Water Tank Insecticide Coating: विदेश में पानी की टंकी के अंदर लगा रहे एक खास परत, खर्चा होगा सिर्फ 200 रुपये, जानिए क्या है फायदा

डेंगू फैलाने वाले मच्छरों से बचाव को लेकर नई रिसर्च में खास कोटिंग को लेकर उम्मीद जगी है. कोलंबिया में पानी की टंकियों पर की गई इस कोटिंग से डेंगू के मामलों में 45 प्रतिशत ज्यादा कमी देखी गई. इसकी लागत करीब 170 रुपये सालाना बताई गई है और असर 12 महीने से ज्यादा रहा.

Advertisement
पानी की टंकी में मच्छर जल्दी पनपते हैं. (PHOTO:AI) पानी की टंकी में मच्छर जल्दी पनपते हैं. (PHOTO:AI)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 01 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:24 PM IST

Water Tank Insecticide Coating: बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ जाता है और इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए घरों में पानी की टंकियों और दूसरे कंटेनरों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इसकी वजह है कि डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर अक्सर घरों के आसपास जमा साफ पानी में पनपता है. अब वैज्ञानिकों ने मच्छरों के इन रिप्रोडक्शन की जगहों को ही निशाना बनाने का एक नया तरीका खोज निकाला है.

Advertisement

एक नई रिसर्च के मुताबिक, पानी की टंकियों पर लगाई गई खास कीटनाशक परत डेंगू के मामलों को कम करने में मदद कर सकती है और इसका असर 12 महीने तक बना रहता है. आइए आपको इस खास कीटनाशक परत के बारे में बताते हैं. 

जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ फ्रीबर्ग के मेडिकल रिसर्चर्स ने कोलंबिया में डेंगू को रोकने के लिए एक बेहद प्रभावी अध्ययन किया है. इस रिसर्च का मुख्य उद्देश्य डेंगू फैलाने वाले एडीज एजिप्टी मच्छरों के पनपने की जगहों (जैसे पानी की टंकियों और बर्तनों) पर एक खास कीटनाशक कोटिंग लगाकर डेंगू के संक्रमण को रोकना था. इस दोहरी कार्रवाई वाली तकनीक के नतीजों को 19 अगस्त 2026 को दुनिया के मशहूर मेडिकल जर्नल द लैंसेट इंफेक्शियस डिजीजेज में पब्लिश किया गया है. 

डेंगू के मामलों में 45 प्रतिशत ज्यादा कमी

रिसर्चर्स ने कोलंबिया के कुकुटा शहर के 20 शहरी इलाकों में रिसर्च किया. हर इलाके में करीब 1,600 से 2,000 घर शामिल थे. इन इलाकों में घरों के आसपास मौजूद पानी के उन कंटेनरों और टंकियों पर खास कीटनाशक परत लगाई गई, जहां एडीज एजिप्टी मच्छर के पनपने की संभावना ज्यादा थी.

Advertisement

एक साल बाद रिसर्चर्स ने पाया कि जिन इलाकों में पानी की टंकियों पर यह कोटिंग लगाई गई थी, वहां प्रति एक लाख लोगों पर 337 डेंगू के मामले सामने आए. वहीं जिन इलाकों में यह ट्रीटमेंट नहीं किया गया था, वहां यह संख्या 529 मामले प्रति एक लाख रही. रिसर्चर्स के मुताबिक, ट्रीटमेंट वाले इलाकों में डेंगू के मामलों में कंट्रोल वाले इलाकों की तुलना में 45 प्रतिशत ज्यादा कमी दर्ज की गई. घरों में मच्छरों के लार्वा और प्यूपा मिलने की संख्या भी कम हुई.

करीब 170 रुपये सालाना का खर्च

इस तकनीक की एक खास बात इसकी लागत है. शोधकर्ताओं के अनुसार, एक पानी की टंकी के लिए इस ट्रीटमेंट की सीधी लागत करीब 2 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 170 रुपये सालाना है. इस कोटिंग में मौजूद सूक्ष्म कैप्सूल धीरे-धीरे एक्टिव केमिकल छोड़ते हैं, जिससे इसका असर कई महीनों तक बना रहता है.

इसमें दो सक्रिय तत्व होते हैं. पहला वयस्क मच्छरों को खत्म करने और उनके अंडे देने की प्रक्रिया को रोकने में मदद करता है, जबकि दूसरा मच्छर के लार्वा और प्यूपा को विकसित होने से रोकता है. पहले किए गए सुरक्षा अध्ययनों में उपचारित कंटेनरों के पानी को इंसानों के लिए स्वास्थ्य जोखिम वाला नहीं पाया गया था.

Advertisement

मच्छरों के प्रजनन स्थल पर ही हमला

डेंगू नियंत्रण में इस तकनीक को इसलिए जरूरी माना जा रहा है क्योंकि यह उड़ते हुए मच्छरों के बजाय उनके प्रजनन स्थल को निशाना बनाती है. कोलंबिया में बड़े पानी के टब और कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल होने वाली टंकियां एडीज एजिप्टी के अहम प्रजनन स्थलों में शामिल हैं. दुनियाभर में हर साल अनुमानित 10 करोड़ से 40 करोड़ लोग डेंगू संक्रमण से प्रभावित होते हैं. ज्यादातर संक्रमण हल्के होते हैं, लेकिन गंभीर डेंगू जानलेवा हो सकता है.

क्या भारत में भी काम आएगी यह तकनीक?

रिसर्च के नतीजे उम्मीद जरूर जगाते हैं, लेकिन इसे भारत में तुरंत घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. कोलंबिया और भारत में मच्छरों की प्रजाति, मौसम, पानी रखने वाले कंटेनर और मच्छर नियंत्रण की व्यवस्था अलग है. शोधकर्ताओं ने भी माना है कि कोलंबिया के नतीजों को दूसरे देशों पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता.

भारत में इस्तेमाल से पहले इस तकनीक का स्थानीय परिस्थितियों में परीक्षण और संबंधित अधिकारियों से मंजूरी जरूरी होगी. फिलहाल डेंगू से बचाव के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने देना, पानी की टंकियों को ढककर रखना और कूलर व दूसरे पानी वाले कंटेनरों की नियमित सफाई करना सबसे जरूरी उपाय हैं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »