साउथ इंडियन सांभर की कहानी: शाही किचन से आपकी थाली तक कैसे पहुंची ये मशहूर डिश? जानें पूरी हिस्ट्री

Origin of sambar: दक्षिण भारतीय सांभर। मसालों और स्वादों का यह लाजवाब मिश्रण एक रोचक इतिहास समेटे हुए है और दुनिया भर में लोगों का पसंदीदा बना हुआ है. इसकी उत्पत्ति कैसे हुई, इस बारे में आर्टिकल में जानेंगे.

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सांभर की उत्पत्ति महाराष्ट्र से बनाई जाती है. (Photo: ITG) सांभर की उत्पत्ति महाराष्ट्र से बनाई जाती है. (Photo: ITG)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 17 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

History or origin of sambar: साउथ इंडियन डिश इडली, डोसा, उत्पम आदि बिना सांभर के अधूरे माने जाते हैं. खट्टा, चटपटा और सब्जियों से भरे सांभर को चावल के साथ भी खाया जाता है. दरअसल, जिस सांभर को लोग साउथ इंडियन चीजों के साथ खाते हैं और उसे टिपिकल 'साउथ इंडियन' डिश मानते हैं, उसका कनेक्शन महाराष्ट्र से माना जाता है. सांभर की उत्पत्ति के पीछे कई कहानियां प्रचलित हैं. बताया जाता है कि सांभर को सोच समझकर नहीं बनाया गया था बल्कि वो गलती ये या फिर एक एक्सपेरिमेंट के दौरान बना था. तो आइए जानते हैं, सांभर के इजाद के बारे में कौन-कौन सी कहानियां बताई जाती हैं.  

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संभाजी महाराज ने बनाया सांभर!

सांभर की उत्पत्ति के बारे में जो सबसे प्रचलित कहानी 17वीं शताब्दी के अंत की बताई जाती है. लोककथाओं के अनुसार, 17वीं शताब्दी के अंत में तंजावुर (तमिलनाडु) पर मराठा शासक शाहूजी महाराज का शासन था. एक बार उनके चचेरे भाई और छत्रपति शिवाजी महाराज के पुत्र संभाजी महाराज वहां पहुंचे.

संभाजी महाराज को खाना बनाने का बहुत शौक था. एक दिन जब तंजावुर के मुख्य रसोइया नहीं आए तो संभाजी महाराज ने खुद खाना बनाना चाहा. वह महाराष्ट्र की मशहूर 'आमटी' (खट्टी-मीठी दाल) बनाना चाहते थे लेकिन बन गया सांभर.

दरअसल, आमटी बनाने के लिए मूंग की दाल और खटास के लिए कोकम (फल) की जरूरत होती है. किचन में उस समय ना ही कोकम मौजूद था और ना ही मूंग की दाल. ऐसे में संभाजी महाराज ने एक 'जुगाड़' निकाला और उन्होंने मूंग की जगह अरहर की दाल का इस्तेमाल किया. खटास के लिए उन्होंने कोकम की जगह इमली डाल दी.

उसके साथ कुछ सब्जियां और मसाले भी मिला दिए. जब यह डिश तैयार हुई तो इसका स्वाद लाजवाब था और इसे संभाजी महाराज के नाम पर 'सांभर' पुकारा जाने लगा.

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कर्नाटक का 'बिसी बेले भात' हो या तमिलनाडु का पारंपरिक मद्रासी सांभर, हर जगह सांभर को अलग-अलग तरीके से बनाया जाता है.

क्या कहते हैं इतिहासकार?

सांभर की उत्पत्ति को लेकर केवल एक ही कहानी नहीं है. के मुताबिक, कुछ खाद्य इतिहासकार इस दावे पर अलग राय रखते हैं. राइटर पी. थंगप्पन नायर जैसे एक्सपर्ट्स का कहना है कि दक्षिण भारत में दाल और इमली का मेल सदियों पुराना है. 1520 के आसपास के कन्नड़ साहित्य में 'सांवार' (Sānvār) शब्द का जिक्र मिलता है जो आज के सांभर जैसा ही था.

17वीं सदी में मराठा शासकों के तंजावुर आने से पहले भी वहां इमली वाली दालें मौजूद थीं. एक दूसरी थ्योरी यह भी है कि 'सांभर' शब्द तमिल के 'चंपारम' से निकला हो सकता है जिसका अर्थ होता है मसालों का मिश्रण. हालांकि, संभाजी महाराज वाली कहानी सबसे ज्यादा लोकप्रिय है और लोग इसे बड़े चाव से सुनाते हैं.

सांभर मसाला की महाराष्ट्रियन तकनीक

भी बताती है कि सांभर का आविष्कार वास्तव में तंजावुर के मराठा राजाओं की रसोई में हुआ था. यह महज एक संयोग था कि एक डिश बनाने के कारण, दूसरी डिश यानी सांभर तैयार हो गया था. यह डिश स्थानीय दक्षिण भारतीय सामग्रियों और मराठा पाक कला के मेल का सबसे अच्छा उदाहरण मानी जाती है. यही कारण है कि सांभर मसाले में जो भी मसाले इस्तेमाल होते हैं, उन्हें भूनने की तकनीक महाराष्ट्र के 'काला मसाला' से इंस्पायर दिखती है.

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हालांकि, सांभर को पहली बार कैसी भी बनाया गया हो लेकिन तंजावुर के मराठा राजाओं ने इस डिश को वो पहचान और नाम दिया, जो आज घर-घर में फेमस है. तो आप भी अपने घर में टेस्टी सांभर बनाएं और इसका लुत्फ उठाएं. 

 

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