मध्य प्रदेश के पन्ना में लोकायुक्त की रिश्वतखोरी के खिलाफ कार्रवाई के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार का विवादित बयान सामने आया. उन्होंने कैमरे पर कहा कि उनका या सब-इंजीनियर का कोई फिक्स प्रतिशत नहीं है, लेकिन कोई प्यार से कुछ दे तो वे रख लेते हैं. बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
दरअसल, यह पूरा मामला उस कार्रवाई के बाद सामने आया, जिसमें सागर लोकायुक्त की टीम ने जल संसाधन विभाग के दो कर्मचारियों को 45 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था.
लोकायुक्त सागर की टीम ने पन्ना में संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार को 15 हजार रुपये और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया.
ग्वालियर के रहने वाजे ठेकेदार गौरव तोमर ने मझगांय मध्यम परियोजना के कैनाल स्लूस निर्माण कार्य के अंतिम भुगतान के बदले रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की.
ठेकेदार के मुताबिक, उनके तीन भुगतान पहले हो चुके थे, लेकिन चौथे और अंतिम बिल को पास कराने के लिए अधिकारियों की ओर से लगातार पैसों की मांग की जा रही थी. उनका आरोप है कि वे करीब तीन महीने से विभाग के चक्कर काट रहे थे. इस दौरान उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की मांग के कारण उन्हें अपना काम और सामान तक गिरवी रखना पड़ा.
कार्यपालन यंत्री ने कैमरे पर क्या कहा?
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद पत्रकारों ने जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार से सवाल किए. उन्होंने कहा कि भुगतान में देरी फंड की कमी के कारण होती है और रिश्वत मांगना गलत है.
हालांकि, इसी दौरान उन्होंने कहा कि उनका या सब-इंजीनियर का कोई फिक्स प्रतिशत नहीं है. यदि कोई अपनी खुशी से कुछ दे देता है तो वे उसे रख लेते हैं. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ और विवाद का विषय बन गया. देखें VIDEO:-
सरकार ने तत्काल प्रभाव से किया सस्पेंड
राज्य शासन ने सीबी अहिरवार के सोशल मीडिया पर प्रसारित बयान को गंभीरता से लेते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. सरकारी आदेश के मुताबिक, उनके वक्तव्य में कदाचरण की स्वीकारोक्ति को मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम का उल्लंघन और शासकीय सेवक के आचरण के प्रतिकूल माना गया है. निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग भोपाल निर्धारित किया गया है.
लोकायुक्त ने शुरू की आगे की जांच
लोकायुक्त पुलिस ने दोनों गिरफ्तार कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है. डीएसपी कमल सिंह उइके के मुताबिक, टीम इस मामले में आगे की जांच कर रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित रिश्वतखोरी के मामले में अन्य अधिकारी या कर्मचारी शामिल हैं या नहीं.
दिलीप शर्मा (दीपक)