रीवा में परमाणु परियोजना पर विवाद, नेता प्रतिपक्ष बोले- ग्राम सभा की मंजूरी के बिना NOC कैसे जारी हुई?

Rewa nuclear project: रीवा के रजोही-सराय कला में प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु परियोजना पर उमंग सिंघार ने सवाल उठाए. उन्होंने ग्राम सभा के विरोध के बावजूद NOC जारी होने का दावा करते हुए जांच और परियोजना को दूसरी जगह ले जाने की मांग की.

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उमंग सिंघार ने उठाए विस्थापन और सुरक्षा के सवाल.(Photo:X/UmangSinghar) उमंग सिंघार ने उठाए विस्थापन और सुरक्षा के सवाल.(Photo:X/UmangSinghar)

aajtak.in

  • रीवा,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:35 PM IST

MP News: रीवा जिले के रजोही-सराय कला क्षेत्र में प्रस्तावित टाटा पावर परमाणु ऊर्जा परियोजना को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ग्राम सभा के विरोध के बावजूद परियोजना के लिए ड्रिलिंग की अनुमति दे दी गई. उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से परियोजना को किसी दूसरी जगह स्थानांतरित करने पर विचार करने की मांग की है.

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एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिंघार ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र के दलित और आदिवासी परिवारों के विस्थापन का खतरा है. उन्होंने प्रशासन से कथित सहमति पत्र की जांच कराने और जारी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) को रद्द करने की मांग की.

ग्राम सभा के फैसले के बावजूद NOC जारी करने का आरोप

उमंग सिंघार के मुताबिक, 3 सितंबर को हुई ग्राम सभा में सर्वसम्मति से ड्रिलिंग की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था. इसके बावजूद, उन्होंने आरोप लगाया कि 4 सितंबर के कथित सहमति पत्र के आधार पर 23 सितंबर को NOC जारी कर दी गई.

सिंघार ने बताया कि ग्राम पंचायत ने 5 सितंबर को जिला प्रशासन को पत्र लिखकर ग्राम सभा के फैसले की जानकारी दी थी. वहीं, सरपंच कोमल संजय सिंह ने 8 अक्टूबर को संभागायुक्त और कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में कथित सहमति पत्र की जांच करने और NOC रद्द करने की मांग की गई है.

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सिंघार ने सवाल उठाया कि जब ग्राम सभा ने अनुमति देने से इनकार किया था, तो प्रशासन ने किस आधार पर ड्रिलिंग की अनुमति जारी की. उन्होंने यह भी पूछा कि कथित सहमति पत्र की सत्यता की जांच के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

1500 से अधिक परिवारों पर असर की आशंका

सिंघार ने दावा किया कि रजोही और सराय कला में 1500 से अधिक परिवार रहते हैं और क्षेत्र की आबादी 5000 से ज्यादा है. उनके अनुसार, यहां बड़ी संख्या में आदिवासी, अनुसूचित जाति के परिवार, छोटे किसान और खेतिहर मजदूर रहते हैं.

उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि परियोजना से कितने गांव, परिवार, कृषि भूमि और वन अधिकार पट्टे प्रभावित हो सकते हैं. सिंघार ने कहा कि प्रभावित लोगों के अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए.

पर्यावरण और सुरक्षा मानकों पर भी उठाए सवाल

प्रस्तावित परमाणु परियोजना की सुरक्षा को लेकर सिंघार ने चेरनोबिल और फुकुशिमा हादसों का जिक्र किया. उन्होंने सरकार से पर्यावरण प्रभाव आकलन, भूकंपीय जोखिम, पानी की उपलब्धता, संभावित रेडिएशन प्रभाव और आपदा प्रबंधन योजना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की.

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या परियोजना के लिए सभी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इंतजाम किए गए हैं.

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सिंघार ने कहा कि सरकार सौर ऊर्जा और बायो-एनर्जी जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर परमाणु ऊर्जा परियोजना का प्रस्ताव सामने आ रहा है.

विरोध प्रदर्शन के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत का दावा

उमंग सिंघार ने दावा किया कि परियोजना के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान विमला कोल नाम की एक बुजुर्ग आदिवासी महिला की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे.

हालांकि, महिला की मौत की परिस्थितियों और परियोजना विरोध से उसके संबंध की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है.

वोटर आईडी मामले पर भी बोले सिंघार

रीवा परियोजना के अलावा सिंघार ने महेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे वोटर आईडी कार्ड मिलने के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान मतदाता सूची में सामने आने वाली गड़बड़ियों और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की टिप्पणी को लेकर भाजपा की आलोचना के सवाल पर सिंघार ने कहा कि सत्ताधारी पार्टी को चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की.

फिलहाल रीवा में प्रस्तावित परियोजना को लेकर ग्राम सभा की सहमति, कथित NOC और स्थानीय परिवारों पर संभावित असर जैसे मुद्दे विवाद के केंद्र में हैं. इन आरोपों पर प्रशासन और संबंधित परियोजना पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी.

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