पन्ना में मिली 1500 साल पुरानी श्रृंगार करती नायिका की प्रतिमा, बालों में क्लिप और गले में सात लड़ियों का हार

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के नचना गांव में खुदाई के दौरान करीब 1500 साल पुरानी श्रृंगार करती नायिका की प्रतिमा मिली है. धूसर बलुआ पत्थर से बनी इस 20 सेंटीमीटर ऊंची मूर्ति में बालों की क्लिप, सात लड़ियों का हार, कंगन और बाजूबंद बारीकी से उकेरे गए हैं. यह गुप्तकालीन सौंदर्य और शिल्पकला की अनमोल झलक पेश करती है.

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बालों में क्लिप, गले में सात लड़ियों का हार.(Photo: Dharmendra Sahu/ITG) बालों में क्लिप, गले में सात लड़ियों का हार.(Photo: Dharmendra Sahu/ITG)

धर्मेंद्र साहू

  • पन्ना,
  • 07 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:42 PM IST

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में पुरातत्व की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण खोज हुई है. सलेहा तहसील के ऐतिहासिक गांव नचना में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाई के दौरान श्रृंगार करती एक नायिका की प्राचीन प्रतिमा मिली है. करीब 1500 साल पुरानी मानी जा रही यह कलाकृति गुप्तकालीन कला, संस्कृति और उस दौर की महिलाओं की सौंदर्य परंपराओं को समझने का अहम प्रमाण है.

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करीब 20 सेंटीमीटर ऊंची यह प्रतिमा धूसर बलुआ पत्थर से बनाई गई है. इसकी सतह पर चमकदार पॉलिश दिखाई देती है. मूर्ति में एक महिला को श्रृंगार करते हुए दिखाया गया है. खास बात यह है कि शिल्पकार ने उसके केश विन्यास और आभूषणों को बेहद बारीकी से उकेरा है.

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प्रतिमा में महिला के बालों में क्लिप जैसी सजावटी वस्तु दिखाई देती है. उसके गले में सात लड़ियों वाला हार है, जबकि हाथों में कंगन और बाजुओं में बाजूबंद नजर आते हैं. इन बारीकियों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब डेढ़ हजार साल पहले भी भारतीय महिलाओं के श्रृंगार और आभूषणों की परंपरा कितनी विकसित थी.

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गुप्तकालीन कला का दुर्लभ प्रमाण

पुरातत्वविद और एएसआई के अधीक्षक शिवकांत बाजपेयी के अनुसार, यह प्रतिमा लगभग 1500 वर्ष पुरानी है. चौथी-पांचवीं शताब्दी की यह कलाकृति उस दौर की शिल्पकला और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है. पत्थर पर आभूषणों, केश सज्जा और श्रृंगार का इतना सूक्ष्म चित्रण तत्कालीन शिल्पकारों की असाधारण दक्षता का प्रमाण है.

यह प्रतिमा इसलिए भी खास है, क्योंकि गुप्तकालीन कला में श्रृंगार करती नायिका का ऐसा स्वरूप दुर्लभ माना जाता है. भारतीय कला इतिहास में ग्यारसपुर की 'लेडी ऑफ ग्यारसपुर' और खजुराहो संग्रहालय में संरक्षित 'सुखनायिका' जैसी प्रतिमाएं भी उल्लेखनीय हैं.

हालांकि, नचना से मिली यह कलाकृति इन दोनों प्रतिमाओं से कहीं अधिक प्राचीन बताई जा रही है. ऐसे में इसे भारतीय मूर्तिकला के विकासक्रम को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण खोज माना जा रहा है.

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नचना की ऐतिहासिक विरासत को मिली नई पहचान

पन्ना जिले का नचना गांव गुप्तकालीन मंदिर स्थापत्य के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है. यहां स्थित पार्वती मंदिर और चौमुखनाथ मंदिर ऐतिहासिक एवं धार्मिक दृष्टि से खास महत्व रखते हैं. अब श्रृंगार करती नायिका की प्रतिमा मिलने से इस गांव की पुरातात्विक पहचान और समृद्ध हुई है.

यह खोज सिर्फ एक प्राचीन मूर्ति मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उस समय की जीवनशैली, महिलाओं की सज्जा, सौंदर्यबोध और सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर भी मिला है. प्रतिमा में उकेरे गए आभूषण और केश विन्यास बताते हैं कि गुप्तकाल में सौंदर्य और कला का कितना गहरा संबंध था.

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संग्रहालय में संरक्षित होगी अनमोल धरोहर

इस ऐतिहासिक प्रतिमा को आने वाले समय में संग्रहालय में प्रदर्शित और संरक्षित किए जाने की योजना है. इससे आम लोग भी गुप्तकालीन कला के इस अनूठे स्वरूप को करीब से देख सकेंगे. पुरातत्वविदों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए यह कलाकृति खास आकर्षण का केंद्र बन सकती है.

नचना में मिली यह नायिका प्रतिमा भारतीय इतिहास के उस गौरवशाली दौर की याद दिलाती है, जब पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृतियां केवल सजावट का माध्यम नहीं थीं, बल्कि तत्कालीन समाज, संस्कृति और जीवनशैली का जीवंत दस्तावेज भी हुआ करती थीं.

करीब 1500 साल बाद भी इस प्रतिमा में श्रृंगार का स्वरूप सुरक्षित है. यह प्राचीन भारत की कला-कौशल और सांस्कृतिक समृद्धि की कहानी बयां करता है.

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