मध्य प्रदेश के मैहर स्थित मां शारदा शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. त्रिकूट पर्वत पर विराजी मां शारदा के दर्शन के लिए श्रद्धालु रात से ही लंबी कतारों में खड़े रहे. रविवार सुबह 3 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद आरती हुई और भक्तों ने मां के दर्शन किए. नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की जाती है. इस मौके पर मां शारदा का लाल रंग के परिधान में विशेष श्रृंगार किया गया.
आल्हा आज भी करते हैं मां की पहली पूजा!
मैहर के मां शारदा मंदिर की पहचान सिर्फ प्राचीन धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां वीर योद्धा आल्हा से जुड़ी एक चर्चित जनश्रुति भी प्रचलित है. मान्यता है कि आल्हा को मां शारदा से अमरत्व का वरदान मिला था और वह आज भी मंदिर में सबसे पहले पूजा करने आते हैं. कहा जाता है कि जब सुबह मंदिर के कपाट खुलते हैं, तो मां का श्रृंगार और पूजा हो चुकी होती है. हालांकि, यह धार्मिक आस्था और जनश्रुति से जुड़ी मान्यता है.
मंदिर के प्रधान पुजारी पवन पांडेय ने बताया कि नवरात्रि के दौरान देशभर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति की कामना लेकर यहां आते हैं. कई श्रद्धालु नंगे पैर लंबी दूरी तय करके मां के दरबार तक पहुंचते हैं.
माता सती के हार से जुड़ी है मैहर नाम की मान्यता
मैहर के नाम को लेकर भी एक प्रचलित धार्मिक मान्यता है. कहा जाता है कि भगवान शिव जब माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर विचरण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के अंग अलग किए. मान्यता है कि माता सती का कंठ और गले का हार त्रिकूट पर्वत पर गिरा था. इसी वजह से इस स्थान को पहले 'माई हार' कहा गया, जो आगे चलकर अपभ्रंश के रूप में मैहर कहलाने लगा. इसी धार्मिक परंपरा के कारण मां शारदा के इस मंदिर को विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है.
600 फीट ऊंचे त्रिकूट पर्वत पर विराजती हैं मां शारदा
मैहर का मां शारदा मंदिर त्रिकूट पर्वत पर करीब 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1038 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. इसके अलावा रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे भक्तों के लिए पहाड़ी तक पहुंचना आसान हुआ है. नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है. अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लेकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर ध्यान दिया.
मां शैलपुत्री की पूजा से शुरू हुई नवरात्रि
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूर्व जन्म में वह राजा दक्ष की पुत्री सती थीं. मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है. उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल सुशोभित है.
मां शारदा मंदिर में नवरात्रि के दौरान विशेष भोग भी लगाया जाता है. प्रधान पुजारी पवन पांडेय के मुताबिक, सुबह मां को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं, जबकि दोपहर में पूड़ी, हलवा, सब्जी, दाल और चावल का भोग लगाया जाता है. नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर में भक्तों की आवाजाही जारी है. श्रद्धालु मां शारदा के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं.
वेंकटेश द्विवेदी