कई दिनों या कभी-कभी कई महीनों तक लगातार काम करने के बाद जॉब करने वाले लोग साल में एक या ज्यादा से ज्यादा दो लंबी छुट्टियां लेते है. वो छुट्टियां लंबी होती है, लेकिन इन छुट्टियों के लिए कभी-कभी पूरा साल इंतजार करना पड़ता है. और आज की जेनरेशन इन उलझनों और रुकावटों से बाहर निकल गई है. बॉस का छुट्टी अप्रूव करना, पूरे साल उसके लिए इंतजार करना और फिर बड़ी मुश्किलों से एक वेकेशन प्लान करना. जेन जी ने इसका भी एक तरीका खोज निकाला है.
Gen Z के लिए ट्रैवल अब किसी एक बड़े वेकेशन का इंतजार करने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी से ब्रेक लेने और नए अनुभव पाने का तरीका बनता जा रहा है. कभी दोस्तों के साथ अचानक बना प्लान, कभी किसी खास जगह को एक्सप्लोर करने का मन और कभी सिर्फ कुछ दिनों के लिए रूटीन से दूर जाना-युवाओं के बीच ट्रैवल का यह नया अंदाज तेजी से जगह बना रहा है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कहां घूमने जाना है, बल्कि ये भी है कि ट्रैवल का एक्सपीरियंस उनके लिए कितना खास है.
Airbnb की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का Gen Z अब साल में सिर्फ एक बार छुट्टी मनाने के बजाय छोटी-छोटी यात्राओं को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना रहा है. अब घूमने का तरीका भी बदल रहा है-कम प्लानिंग, ज्यादा अचानक बने प्लान और अपनी पसंद के हिसाब से ट्रैवल करना Gen Z को ज्यादा पसंद आ रहा है. 'नेवर द सेम': The New Rules of Gen Z Travel in India रिपोर्ट के मुताबिक, इनके लिए ट्रैवल का मतलब ज्यादा से ज्यादा जगहें देखना नहीं, बल्कि ऐसी जगह और ऐसे अनुभव चुनना है जहां वे खुद को सबसे ज्यादा सहज और अपने जैसा महसूस करें.
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में Gen Z का ट्रैवल करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. करीब 10 में से 7 Gen Z युवा साल में एक लंबी छुट्टी लेने के बजाय तीन छोटी ट्रिप करना पसंद करते हैं. वहीं, 95% चाहते हैं कि उनकी यात्रा पर्सनल और सबसे अलग हो, यानी पहले से तय या आम ट्रैवल प्लान जैसी न लगे.
87% Gen Z का मानना है कि वे जिस तरह से ट्रैवल करते हैं, उससे उनकी पर्सनैलिटी भी झलकती है. ग्रुप में घूमने वाले युवाओं में आधे से ज्यादा लोग अलग-अलग होटल रूम लेने के बजाय एक ही शेयर की गई जगह या घर में रहना पसंद करते हैं. वहीं, 4 में से 3 युवाओं के लिए ये ज्यादा मायने रखता है कि वे किसके साथ ट्रैवल कर रहे हैं, न कि वे कहां जा रहे हैं.
इस बदलाव से ये भी समझ आता है कि Gen Z के लिए ट्रैवल सिर्फ डेस्टिनेशन तक पहुंचने का नाम नहीं है. उनके लिए साथ में कौन है, वहां क्या अनुभव मिल रहा है और वह जगह उनकी पसंद से कितनी जुड़ी है, ये चीजें भी मायने रखती हैं. इसलिए एक ही तरह के पैकेज या तय ट्रैवल प्लान की जगह वे अपनी जरूरत और मूड के हिसाब से प्लान बनाना पसंद कर रहे हैं.
यही वजह है कि दोस्तों के साथ शेयर की गई जगह पर रहना, अचानक ट्रिप का प्लान बनाना या किसी खास अनुभव के लिए किसी शहर तक पहुंच जाना अब यंग जेनरेशन के ट्रैवल कल्चर का हिस्सा बन रहा है. यानी Gen Z के लिए घूमना अब सिर्फ 'कहां गए' की कहानी नहीं, बल्कि 'कैसा महसूस किया' की कहानी भी है.
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