जिस MiG-21 ने 1965 से कारगिल तक देखा युद्ध, अब छात्रों के सामने खड़ा रहेगा... NITK में पहुंचे 'आसमान के योद्धा' की कहानी

कभी भारतीय वायुसेना के साथ आसमान में उड़ने वाला MiG-21 अब कर्नाटक के सुरथकल स्थित NITK कैंपस में दिखाई देगा. छह दशक से ज्यादा समय तक देश की हवाई सुरक्षा का हिस्सा रहा यह रिटायर्ड फाइटर एयरक्राफ्ट अब छात्रों के लिए इतिहास, तकनीक और अनुशासन की मिसाल बनेगा. NITK के मेन बिल्डिंग के सामने खड़े इस विमान की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है.

Advertisement
कॉलेज कैंपस में पहुंचा फाइटर जेट. (Photo: ITG) कॉलेज कैंपस में पहुंचा फाइटर जेट. (Photo: ITG)

सगाय राज

  • मंगलुरु,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:54 PM IST

कभी आसमान में उड़कर देश की हवाई सुरक्षा का हिस्सा रहा MiG-21 अब कॉलेज कैंपस में खड़ा नजर आएगा. कर्नाटक के सुरथकल स्थित NITK के मेन बिल्डिंग के सामने रिटायर्ड MiG-21 ट्रेनर एयरक्राफ्ट को खड़ा किया गया है. यह वही विमान है, जिसने भारतीय वायुसेना के साथ छह दशक से ज्यादा का सफर तय किया. अब इसका नया ठिकाना NITK है, जहां इसे देखकर छात्र सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के इतिहास और तकनीक को करीब से समझ सकेंगे.

Advertisement

वही MiG-21, जिसने भारतीय वायुसेना के साथ छह दशक से ज्यादा लंबा सफर तय किया. जिसने देश की हवाई सुरक्षा में अपनी भूमिका निभाई. 1965 का युद्ध देखा. 1971 का युद्ध देखा. और 1999 के कारगिल युद्ध के दौर का भी हिस्सा रहा. अब वही विमान आसमान में नहीं उड़ेगा. अब वह छात्रों के सामने खड़ा रहेगा. 6 अक्टूबर को NITK में इस रिटायर्ड MiG-21 ट्रेनर एयरक्राफ्ट का अनावरण किया गया.

कार्यक्रम में NITK बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन एमएम मुरुगप्पन, दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चौटा और NITK के निदेशक प्रोफेसर बी. रवि समेत कई लोग मौजूद रहे. वायुसेना के जवान और पूर्व सैनिक भी पहुंचे. NCC कैडेट्स थे. कॉलेज के शिक्षक, छात्र और पूर्व छात्र भी इस मौके पर मौजूद रहे. जिस विमान ने कभी आसमान में अपनी भूमिका निभाई, उसके कैंपस में पहुंचने का मौका भी खास तरीके से मनाया गया.

Advertisement

आखिर इस MiG-21 को NITK तक लाया कैसे गया? इसकी कहानी करीब दो साल पीछे जाती है. दिसंबर 2023 में NITK ने भारतीय वायुसेना से संपर्क किया था. संस्थान चाहता था कि कोई रिटायर्ड विमान कैंपस में लगाया जाए, ताकि छात्रों को सैन्य विमानन, तकनीक और देश की रक्षा से जुड़े इतिहास को करीब से समझने का मौका मिल सके. जनवरी 2026 में भारतीय वायुसेना ने NITK को विमान अलॉट कर दिया.

यह भी पढ़ें: वायु सेना को मिलेंगे 160 SAT-SAAW बम, जगुआर-Su-30MKI जैसे फाइटर जेट में होंगे तैनात

इसके बाद अगला काम था इसे कैंपस तक पहुंचाना. जुलाई में विमान के अलग-अलग हिस्से NITK परिसर में लाए गए. अगस्त में भारतीय वायुसेना की एक टीम ने इन हिस्सों को दोबारा जोड़कर विमान को तैयार किया. फिर सितंबर में इसे कैंपस में खड़ा कर दिया गया. अब अक्टूबर में इसे औपचारिक तरीके से इसे पेश कर दिया गया. यानी विमान को यहां खड़ा करने का काम सिर्फ क्रेन से उठाकर रखने जितना आसान नहीं था. इसके पीछे महीनों की तैयारी रही.

