हम जिन शंखों को घर में सजाते हैं या पूजा के समय बजाते हैं, वो कभी एक जीवित समुद्री जीव का बाहरी खोल हुआ करता था. शंख असल में एक समुद्री घोंघे का बाहरी खोल होता है. यह जीव गैस्ट्रोपोडा वर्ग का हिस्सा है और समुद्र के गर्म पानी वाले इलाकों में रहता है.
जब यह जीव जिंदा होता है, तब उसका नरम शरीर पूरी तरह शंख के अंदर सुरक्षित रहता है. बाहर से हमें सिर्फ उसका कठोर खोल दिखाई देता है. यही खोल समय के साथ बड़ा होता जाता है और जीव को समुद्री शिकारी जीवों से बचाता है.
शंख के अंदर कैसा दिखता है जीव?
अगर आपने कभी जिंदा शंख देखा हो, तो उसके मुंह से एक नरम, मांसल हिस्सा बाहर निकलता दिखाई देगा. इसी की मदद से वह समुद्र की रेत और चट्टानों पर धीरे-धीरे चलता है. खतरा महसूस होने पर वह तुरंत अपने पूरे शरीर को खोल के अंदर समेट लेता है.
यानी पूजा में इस्तेमाल होने वाला शंख कभी एक जिंदा समुद्री जीव का बाहरी कठोर हिस्सा था. जीव के मरने के बाद उसका खोल समुद्र में रह जाता है, जिसे बाद में लोग इकट्ठा कर लेते हैं.
सबसे मशहूर है क्वीन कॉन्क या रानी शंख
दुनिया में शंख की कई प्रजातियां हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध क्वीन कॉन्क होती है. यह फ्लोरिडा, बहामास, बरमूडा और कैरेबियन सागर से लेकर ब्राजील तक के समुद्री इलाकों में पाई जाती है. इसका खोल काफी बड़ा और आकर्षक होता है. इसके खोल का मुंह गुलाबी रंग का होता है और इसकी लंबाई करीब 30 सेंटीमीटर तक पहुंच सकती है. कुछ प्रजातियों के शंखों के किनारों पर कांटे जैसे उभरे हुए हिस्से होते हैं, जिन्हें स्पाइडर कॉन्क कहा जाता है.
क्या खाया भी जाता है शंख?
जी हां, कैरेबियन देशों में शंख के मांस को बड़े स्वाद से खाया जाता है. वहां से इसका मांस अमेरिका, यूरोप और दक्षिण अमेरिका तक एक्सपोर्ट किया जाता है. वहीं इसके खूबसूरत खोल की वजह से दुनिया भर के लोग इन्हें संग्रह में भी रखते हैं.
हालांकि, जरूरत से ज्यादा शिकार होने की वजह से कई इलाकों में इनकी संख्या तेजी से घट गई है. यही कारण है कि अब इन्हें व्यावसायिक स्तर पर पालने की तकनीक विकसित करने पर भी काम हो रहा है.
आखिर खाते क्या हैं ये जीव?
शंख शाकाहारी होते हैं. यह समुद्र की तलहटी पर उगने वाली काई यानी शैवाल और दूसरे छोटे-छोटे समुद्री पौधों को खाता है. इसलिए यह समुद्र के इकोसिस्टम का भी एक अहम हिस्सा माना जाता है.
समुद्र में शंख पूरी तरह सुरक्षित नहीं होते. इसे कई समुद्री जीव अपना शिकार बनाते हैं. इनमें लॉगरहेड कछुआ, नर्स शार्क, कुछ दूसरी घोंघा प्रजातियां, ब्लू क्रैब, ईगल रे, स्पाइनी लॉब्स्टर और दूसरे क्रस्टेशियन शामिल हैं.
एक साथ हजारों नर और मादा शंख आपस में मिलकर प्रजनन करते हैं.मादा एक बार में रेत के भीतर लाखों छोटे अंडे देती है. करीब पांच दिन बाद इनसे लार्वा निकलते हैं. ये समुद्री धाराओं के साथ लगभग एक महीने तक बहते रहते हैं. इसके बाद समुद्र की तलहटी पर अच्छी जगह मिलने पर बस जाते हैं.
जन्म के बाद पहले एक साल तक यह जीव दिन में रेत के नीचे छिपा रहता है और रात होने पर बाहर निकलकर भोजन करता है. इससे वह शिकारी जीवों से बचा रहता है.
कितनी होती है उम्र?
एक शंख को पूरी तरह वयस्क बनने में कम से कम पांच साल लग जाते हैं. इसी समय उसके खोल का किनारा मजबूत और चौड़ा हो जाता है. 5 साल बाद ही वह प्रजनन करने योग्य बनता है. इनकी औसत उम्र करीब सात साल होती है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में कुछ शंख 20 से 30 साल तक भी जीवित रह सकते हैं.
शंख में मोती भी बनते हैं
बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ शंखों की प्रजातियां प्राकृतिक मोती भी बनाते हैं. इनके मोती सफेद, भूरे, नारंगी और गुलाबी जैसे कई रंगों में मिलते हैं. खास तौर पर गुलाबी कॉन्क पर्ल दुनिया के सबसे दुर्लभ और कीमती प्राकृतिक मोतियों में गिने जाते हैं.
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यानी अगली बार जब आप पूजा में शंख बजाएं, तो यह जरूर याद रखें कि यह सिर्फ समुद्र का एक खाली खोल नहीं है. कभी इसके अंदर एक जीवित समुद्री घोंघा रहता था, जिसने सालों तक इसी खोल को अपना घर बनाकर समुद्र की दुनिया में जीवन बिताया.
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