प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब फ्लाय दुबई हादसे के हीरो पायलट कैप्टन स्मित मछार से बात कर रहे थे तो उनकी आवाज में सिर्फ एक पायलट की तारीफ ही नहीं थी, बल्कि पूरे देश की छवि की बात कर रहे थे. शुक्रवार को पीएम मोदी ने दुबई के अस्पताल में भर्ती कैप्टन स्मित से वीडियो कॉल पर बात की. उन्होंने कहा कि अगर तुम इतनी बहादुरी न दिखाते और विमान हादसे का शिकार हो जाता तो पायलट कम्युनिटी और भारत के बारे में न जाने क्या क्या बातें होतीं. आपने बता दिया कि भारत जीवन बचाने वाला देश है, जान लेने वाला नहीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह बात मौजूदा दौर में गहरे मायने रखती है. खासकर उस समय जब सोशल मीडिया पर इस हादसे को लेकर तरह तरह की अफवाहें और कांस्पिरेसी थ्योरी वायरल हो रही हैं. कुछ लोग इजरायल को दोषी ठहरा रहे हैं. कह रहे हैं कि यह मोसाद और यहूदियों का फॉल्स-फ्लैग ऑपरेशन था. जिन्हें भारत-इजरायल की मित्रता खटकती है, उन्हें इस हादसे में भारत को घसीटने का एक मौका मिल जाता.
फ्लायदुबई की उड़ान में हुई वारदात बहुत सीधी सी थी. फ्लाइट दुबई से तेल अवीव जा रही थी. रास्ते में ओमानी को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला कर दिया. चाकू से घायल किया और विमान को गिराने की कोशिश की. कैप्टन स्मित खुद खून बह रहा था फिर भी कॉकपिट का दरवाजा खोला. इमरजेंसी वार्निंग भेजी. यात्री और क्रू ने हमलावर को काबू कर लिया. विमान सऊदी अरब मे सुरक्षित उतर गया. करीब 180 लोगों की जान बच गई. लेकिन, कई लोगों को इससे सुकून नहीं मिला. फ्लाइट लैंड होने के साथ सोशल मीडिया पर कांस्पिरेसी थ्योरी ने उड़ा भर ली.
कुछ लोग घटना की सच्चाई को नजरअंदाज करके अपनी थ्योरी चला रहे हैं. वे कह रहे हैं कि यह सब इजरायल ने खुद रचा था. इस हादसे को लेकर इजरायल के प्रति सहानुभूति जताने वाले भारतीय भी निशाने पर हैं. यह नजरअंदाज करते हुए कि भारतीय पायलट की मौजूदगी से एक बड़ी साजिश टल गई. अगर विमान सचमुच गिर जाता तो ये वही लोग भारत पर उंगली उठाते. कहते कि भारतीय पायलट ने कुछ गड़बड़ की. पायलट समुदाय पर सवाल खड़े होते. भारत की छवि खराब होती. प्रधानमंत्री मोदी की बात इसीलिए महत्वपूर्ण है. उन्होंने साफ कह दिया कि भारत जान लेने वाला देश नही है. यहां के लोग दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं.
कैप्टन स्मित ने ठीक यही किया. घायल होने के बावजूद उन्होंने विमान को बचाने की पूरी कोशिश की. अगर वे हमलों से बेपरवाह होकर बैठ जाते या कॉकपिट का दरवाजा न खोलते तो क्या होता? विमान गिर जाता. सैकड़ों लोग मर जाते. और उसके बाद पूरे विश्व मे पायलटों पर शक की नजर से देखा जाता. हवाई यात्रा करने वाले यात्री हमेशा डरते कि कॉकपिट मे बैठा पायलट पता नही क्या सोच रहा है. क्या उसके दिमाग मे कोई गलत इरादा तो नही. यह खौफ वर्षों तक बना रहता. लोग उड़ान भरने से घबराते.
लेकिन कैप्टन स्मित के कारण अब हवाई यात्री कम से कम इतनी राहत और उम्मीद तो महसूस कर सकते हैं कि उनके विमान में कोई न कोई कैप्टन स्मित जरूर होगा. कोई ऐसा पायलट जो मुश्किल घड़ी मे अपनी जान जोखिम मे डालकर सबकी रक्षा करे. यह भरोसा बहुत बड़ी चीज है.
सोशल मीडिया पर भारत को कठघरे मे खड़ा करने वाली बातें इसलिए भी चलाई जा रही हैं क्योंकि कुछ लोग हर सकारात्मक खबर को नकारना चाहते हैं. वे नही चाहते कि दुनिया भारत के बारे मे अच्छी बात सुने. कैप्टन स्मित की बहादुरी पूरी दुनिया ने सराही. इजरायल के प्रधानमंत्री ने भी कहा कि एक भारतीय ने दूसरी 9/11 जैसी घटना रोक दी. अमेरिका सहित कई देशो ने तारीफ की. लेकिन कुछ कोने में बैठे लोग फिर भी अपनी थ्योरी चला रहे हैं. वे इजरायल को दोष देते हैं या भारत को. उनके नैरेटिव में ओमानी को-पायलट कहीं नहीं है. जबकि, जांच चल रही है. सबकुछ सामने है.
आज के समय में जब हर घटना को सोशल मीडिया पर तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है तो ऐसी बहादुरी और भी मायने रखती है. लोग आसानी से भूल जाते हैं कि असल में क्या हुआ. वे अपनी पसंद की कहानी गढ़ लेते हैं. कुछ भारत विरोधी तत्व हमेशा मौका ढूंढते रहते हैं कि किसी भी घटना में भारत को घसीटें. इस बार भी वही कोशिश हुई. लेकिन कैप्टन स्मित की हिम्मत और प्रधानमंत्री की साफ बात ने इन कोशिशों को जवाब दे दिया.
धीरेंद्र राय