यह MiG-21 का ट्विन-सीट ट्रेनर वेरिएंट है. इसमें दो सीटें आगे-पीछे यानी tandem configuration में होती हैं. विमान में R-13 turbojet इंजन इस्तेमाल किया गया था. इसका delta-wing डिजाइन इसे खास बनाता था. विमान को अच्छी manoeuvrability और stability के लिए जाना जाता था.

Advertisement

जरूरत के मुताबिक यह external gun pod और wings के नीचे bombs भी ले जा सकता था. अब इस विमान के सामने खड़े छात्रों के लिए ये सब सिर्फ किताब में पढ़ी गई तकनीकी जानकारी नहीं होगी. विमान उनके सामने होगा. उसका आकार. उसका डिजाइन. उसकी cockpit configuration. और उसके पीछे छिपी छह दशक से ज्यादा की कहानी.

भारतीय वायुसेना में MiG-21 की एंट्री 1963 में हुई थी. इसके बाद यह भारतीय सैन्य विमानन के इतिहास का एक अहम हिस्सा बन गया. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने 1966 में नासिक में इसका लाइसेंस के तहत निर्माण शुरू किया. धीरे-धीरे MiG-21 भारतीय वायुसेना के सबसे पहचाने जाने वाले लड़ाकू विमानों में शामिल हो गया. दशकों तक इसकी अलग-अलग भूमिकाएं रहीं. इसने कई पीढ़ियों के पायलटों के साथ उड़ान भरी.

और आखिरकार सितंबर 2025 में भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल बेड़े से MiG-21 की विदाई हो गई. लेकिन रिटायरमेंट का मतलब कहानी का अंत नहीं था. क्योंकि अब इसका एक नया अध्याय शुरू हुआ है. आसमान से उतरकर क्लासरूम के सामने. NITK के मेन बिल्डिंग के पीछे एक turboshaft engine भी लगाया गया है. संस्थान के मुताबिक, MiG-21 और इस इंजन का इस्तेमाल छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने में किया जाएगा. खासकर NADAL, NCC और दूसरे कार्यक्रमों से जुड़े छात्रों के लिए.

Advertisement

NITK में NADAL से जुड़े प्रोफेसर-इन-चार्ज डॉ. श्रीनिवास राव कोला के मुताबिक, संस्थान ने विमान के लिए 2023 में भारतीय वायुसेना से संपर्क किया था और पूरी प्रक्रिया के बाद इसे कैंपस में स्थापित किया गया. दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चौटा ने भी उम्मीद जताई कि यह विमान युवाओं को सैन्य सेवा से जुड़े मूल्यों, अनुशासन और अवसरों के बारे में जानने के लिए इंस्पायर करेगा. और शायद यही इस विमान की नई भूमिका भी है. पहले यह पायलट को आसमान तक ले जाता था. अब यह छात्रों को इतिहास, तकनीक और देशसेवा के बारे में सोचने के लिए इंस्पायर करेगा.

एक समय था जब MiG-21 की आवाज आसमान में सुनाई देती थी. अब इसकी मौजूदगी NITK के कैंपस में दिखाई देगी. उसके पंख नहीं चलेंगे. इंजन नहीं गरजेगा. लेकिन उसके आसपास से गुजरने वाला हर छात्र शायद एक बार जरूर रुकेगा. और जब वह इस विमान को देखेगा, तो उसे सिर्फ धातु से बना एक पुराना लड़ाकू विमान नहीं दिखाई देगा. उसे दिखाई देगा छह दशक से ज्यादा का सैन्य इतिहास. 1965 से 1971 तक का दौर. 1999 का कारगिल युद्ध. भारतीय वायुसेना की कई पीढ़ियां. और फिर सितंबर 2025 की विदाई. आसमान के इस पुराने योद्धा ने अपनी उड़ान पूरी कर ली है. लेकिन NITK में खड़ा होकर उसकी कहानी अब भी चलती रहेगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »