राहुल गांधी के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव हर तरीके से जोश बढ़ाने वाला रहा. और, उत्तर प्रदेश में तो वैसा सपोर्ट मिला था जिसकी शिद्दत से दरकार थी. सबसे महत्वपूर्ण थी, अमेठी की जीत. बीजेपी की स्मृति ईरानी को हराकर कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने राहुल गांधी को सबसे बड़ा तोहफा दिया था.
बीजेपी की अयोध्या में हार तो ज्यादा ही खुशी देने वाली थी. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का चुनावी गठबंधन था, और फैजाबाद लोकसभा सीट अवधेश प्रसाद ने अखिलेश यादव को गिफ्ट कर दिया. कांग्रेस को मिली 99 सीटों का असर यह हुआ कि राहुल ने खुद लोकसभा में विपक्ष का नेता बनने का फैसला किया - बतौर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोल रहे थे, तभी सत्ता पक्ष की तरफ से टोका-टोकी होने लगी.
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा चल रही थी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सदन में मौजूद थे. अपनी तरफ से सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा कर डाला कि अगले चुनाव में गुजरात में भी बीजेपी को हरा देंगे. भरी लोकसभा में बीजेपी और मोदी को चैलेंज करते हुए राहुल गांधी बोले, मोदी जी... आप लिखकर ले लीजिए, इस बार इंडिया गठबंधन आपको गुजरात में हराने जा रहा है.
INDIA ब्लॉक की बैठक में यूपी चुनाव का जिक्र
अगले साल 2027 में गुजरात में विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, लेकिन उससे पहले उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव होंगे. उसी उत्तर प्रदेश में जहां पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन ने 43 सीटें जीत ली थीं, और एनडीए को 36 पर समेट दिया था. समाजवादी पार्टी ने अकेले ही 37 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस को अमेठी और रायबरेली सहित 6 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. स्वाभाविक है जोश बढ़ाने के लिए ये सब काफी था.
यूपी की ही तरह विपक्षी गठबंधन को महाराष्ट्र में भी कामयाबी मिली थी, जिसमें कांग्रेस ने सबसे ज्यादा सीटें जीती थी. लेकिन उसके बाद हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में, झारखंड को छोड़कर गठबंधन को हर जगह हार का मुंह देखना पड़ा. दिल्ली में तो इंडिया ब्लॉक फ्रेंडली मैच ही खेल रहा था. मैदान में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस आमने सामने थे, ममता बनर्जी और अखिलेश यादव दोनों ही अरविंद केजरीवाल के सपोर्ट में खड़े हो गए थे.
2025 में हुए दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे एक जैसे आए, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन चुनाव मैदान में था. पश्चिम बंगाल और दिल्ली का मामला तो एक जैसा रहा, लेकिन बिहार में तो राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव और महागठबंधन के नेताओं के साथ वोटर अधिकार यात्रा निकाली थी.
बिहार और पश्चिम बंगाल की हार के बाद अब बारी उत्तर प्रदेश की है. और, 8 जून को दिल्ली में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक के बीच राहुल गांधी और अखिलेश यादव की अलग से मुलाकात की भी खबर है. जाहिर है, यूपी चुनाव में बीजेपी को घेरने और जीत का हैट्रिक बनाने से रोकने पर बातचीत हुई होगी.
INDIA ब्लॉक की बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा तो पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार ही था. विपक्षी नेताओं की बैठक का सबसे ज्यादा इंतजार ममता बनर्जी को ही था. पहल के साथ बैठक बुलाने में ममता बनर्जी के भी जोरदार प्रयास शामिल थे.
बंगाल की बात तो हुई ही, बाद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की तरफ से आगे के लिए 5 ऐलान भी किए गए. साथ ही, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर भी व्यापक चर्चा हुई. ज्यादातर विपक्षी दलों के नेताओं का मानना था कि पश्चिम बंगाल की हार के बाद उत्तर प्रदेश की जीत जरूरी हो गई है. और, सभी ने एक दूसरे को मिलकर तैयारी करने की सलाह दी. ताकि, बीजेपी को लोकसभा चुनाव की ही तरह घेरा जा सके.
रिपोर्ट के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने डीएमके और आम आदमी पार्टी के इंडिया ब्लॉक की बैठक से दूरी बनाने का मुद्दा भी उठाया. अखिलेश यादव का कहना है कि विपक्षी खेमे से जुड़े राजनीतिक दलों को साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस को निभानी होगी. अखिलेश यादव ने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि वे इस मामले में बड़ा दिल दिखाएं.
सपा-कांग्रेस में सीटों के बंटवारे का प्लान
इंडिया ब्लॉक की बैठक में लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग का जिक्र भी आया, और सीटों की राजनीति भी देखने को मिली. जैसे सोनिया गांधी के पास ममता बनर्जी को सीट दी गई थी, ठीक वैसे ही राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव बैठे थे. सीटिंग अरेंजमेंट में इंडिया ब्लॉक के नेताओं की पोजीशनिंग भी दिखाने की कोशिश की गई थी.
सूत्रों के हवाले से आगामी यूपी चुनाव में सीट शेयरिंग के नंबर भी सामने आए हैं. बताते हैं कि यूपी का उदाहरण देते हुए समाजवादी पार्टी की तरफ से कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनाव का गणित भी याद दिलाया गया. अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ 17 लोकसभा सीटें शेयर की थीं, जिनमें 6 सीटों पर कांग्रेस को कामयाबी मिली थी.
रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी यूपी में कांग्रेस को ज्यादा से ज्यादा 80 विधानसभा सीटें देने के मूड में बताई जाती है. प्लान ये है कि कांग्रेस को हर जिले में एक सीट दे दी जाए ताकि समाजवादी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में नाराजगी न हो. अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी विधायकों और जिलाध्यक्षों को हर जिले में ऐसी एक-एक सीट का सुझाव देने को भी कहा है.
बताते हैं कि समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का काम आलोक रंजन पर छोड़ा है. आलोक रंजन रिटायर हो चुके आईएएस अधिकारी हैं, फिलहाल वो सर्वे टीम का नेतृत्व कर रहे हैं. आलोक रंजन ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस को गठबंधन के तहत 70-75 सीटें देने का सुझाव दिया था.
सर्वे में पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऐसी कौन सीटें हैं जहां जातीय समीकरण कांग्रेस के लिए फिट हैं. कांग्रेस के साथ गठबंधन में सीटें देने के लिए समाजवादी पार्टी ने जो फॉर्मूला तय किया है, उसमें सबसे पहले संभावित उम्मीदवार के इलाके में प्रभाव पर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार किया जा रहा है.
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में थी, और 399 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. लेकिन, महज 2 सीटें ही जीत सकी थी. 2017 में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन था, और बंटवारे में उसे 114 सीटें मिली थीं. 'यूपी के लड़के' स्लोगन के साथ अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने साथ में कैंपेन भी किया था, लेकिन कांग्रेस के हिस्से में 7 ही सीटें आई थीं.
आने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी 2017 के मुकाबले कम सीटें देने की सोच रही है, और कांग्रेस जो भी मिले उसमें ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है.
मृगांक शेखर