हिमाचल-पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों पुराना बिजली विवाद खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने तय किया फॉर्मूला

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों पुराने बिजली बंटवारे विवाद का समाधान कर दिया है. फैसले के मुताबिक, हिमाचल को अगले 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बंटवारे को लेकर तय की समयसीमा (Photo-ITG) सुप्रीम कोर्ट ने बिजली बंटवारे को लेकर तय की समयसीमा (Photo-ITG)

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 06 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:57 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों से चले आ रहे बिजली बंटवारे के विवाद का निपटारा कर दिया है. शीर्ष अदालत ने तय किया है कि हिमाचल प्रदेश को अगले 20 वर्षों में पंजाब और हरियाणा से कुल 11,973 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली मिलेगी. यह भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं में हिमाचल के 7.19% हिस्से का हिस्सा है.

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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने इन परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की मूल बिजली हिस्सेदारी 13066 मिलियन यूनिट आंकी थी. हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने आपसी विवाद को सुलझाते हुए 11,973 मिलियन यूनिट बिजली की आपूर्ति अगले 20 वर्षों में पूरी करने का रास्ता तय किया है.

इस समझौते में बांधों के निर्माण के दौरान हुए ऐतिहासिक खर्चों के समायोजन के लिए 420 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है. यह व्यवस्था नकद भुगतान पर आधारित नहीं होगी, बल्कि बिजली की हिस्सेदारी के माध्यम से इसका समायोजन किया जाएगा.

10-15 या 30 साल पर था विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने चुना 20 साल का रास्ता
बिजली की हिस्सेदारी लागू करने की समयसीमा को लेकर तीनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी. हिमाचल प्रदेश चाहता था कि उसे मिलने वाली बिजली का पूरा हिस्सा 10 वर्षों में उपलब्ध कराया जाए. वहीं, पंजाब ने इसके लिए 30 साल का समय मांगा था.

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मामले में अटॉर्नी जनरल ने 15 वर्षों की अवधि का सुझाव दिया था. सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकालते हुए 20 वर्षों की अवधि तय की. इससे हिमाचल प्रदेश को उसकी निर्धारित हिस्सेदारी चरणबद्ध तरीके से मिल सकेगी.

क्या है भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाओं का मामला?
भाखड़ा-नांगल और ब्यास परियोजनाएं उत्तर भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय जल और बिजली परियोजनाओं में शामिल हैं. इनसे पैदा होने वाली बिजली के बंटवारे को लेकर संबंधित राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. हिमाचल प्रदेश का दावा था कि इन परियोजनाओं में उसका 7.19 प्रतिशत हिस्सा बनता है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब बिजली की हिस्सेदारी और उसके समायोजन को लेकर विवाद के समाधान का रास्ता साफ हो गया है. अगले 20 वर्षों में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलने से हिमाचल प्रदेश को अपने निर्धारित हिस्से का लाभ मिलेगा.
 

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