क्यों एक जैसा खाना नहीं खा सकते हैं प्लेन के पायलट्स? ये है वजह

क्या आप जानते हैं प्लेन के पायलट एक जैसा खाना नहीं खा सकते हैं. दोनों पायलट को अलग अलग खाना दिया जाता है. तो जानते हैं आखिर ऐसा करने के पीछे क्या वजह है?

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एक प्लेन के दोनों पायलट्स को अलग अलग फूड खाना होता है. (Photo: Pexels) एक प्लेन के दोनों पायलट्स को अलग अलग फूड खाना होता है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 07 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:37 AM IST

क्या आप जानते हैं जब भी एक प्लेन में दो पायलट होते हैं तो उन्हें एक जैसा खाने की परमिशन नहीं होती है. प्लेन के फ्लाइंग स्टाफ को अलग-अलग फूड खाना होता है. लेकिन, यह पायलट और को पायलट की पंसद का मामला नहीं हैं, बल्कि ये प्रोटोकॉल है, जिसे सभी फॉलो करते हैं. अब सवाल है कि अगर ऐसा है तो फिर ऐसे प्रोटोकॉल की वजह क्या है. आखिर क्यों स्टाफ को एक जैसा खाना नहीं खाने दिया जाता है...

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एविएशन इंडस्ट्री में फ्लाइंग स्टाफ को अलग-अलग खाना देना एक आम प्रोसेस है. रीडर डाइजेस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेवादा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और कमर्शियल पायलट रहे डैन बब ने बताया कि कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर अलग-अलग भोजन करते हैं. इसकी वजह ये है कि अगर उनमें से किसी एक की तबीयत खाने की वजह से होती है तो दूसरा पायलट प्लेन को सुरक्षित रूप से कंट्रोल कर सके. उन्होंने बताया कि किस पायलट को कौन-सा खाना मिलेगा और वह उसे कब खाएगा, इसका अंतिम निर्णय कैप्टन का होता है. प्लेन में यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा से जुड़ी किसी भी घटना की जिम्मेदारी कैप्टन की होती है. 

1982 में सामने आया था गंभीर मामला

अगस्त 1982 में लिस्बन से बोस्टन जा रहे एक विमान में खाने से जुड़ी एक गंभीर स्थिति सामने आई थी. प्लेन में मौजूद 10 में से 8 क्रू सदस्यों ने खराब टैपिओका पुडिंग खा ली थी. इसके बाद उन्हें अचानक पेट में ऐंठन और दर्द होने लगा और फूड पॉइजनिंग की वजह से तबीयत खराब हो गई. वहीं, को-पायलट ने ये पुडिंग नहीं खाई थी और उनकी तबीयत ठीक रही. इसी तरह की घटनाओं से हर एयरलाइंस ने इस प्रोटोकॉल को अपनाया. 

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अब पायलट्स को आमतौर पर यात्रियों को परोसे जाने वाले भोजन से भी अलग खाना खाते हैं. 1982 की घटना में विमान में मौजूद 250 यात्रियों में से कोई भी बीमार नहीं हुआ था, क्योंकि चालक दल ने यात्रियों को केबिन में परोसे गए भोजन से अलग भोजन किया था. हालांकि, क्रू स्टाफ का खाना खराब हो चुका था, जिस वजह से ऐसा हुआ. 

ऐसे में उड़ान 45 मिनट की हो या 12 घंटे की, पायलटों के भोजन को लेकर मूल सिद्धांत एक जैसा रहता है. छोटी उड़ानों में भोजन न होने पर पायलट अक्सर अपना खाना साथ लेकर आते हैं. ऐसे में भी यह ध्यान रखा जाता है कि दोनों पायलट एक ही संभावित रूप से खराब खाना न खाएं. पायलट ड्यूटी खत्म होने के बाद अपनी पसंद का भोजन खा सकते हैं. 

फिनलैंड की एयरलाइन फिनएयर के एक प्रवक्ता के अनुसार, लंबी दूरी की उड़ानों में केबिन क्रू को यात्रियों को परोसे जाने वाले बिजनेस क्लास के समान भोजन मिल सकता है. वहीं, कैप्टन और फर्स्ट ऑफिसर को फ्लाइट अटेंडेंट से अलग और एक-दूसरे से भी अलग भोजन दिया जाता है. 
 

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