क्या बारिश में छाता लेकर चलने से लगता है करंट?

बारिश में छाता हमें भीगने से बचाता है, लेकिन जब आसमान में तेज गरज के साथ बिजली चमक रही हो, तो खुले में छाता लेकर निकलना जोखिम भरा हो सकता है. खासकर मेटल वाले छाते को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

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अगर बारिश के साथ तेज बिजली चमक रही है, तो कोशिश करें कि घर से बाहर न निकलें. ( Photo: ITG) अगर बारिश के साथ तेज बिजली चमक रही है, तो कोशिश करें कि घर से बाहर न निकलें. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:05 PM IST

बारिश के मौसम में घर से निकलते ही सबसे पहले छाता याद आता है. बारिश तेज हो तो लोग सड़क से लेकर रेलवे स्टेशन तक छाता खोलकर चलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेलवे ट्रैक के पास छाता खोलना आपकी जान के लिए खतरा बन सकता है? खासकर अगर आपके छाते में मेटल का फ्रेम या लंबी मेटल की रॉड लगी हो. यहां खतरा सिर्फ बारिश, फिसलन या ट्रेन की चपेट में आने का नहीं है, बल्कि ऊपर दौड़ रही हाई वोल्टेज बिजली का भी है.

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भारत में बड़ी संख्या में रेलवे लाइनें इलेक्ट्रिफाइड हैं. इन लाइनों पर ट्रेनों को बिजली देने के लिए ट्रैक के ऊपर ओवरहेड इलेक्ट्रिक तार लगाए जाते हैं. इन तारों में करीब 25,000 वोल्ट यानी 25 किलोवोल्ट तक का वोल्टेज हो सकता है. इतनी ज्यादा बिजली इंसान के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है.

ट्रैक के पास बिजली का खतरा कैसे बढ़ जाता है?
आमतौर पर लोगों को लगता है कि बिजली का झटका तभी लगेगा, जब शरीर सीधे बिजली के तार को छू ले. लेकिन रेलवे की हाई वोल्टेज लाइन में ऐसा जरूरी नहीं है. बहुत ज्यादा वोल्टेज होने की वजह से बिजली कुछ दूरी तक हवा के जरिए भी आर्क कर सकती है. यानी बिना सीधे तार को छुए भी करंट खतरनाक तरीके से शरीर या किसी धातु की वस्तु तक पहुंच सकता है. यही वजह है कि रेलवे के ओवरहेड तारों से सुरक्षित दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. ट्रैक के आसपास मौजूद कोई लंबी या मेटल की वस्तु इस खतरे को और बढ़ा सकती है.

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मेटल वाला छाता क्यों बन सकता है खतरा?
बारिश में इस्तेमाल होने वाले कई छातों में मेटल की रॉड और फ्रेम लगा होता है. जब कोई व्यक्ति रेलवे ट्रैक के पास ऐसा छाता खोलकर खड़ा होता है और छाता ऊपर की ओर जाता है, तो वह हाई वोल्टेज तारों के ज्यादा करीब पहुंच सकता है. ऐसे में अगर पर्याप्त दूरी नहीं है तो बिजली हवा के जरिए आर्क कर सकती है. यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है.

करंट छाते के मेटल हिस्से से होते हुए व्यक्ति के शरीर तक पहुंच सकता है और गंभीर इलेक्ट्रिक शॉक लग सकता है. इलेक्ट्रिक शॉक की स्थिति में व्यक्ति को तेज झटका, हाथ-पैर में झुनझुनी, मांसपेशियों में खिंचाव या अचानक सुन्नपन महसूस हो सकता है. ज्यादा वोल्टेज के संपर्क में आने पर जलने, गिरने और गंभीर चोट लगने का खतरा भी रहता है.

यह समझना जरूरी है कि रेलवे ट्रैक के पास छाता अपने आप में बिजली पैदा नहीं करता. असली खतरा हाई वोल्टेज ओवरहेड लाइन और उससे पर्याप्त दूरी न बनाए रखने का है. मेटल का छाता इस दूरी को कम कर सकता है और बिजली के आर्किंग के खतरे को बढ़ा सकता है. इसीलिए रेलवे ट्रैक, प्लेटफॉर्म के किनारे या ओवरहेड इलेक्ट्रिक तारों के नीचे खड़े होकर छाता ऊपर उठाने से बचना चाहिए. खासतौर पर ट्रैक पार करने, लाइन के पास जाने या किसी वजह से रेलवे परिसर में खड़े होने के दौरान अतिरिक्त सावधानी जरूरी है.

