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JSSC-CGL अभ्यर्थियों को दिवाली तोहफा! झारखंड हाईकोर्ट के फैसले से बचीं करीब 2000 नौकर‍ियां

झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL (विज्ञापन संख्या 10/2023) की पूरी परीक्षा को मास लेवल पर रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को बड़ा झटका देते हुए खारिज कर दिया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना आपराधिक अभियोजन के किसी को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता. इस ऐतिहासिक फैसले से लगभग 1,932 से 2,000 सफल अभ्यर्थियों की नौकरी सुरक्षित हो गई है.

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'झारखंड हाईकोर्ट से सफल अभ्यर्थियों को राहत': JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का सरकारी आदेश खारिज, बरकरार रहेगी नौकरी
'झारखंड हाईकोर्ट से सफल अभ्यर्थियों को राहत': JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का सरकारी आदेश खारिज, बरकरार रहेगी नौकरी

झारखंड के हजारों युवाओं और खासकर JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों के लिए यह किसी 'दीपावली गिफ्ट' से कम नहीं है. झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL Advertisement No. 10/2023) परीक्षा के मास कैंसिलेशन (बड़े पैमाने पर रद्दीकरण) के राज्य सरकार के फैसले को अवैध ठहराते हुए खारिज कर दिया है.

शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रमेश उरांव, आकाश गौरव और निरोज खेस समेत अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर यह बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया. अदालत के इस रुख के बाद अब लगभग 1,932 से 2,000 चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा टल गया है और वे झारखंड सरकार के साथ अपनी सेवाएं जारी रखेंगे.

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा?

अदालत ने सरकार के उस फैसले को आड़े हाथों लिया जिसके तहत पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया था. कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां इस प्रकार रहीं:

मास कैंसिलेशन गलत: अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरी परीक्षा या मास लेवल पर भर्ती प्रक्रिया को रद्द करना गलत है. केवल यह कहकर कि जांच में कुछ नई सामग्री या गिरफ्तारियां हुई हैं, सरकार पिछले न्यायिक फैसलों को निष्प्रभावी नहीं कर सकती.

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बिना क्रिमिनल ट्रायल बर्खास्तगी नहीं: कोर्ट ने साफ किया कि जब तक किसी अभ्यर्थी के खिलाफ आपराधिक अभियोजन (Criminal Prosecution) या दोष साबित नहीं हो जाता, तब तक किसी भी निर्दोष या सफल उम्मीदवार को उसकी नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता.

कार्यपालिका न्यायपालिका के विपरीत नहीं जा सकती: अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्यपालिका का कोई भी निर्णय न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विपरीत नहीं हो सकता. सरकार अदालतों के फैसलों को दरकिनार कर इस तरह के मनमाने कदम नहीं उठा सकती.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश और जांच का क्या रहेगा रुख?

सुनवाई के दौरान यह भी साफ किया गया कि सुप्रीम कोर्ट का इस मामले में जो निर्देश था, वह यथावत लागू रहेगा. इसका मतलब यह है कि जांच एजेंसी द्वारा यदि किसी विशेष उम्मीदवार को भ्रष्टाचार या गड़बड़ी में संलिप्त (गुनेगार) पाया जाता है, तो उसे भविष्य में रोजगार से जरूर प्रतिबंधित किया जाएगा.

हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि इस पूरे मामले की जांच पूरी निष्पक्षता और स्वतंत्र तरीके से तार्किक निष्कर्ष (Logical Conclusion) तक जारी रखी जानी चाहिए. अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच में तेजी लाई जाएगी और याचिकाकर्ता भी इसमें पूरा सहयोग करेंगे. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस अदालती आदेश से चल रही आपराधिक जांच पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

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कानूनी जंग में कौन-कौन रहा शामिल?

इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने पक्ष रखा, जबकि सफल अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, गोपाल शंकर नारायण, इंद्रजीत सिन्हा और अमरीश वत्स ने अदालत में दलीलें पेश कीं.

फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों चयनित युवाओं के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है जो लंबे समय से अनिश्चितता और तनाव के दौर से गुजर रहे थे. अदालत के इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि प्रशासनिक व्यवस्था में न्याय और कानून का शासन सर्वोपरि है, जहां सामूहिक कार्रवाई के नाम पर मेहनती युवाओं के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता.

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