फ्रिज नहीं था, फिर भी दूध घंटों तक नहीं होता था खराब! 100 साल पुरानी ये देसी ट्रिक जानकर चौंक जाएंगे

गर्मियों में दूध जल्दी खराब हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि फ्रिज आने से पहले भी लोग दूध को लंबे समय तक ताजा रखते थे? जानिए 100 साल पुराना देसी तरीका, जिससे बिना फ्रिज भी दूध को कुछ समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.

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दूध को अच्छे से उबालकर खराब होने से बचाया जा सकता है. (Photo: ITG) दूध को अच्छे से उबालकर खराब होने से बचाया जा सकता है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:18 PM IST

गर्मियों का मौसम आते ही लोगों को सबसे ज्यादा अगर किसी चीज की चिंता सताती है, तो वो दूध के खराब होने की होती है. दूध को चाहे कितना भी उबाल लिया जाए, लेकिन अगर वो जरा देर बाहर रह जाता है तो वो पीने लायक नहीं बचता है. ऐसे में लोग दूध को उबालने के बाद तुरंत फ्रिज में रख देते हैं. हालांकि, गर्मियों में कई बार बिजली भी भाग जाती है. 

अगर आज कुछ घंटों के लिए बिजली चली जाए, तो सबसे पहले दूध खराब होने की चिंता सताने लगती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब घरों में फ्रिज नहीं होते थे, फिर भी दूध आसानी से लंबे समय तक ताजा रहता था. इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि बड़े-बुजुर्गों की समझदारी और कुछ आसान देसी तरीके थे. आइए जानते हैं वो तरीका, जो आज भी जरूरत पड़ने पर आपके काम आ सकता है.

घर आते ही दूध उबालना था सबसे पहला नियम
पुराने जमाने में जैसे ही दूध घर आता था, उसे बिना देर किए अच्छी तरह उबाल लिया जाता था. ऐसा करने से दूध में मौजूद कई तरह के बैक्टीरिया कम हो जाते थे, जिससे दूध जल्दी खराब नहीं होता था. दूध को अच्छे से उबालने के बाद उसे अपने आप ठंडा होने दिया जाता था और किसी फिर साफ बर्तन में रख दिया जाता था.

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जरूरत पड़ने पर दोबारा भी उबाला जाता था दूध
पहले के समय में गर्मी के मौसम में सिर्फ एक बार दूध उबालना काफी नहीं माना जाता था. अगर दूध लंबे समय तक फ्रेश रखना हो, तो हर 8 से 10 घंटे बाद उसे फिर से उबाल लिया जाता था. ऐसा करने से दूध में बैक्टीरिया पनपने की रफ्तार कम हो जाती थी और दूध ज्यादा देर तक ताजा बना रहता था.

मिट्टी का घड़ा और ठंडी जगह भी आते थे काम
उस जमाने में ज्यादातर घरों में मिट्टी के घड़े का इस्तेमाल होता था. घड़े से पानी धीरे-धीरे सूखता रहता है, जिससे अंदर का टेंपरेचर थोड़ा ठंडा बना रहता है. कई लोग दूध के बर्तन को पानी से भरी थाली में भी रख देते थे, ताकि दूध को हल्की ठंडक मिलती रहे. इसके अलावा पुराने घरों की मोटी दीवारें और हवादार कमरे भी दूध को जल्दी खराब होने से बचाने में मदद करते थे.

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छोटी-छोटी आदतें भी दूध को रखती थीं सुरक्षित
पुराने जमाने के लोग दूध को हमेशा ढककर रखते थे ताकि उसमें धूल या गंदगी न जाए. दूध निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखे बर्तन का ही इस्तेमाल किया जाता था. अगर ताजा दूध पहले से रखे दूध में मिलाना होता था, तो उसे पहले अच्छी तरह उबालना सही माना जाता था.

मलाई से बनता था मक्खन और देसी घी
बार-बार उबालने की वजह से दूध पर मोटी मलाई जम जाती थी. इस मलाई को कई दिनों तक, कई बार तो कई हफ्तों तक इकट्ठा करके पहले मक्खन और फिर देसी घी बनाया जाता था. 

क्या आज भी अपनाया जा सकता है ये तरीका?
अगर कभी बिजली चली जाए, फ्रिज खराब हो जाए या आप ऐसी जगह हों जहां फ्रिज न हो, तो ये देसी तरीका कुछ समय के लिए दूध को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है. हालांकि, अगर फ्रिज है तो दूध को उसमें रखना ही सही रहता है. बार-बार उबालने से दूध के कुछ पोषक तत्व कम हो सकते हैं. इसलिए इस पुराने तरीके को जरूरत पड़ने पर ही अपनाना ज्यादा सही रहेगा.

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