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बारिश में रेलवे स्टेशन पर क्या सावधानी रखें?
बारिश के दौरान रेलवे स्टेशन पर हमेशा निर्धारित पैदल रास्ते और फुटओवर ब्रिज का इस्तेमाल करें. रेलवे ट्रैक को शॉर्टकट के तौर पर पार करने की कोशिश बिल्कुल न करें. प्लेटफॉर्म पर भी ओवरहेड बिजली के तारों के नीचे किसी लंबी वस्तु को ऊपर उठाने से बचें. अगर छाता इस्तेमाल करना जरूरी है तो उसे रेलवे ट्रैक या हाई वोल्टेज तारों के पास ऊपर उठाने से बचें. सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि रेलवे की इलेक्ट्रिफाइड लाइन से दूरी बनाए रखें और रेलवे द्वारा तय किए गए रास्तों और सुरक्षा नियमों का पालन करें.

बारिश में छाता हमें पानी से बचाता है, लेकिन रेलवे ट्रैक के पास यही छाता, खासकर मेटल फ्रेम वाला छाता, अगर हाई वोल्टेज तारों के बहुत करीब पहुंच जाए तो बड़ा खतरा बन सकता है. इसलिए अगली बार रेलवे स्टेशन पर बारिश हो तो छाता खोलने से पहले सिर्फ पानी से बचने के बारे में नहीं, बल्कि ऊपर मौजूद बिजली के तारों के बारे में भी जरूर सोचें.

प्लास्टिक हैंडल वाला छाता क्या सुरक्षित है?
प्लास्टिक बिजली को आसानी से अपने अंदर से नहीं जाने देता. इसलिए प्लास्टिक का हैंडल कुछ हद तक मदद कर सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्लास्टिक हैंडल वाला छाता बिजली के समय पूरी तरह सुरक्षित है. अगर बाहर तेज बिजली चमक रही है, तो सबसे अच्छा यही है कि आप छाता लेकर खुले में न रहें. किसी पक्के घर, दुकान या दूसरी सुरक्षित इमारत के अंदर चले जाएं. याद रखें, छाते का हैंडल चाहे प्लास्टिक का हो या किसी और चीज का, बिजली चमकने के समय खुले में रहना सुरक्षित नहीं माना जाता.

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पेड़ के नीचे भी न खड़े हों
कई लोग बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े हो जाते हैं. लेकिन बिजली चमकने के समय ऐसा करना भी खतरनाक हो सकता है. बिजली पेड़ पर गिर सकती है और उसके आसपास मौजूद लोगों को नुकसान पहुंच सकता है. इसलिए बिजली चमकने पर पेड़, बिजली के खंभे और खुले मैदान से दूर रहना चाहिए. अगर आप किसी सड़क पर हैं, तो किसी सुरक्षित दुकान या पक्की इमारत में चले जाएं. अगर आसपास कोई सुरक्षित जगह नहीं है, तो खुले इलाके में ज्यादा देर तक खड़े रहने के बजाय सुरक्षित जगह तलाश करना बेहतर है.

बिजली चमके तो क्या करें?
अगर बारिश के साथ तेज बिजली चमक रही है, तो कोशिश करें कि घर से बाहर न निकलें. अगर आप पहले से बाहर हैं, तो जल्द से जल्द किसी पक्की इमारत के अंदर चले जाएं. खिड़की, दरवाजे और बिजली के उपकरणों से भी दूरी रखना बेहतर है. सिर्फ छाता खोल लेने से आप बिजली से सुरक्षित नहीं हो जाते. ऐसे मौसम में सबसे जरूरी है कि आप खुले स्थान से दूर रहें और सुरक्षित जगह पर चले जाएं. एक और जरूरी बात यह है कि बिजली चमकते समय मोबाइल फोन इस्तेमाल करने को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं. असली खतरा मोबाइल फोन से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहां खड़े हैं. अगर आप खुले मैदान में हैं, तो फोन से ज्यादा जरूरी है कि आप सुरक्षित जगह पर पहुंचे.

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मौसम देखकर ही निकलें
इसलिए अगली बार बारिश में बाहर निकलते समय सिर्फ छाता ही नहीं, मौसम भी जरूर देखें. अगर हल्की बारिश है तो छाता लेकर जाना ठीक है. लेकिन अगर तेज गरज और बिजली चमक रही है, तो बाहर रहने से बचना ही सबसे समझदारी वाली बात है. बारिश में थोड़ी देर रुक जाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन बिजली चमकने के दौरान खुले में खड़े होकर खतरा मोल लेना सही नहीं. सुरक्षित जगह पर पहुंचना ही सबसे अच्छा बचाव है. याद रखें, छाता आपको बारिश से बचा सकता है, लेकिन बिजली से बचने के लिए सुरक्षित जगह पर जाना ज्यादा जरूरी है.

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