के कारण, और कुछ राघव चड्ढा के साथ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसदों के बीजेपी के हो जाने के कारण भी.
कांग्रेस के लिए मौका तो है, लेकिन उसमें लोचा भी है. हाल तक तो ऐसा ही लग रहा था, जैसे पंजाब कांग्रेस में पांच साल बाद भी कुछ बदला नहीं है. नेता बदल गए हैं, हालात नहीं. 2022 में जो अंदरूनी गुटबाजी थी, 2026 में भी झगड़ा सुलझाने के लिए आलाकमान को तीन लोगों की वैसी ही कमेटी बनानी पड़ी. अजय माकन, मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव की कमेटी ने सबकी सुनी, और कांग्रेस आलाकमान को रिपोर्ट दी, जिसके बाद बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हुई है.
चुनाव की नजदीक आ रही तारीख को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने किसी पहले की तरह एक को खुश करने के चक्कर में बाकियों को नाखुश नहीं किया है. खत्म करने की जगह झगड़ा शांत करने का रास्ता अपनाया है. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बतौर प्रधान (प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष) बरकरार रखा गया है. प्रताप सिंह बाजवा भी विधानसभा में विपक्ष के नेता बने रहेंगे - और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को भी चुनाव के हिसाब से महत्वपूर्ण पद दिया गया है.
लेकिन, चरणजीत सिंह चन्नी तो अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह पंजाब कांग्रेस का प्रधान बनना चाहते थे. चुनाव तो पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा.
पंजाब कांग्रेस में समस्या समाधान
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल के हस्ताक्षर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष ने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए महत्वपूर्ण समितियों के गठन को मंजूरी दे दी है. ये समितियां चुनावी रणनीति को मजबूत करने, संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित करने और चुनाव प्रचार को प्रभावी बनाने के मकसद से बनाई गई हैं.
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को विधानसभा चुनाव के लिए बनाई गई कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है . चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति का अध्यक्ष विजय इंदर सिंघला को बनाया गया है. सुखदेव सिंह रंधावा कोर कमेटी के अध्यक्ष बनाए गए हैं. और, डॉक्टर अमर सिंह को चुनाव घोषणा पत्र समिति की कमान दी गई है.
पंजाब कांग्रेस में झगड़ा सुलझाने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, सबसे महत्वपूर्ण है चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति (कैंपेन कमेटी) का अध्यक्ष बनाया जाना. पंजाब कांग्रेस के प्रमुख दलित चेहरों में से एक चरणजीत सिंह चन्नी को अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह अध्यक्ष पद का दावेदार माना जा रहा था.
2021 में कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को कुर्सी पर बिठाया गया था. तब नवजोत सिंह सिद्धू मुहिम चला रहे थे. सिद्धू पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष तो बना दिए गए, लेकिन मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर उनकी दावेदारी खारिज हो गई. चुनाव हुआ, कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के हाथों सत्ता भी गंवा दी, लेकिन अंदरूनी गुटबाजी खत्म नहीं हो पाई - अब उसी गुटबाजी को खत्म करने के लिए इतने पापड़ बेले गए हैं.
चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पर लगातार हमलावर थे. नगर निगम चुनाव में राजा वड़िंग के इलाके गिद्दड़बाहा में कांग्रेस की हार और आम आदमी पार्टी की जीत का मुद्दा जोर शोर से उछाला गया था. और, उसके बाद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा था.
लगता है लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नए सिरे से जोखिम नहीं उठाना चाहते थे. किसी एक को खुश करने के चक्कर में कइयों को 2022 के चुनावों की तरह नाराज नहीं करना चाहते थे. शायद, इसीलिए बीच का रास्ता निकाला गया. अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का ओहदा तो कायम रखा गया है, लेकिन चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर मनमानी करने की छूट खत्म कर दी गई है.
राहत भरी सांस लेते हुए पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दिल खोलकर नेतृत्व के प्रति आभार जताया है, मैं आलाकमान को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की अहम लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की व्यापक टीम बनाने पर विनम्रतापूर्वक बधाई देता हूं, और उनका धन्यवाद करता हूं. हम सभी की यह जिम्मेदारी है कि पंजाब के लोगों को आम आदमी पार्टी की उस असंवेदनशील, तानाशाह, निरंकुश और भ्रष्ट सरकार से मुक्ति दिलाएं, जो पिछले साढ़े चार साल से पंजाब को चला रही है.
बीच का रास्ता निकालकर आलाकमान ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और प्रताप सिंह बाजवा और उनके समर्थकों के नाराज होने से बचाव का तरीका अपनाया है. और, लगे हाथ चरणजीत सिंह चन्नी, सुखदेव सिंह रंधावा जैसे नेताओं को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के चुनाव अभियान से जोड़े रखने की भी कोशिश की है.
क्या पंजाब का झगड़ा खत्म हो गया
लेकिन क्या पंजाब का झगड़ा खत्म हो गया है? कुछ झगड़े खत्म नहीं होते, लेकिन मामला कुछ हद तक शांत हो जाता है. पंजाब कांग्रेस का मामला भी ऐसा ही लगता है, और जो भी उपाय किए गए हैं, पहले के मुकाबले तो बढ़िया ही माने जाएंगे.
2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महज 18 सीटें मिली थीं. बाद के उपचुनावों में भी कांग्रेस को हार ही झेलनी पड़ी थी. 2025 का लुधियाना पश्चिम उपचुनाव भी कांग्रेस की हार की फेहरिस्त में शामिल है. 2026 के नगर निकाय चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, विशेष रूप से पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के अपने इलाके गिद्दड़बाहा में.
ये सब होने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने आंख मूंद कर चरणजीत सिंह चन्नी की बात मानने के बजाय राजा वड़िंग को और मौका देने का फैसला किया है. राजा वड़िंग को हटाना काफी जोखिमभरा हो सकता था, कम फायदा दिलाने वाला भी नाराज होकर ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है.
चरणजीत सिंह चन्नी को मुंहमांगी मुराद तो नहीं मिली, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने वाले नेता को मुख्यमंत्री पद का भी मजबूत दावेदार माना जाता है. कांग्रेस ने अपने दलित चेहरे को आगे करके संदेश दे दिया है. देखना है आगे क्या रास्ता अख्तियार किया जाता है. कांग्रेस के मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया जाता है या नहीं?
मृगांक शेखर