मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के गेट के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने श्योपुर जिले के सहसराम गांव के एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ कर रख दिया है. इस दर्दनाक दुर्घटना में जान गंवाने वाले 45 वर्षीय महेश शर्मा और उनके 15 वर्षीय बेटे शौर्य शर्मा के शव जब रविवार दोपहर उनके पैतृक गांव सहसराम पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया और हर आंख नम हो गई. परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है. भाई से मिलने का सफर बन गया अंतिम यात्रा...
दरअसल,, महेश शर्मा पुत्र मातादीन शर्मा सहसराम गांव में रहकर खेती-किसानी का काम संभालते थे. वे ग्वालियर में रह रहे अपने छोटे भाई संजय शर्मा से मिलने और वहां बन रहे उनके नए निर्माणाधीन मकान को देखने गए थे.
संजय शर्मा ग्वालियर में प्राइवेट नौकरी करते हैं और अपनी पत्नी छाया शर्मा व दो बेटों के साथ वहीं रहते हैं. नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरा परिवार और रिश्तेदार ग्वालियर के चिनोर रोड स्थित शीतला माता मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुंचा थे. किसी को भी इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि भाई से मिलने की यह खुशी जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन जाएगी.
मंदिर दर्शन के दौरान बरपा काल, पिता-पुत्र की मौत
शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात करीब 1:30 बजे, जब मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी, तभी धान से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया. ब्रेक फेल होने के कारण यह ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार की बाहरी दीवार से जा टकराया.
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इस भयानक हादसे में संजय शर्मा के बड़े भाई महेश शर्मा और उनके 15 वर्षीय बेटे शौर्य शर्मा की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. वहीं, इस दुर्घटना में संजय शर्मा, उनकी पत्नी छाया शर्मा और उनकी बहन की दो बेटियां साक्षी शर्मा और जानवी शर्मा भी गंभीर रूप से घायल हो गई हैं. साक्षी शर्मा और जानवी शिवपुरी जिले के बैराड़ की रहने वाली हैं और पढ़ाई के सिलसिले में ग्वालियर में संजय के पास रहकर पढ़ती थीं. देखें VIDEO:-
गांव में छाया सन्नाटा, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रविवार को जब पिता-पुत्र के शव सहसराम गांव पहुंचे, तो पूरा गांव शोक में डूब गया. खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले महेश शर्मा और उनके युवा बेटे की अचानक हुई मौत से पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है. घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है, जबकि इस भीषण हादसे ने कई परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दे दिए हैं.
खेमराज दुबे