जब किसी जहाज ने दुनिया पहली परिक्रमा पूरी की, ऐसे बना था रिकॉर्ड

आज के दिन ही एक जहाज ने पहली बार पूरी दुनिया का चक्कर लगाने का रिकॉर्ड कायम किया था. करीब 500 साल पहले तब पूरी दुनिया का चक्कर लगाने में 3 साल लगे थे.

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इस जहाज ने 500 साल पहले पहली बार पूरी दुनिया का चक्कर लगाया था (Photo - AI Generated) इस जहाज ने 500 साल पहले पहली बार पूरी दुनिया का चक्कर लगाया था (Photo - AI Generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST

6 सितंबर 1522 में फर्डिनेंड मैगलन के पांच जहाजों में से एक, विक्टोरिया, स्पेन के सैनलुकार डी बरमेडा पहुंचा. इस तरह यह जहाज ने विश्व की पहली परिक्रमा पूरी की. विक्टोरिया जहाज का नेतृत्व बास्क नाविक जुआन सेबेस्टियन डी एल्कानो ने किया था. इन्होंने अप्रैल 1521 में फिलीपींस में मैगलन की मृत्यु के बाद जहाज की कमान संभाली थी. घर वापसी की लंबी और कठिन यात्रा के दौरान, जहाज पर सवार लोगों को भुखमरी, स्कर्वी रोग और पुर्तगाली जहाजों के उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. केवल एल्कानो और 21 अन्य यात्री ही सितंबर 1522 में स्पेन पहुंचने में सफल रहे.

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20 सितंबर, 1519 को, मैगलन ने इंडोनेशिया के समृद्ध मसाला द्वीपों तक पश्चिमी समुद्री मार्ग खोजने के प्रयास में स्पेन से प्रस्थान किया. पांच जहाजों और 270 सैनिकों के साथ मैगलन पश्चिम अफ्रीका और फिर ब्राजील गए. जहां उन्होंने दक्षिण अमेरिकी तट पर प्रशांत महासागर तक ले जाने वाले जलडमरूमध्य की खोज की. 

उन्होंने ब्राजील के दक्षिण में स्थित एक विशाल मुहाना, रियो डी ला प्लाटा में मार्ग की तलाश की. असफल होने पर, वे पेटागोनिया के तट के साथ दक्षिण की ओर बढ़ते रहे. मार्च 1520 के अंत में, अभियान दल ने सेंट जूलियन बंदरगाह पर शीतकालीन शिविर बनाया.  ईस्टर के दिन आधी रात को, स्पेनिश कप्तानों ने अपने पुर्तगाली कप्तान के खिलाफ विद्रोह कर दिया, लेकिन मैगलन ने विद्रोह को कुचल दिया.

एक कप्तान को फांसी दे दी और दूसरे को अगस्त में सेंट जूलियन से अपने जहाज के रवाना होने पर किनारे पर छोड़ दिया. 21 अक्टूबर को, आखिरकार उन्हें वह जलडमरूमध्य मिल गया जिसकी उन्हें तलाश थी.  मैगलन जलडमरूमध्य (स्ट्रेट), जैसा कि यह बाद में जाना गया. दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी छोर के पास स्थित है, जो टिएरा डेल फ़्यूगो और मुख्य भूभाग को अलग करता है.

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 केवल तीन जहाज ही इस जलडमरूमध्य में प्रवेश कर पाए. एक जहाज क्षतिग्रस्त हो गया था और दूसरा खाली पड़ा था. इस खतरनाक स्ट्रेट  को पार करने में 38 दिन लगे, और जब दूसरी ओर समुद्र दिखाई दिया तो मैगलन खुशी से रो पड़े. वह अटलांटिक महासागर से प्रशांत महासागर तक पहुंचने वाले पहले यूरोपीय खोजकर्ता थे. उनके बेड़े ने 99 दिनों में पश्चिम की ओर समुद्र को पार किया और इतने शांत पानी को पार किया कि इस समुद्र का नाम 'प्रशांत' रखा गया, जो लैटिन शब्द pacificus से लिया गया है. इसका अर्थ है शांत होता है. 

अंत तक, उनके पास भोजन खत्म हो गया था और उन्होंने खुद को जीवित रखने के लिए अपने साजो-सामान के चमड़े के हिस्सों को चबाया. 6 मार्च, 1521 को, अभियान दल गुआम द्वीप पर उतरा. दस दिन बाद, उन्होंने फिलीपींस के सेबू द्वीप पर लंगर डाला - वे स्पाइस आइलैंड्स से लगभग 400 मील दूर थे.

 मैगलन ने सेबू के मुखिया से मुलाकात की, जिसने ईसाई धर्म अपनाकर यूरोपियों को पड़ोसी द्वीप मक्टान पर एक प्रतिद्वंद्वी जनजाति को जीतने में सहायता करने के लिए राजी किया. 27 अप्रैल को हुई लड़ाई में, मैगलन को एक  विषैले तीर से चोट लगी और पीछे हटते हुए उनके साथियों ने उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया.

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मैगलन की मृत्यु के बाद, बचे हुए लोग दो जहाजों में मोलुकास द्वीप समूह के लिए रवाना हुए और जहाजों में मसाले भर लिए. एक जहाज ने प्रशांत महासागर पार करके लौटने का असफल प्रयास किया. दूसरा जहाज, विक्टोरिया, जुआन सेबेस्टियन डी एल्कानो की कमान में पश्चिम की ओर बढ़ता रहा.  यह जहाज हिंद महासागर पार करते हुए केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाकर 6 सितंबर, 1522 को स्पेन के सैनलुकार डी बरमेडा बंदरगाह पर पहुंचा और विश्व का चक्कर लगाने वाला पहला जहाज बन गया. इसके बाद विक्टोरिया ग्वाडलक्विविर नदी में आगे बढ़ते हुए कुछ दिनों बाद सेविले पहुंचा.

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