बंद अलमारी, 4 बैग और 3 करोड़ का कैश...ऑटो ड्राइवर के घर मिली रकम का PWD इंजीनियर से क्या है कनेक्शन

सागर में ऑटो ड्राइवर के घर बंद अलमारी से चार बैग में करीब 3 करोड़ रुपये कैश मिलने के बाद रकम के स्रोत को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. परिजनों का दावा है कि यह पैसा उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार का है, जिन्हें PWD में इंजीनियर बताया गया है. परिवार के मुताबिक रकम करीब 8-9 महीने पहले घर में रखी गई थी. पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है.

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ऑटो ड्राइवर के घर पर मिले चार करोड़ कैश की जांच तेज हो गई है (Photo: AI Generator) ऑटो ड्राइवर के घर पर मिले चार करोड़ कैश की जांच तेज हो गई है (Photo: AI Generator)

हिमांशु पुरोहित

  • सागर ,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:24 PM IST

मध्य प्रदेश के सागर में पुलिस एक हथियार की तलाश में एक ऑटो ड्राइवर के घर पहुंची थी. मकसद था सोशल मीडिया पर सामने आई पिस्तौल की तस्वीर की जांच करना और यह पता लगाना कि तस्वीर में दिख रहा हथियार वास्तव में उसके पास है या नहीं. लेकिन तलाशी के दौरान पुलिस की नजर एक ऐसी लॉक अलमारी पर पड़ी, जिसने सभी को चौंका दिया. अलमारी खोली गई तो उसमें एक-दो नहीं, बल्कि चार बैग मिले. बैग खुले तो उनके अंदर नोटों की गड्डियां थीं. पुलिस ने नकदी को बाहर निकाला तो रकम इतनी ज्यादा निकली कि मौके पर गिनती करना भी आसान नहीं था. इलेक्ट्रॉनिक करेंसी काउंटिंग मशीन मंगाई गई. शुरुआती जानकारी में चारों बैगों में करीब 3 करोड़ रुपये से ज्यादा नकदी होने की बात सामने आई है.

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पूरी कहानी की शुरुआत सोशल मीडिया प्रोफाइल की स्क्रीनिंग से हुई. पुलिस ऐसे प्रोफाइल की स्क्रीनिंग कर रही थी, जिनमें आपराधिक प्रवृत्ति के लोग पिस्तौल, चाकू या दूसरे हथियारों के साथ फोटो और वीडियो पोस्ट करते हैं. इसी दौरान दो सोशल मीडिया प्रोफाइल पुलिस की नजर में आए. इनमें पिस्तौल के साथ फोटो मिलने के बाद दोनों मामलों में कार्रवाई शुरू की गई. गोपालगंज थाना पुलिस सौरभ अहिरवार के घर पहुंची जो ऑटो चलाता है. पुलिस टीम का उद्देश्य सोशल मीडिया पर सामने आई पिस्तौल की तस्वीर की तस्दीक करना और घर की तलाशी लेना था. पुलिस जिस चीज की तलाश में घर पहुंची थी, वह तलाशी के दौरान नहीं मिली. लेकिन इसी तलाशी में एक ऐसी चीज सामने आ गई, जिसकी पुलिस को उम्मीद नहीं रही होगी.

अलमारी पर लगा था लॉक, चाबी परिवार के पास नहीं

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घर की तलाशी के दौरान पुलिस की नजर एक लॉक अलमारी पर गई. अलमारी बंद थी और उसकी चाबी परिवार के पास नहीं थी. इसके बाद पंचों की मौजूदगी में नियमानुसार अलमारी खुलवाई गई. अलमारी खुलते ही अंदर रखा एक बैग दिखाई दिया. जब पुलिस ने बैग खोला तो उसमें बड़ी संख्या में नोट भरे मिले. इसके बाद अलमारी की तलाशी आगे बढ़ी. एक बैग के बाद दूसरा, फिर तीसरा और चौथा बैग सामने आया. चारों बैगों में नकदी रखी थी. यहीं से पुलिस की कार्रवाई का पूरा फोकस बदल गया. जिस घर में टीम हथियार की तस्वीर की जांच के लिए पहुंची थी, वहां अब करोड़ों रुपये की नकदी सामने थी.

एक बैग में ही 1.33 करोड़ की रकम!

बरामद नकदी की मात्रा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक बैग से ही करीब 1 करोड़ 33 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई. चारों बैगों की रकम को मिलाकर नकदी करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है. रकम इतनी अधिक थी कि पुलिस के लिए मौके पर सामान्य तरीके से नोट गिनना आसान नहीं था. इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक करेंसी काउंटिंग मशीन मंगाई गई. दोपहर बाद शुरू हुई कार्रवाई देर रात करीब 12 बजे तक चलती रही. पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि बरामदगी और नोटों की गिनती की प्रक्रिया रिकॉर्ड में रहे.

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आखिर ये पैसा किसका

करोड़ों की नकदी सामने आने के बाद जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि रकम का वास्तविक मालिक कौन है. पुलिस पूछताछ के दौरान परिवार की ओर से दावा किया गया कि अलमारी और उसमें रखा पैसा उनका नहीं है. परिजनों के मुताबिक यह रकम उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार का है. परिवार का कहना है कि रमेश अहिरवार करीब 8-9 महीने पहले यह पैसा यहां रखकर गए थे. परिजनों के मुताबिक रमेश अहिरवार भोपाल के चूना भट्टी इलाके में रहते हैं और PWD में इंजीनियर बताए जा रहे हैं. परिवार का दावा है कि वह करीब 8-9 महीने पहले पैसे यहां रखकर गए थे, तो इतनी बड़ी नकदी घर में रखने की वजह क्या थी? पुलिस अब रकम के वास्तविक स्रोत और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. यह भी देखा जा रहा है कि इतनी बड़ी राशि से संबंधित कोई वैध दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड या अन्य प्रमाण मौजूद हैं या नहीं.

नोट गिनते-गिनते देर रात तक चली कार्रवाई

करोड़ों की नकदी बरामद होने के बाद पुलिस ने करेंसी काउंटिंग मशीन मंगाई. पुलिस की मौजूदगी में नोटों की गिनती शुरू हुई. कार्रवाई दोपहर बाद शुरू हुई और देर रात करीब 12 बजे तक चलती रही. पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई. इससे बरामदगी से लेकर नोटों की गिनती तक की प्रक्रिया को रिकॉर्ड में रखा गया. मामला सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई. कुछ अन्य नामों को लेकर भी सवाल किए गए और पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को जांच में शामिल किया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक, मामले की जानकारी संबंधित विभागों और एजेंसियों को दी जाएगी. आयकर और राजस्व विभाग समेत अन्य संबंधित एजेंसियां भी रकम के स्रोत की जांच कर सकती हैं.
 

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