ट्रेन की ₹500 वाली टिकट देखकर क्या आपको लगता है कि रेलवे को पूरे ₹500 मिलते हैं? अगर हां, तो यह जानकर हैरानी होगी कि टिकट की पूरी रकम यात्री से नहीं वसूली जाती. रेलवे खुद भी आपकी यात्रा की लागत का एक बड़ा हिस्सा उठाता है. सरकार ने लोकसभा में बताया है कि यात्रियों के टिकट किराए पर लगभग 43 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है. यानी आप जिस टिकट के लिए ₹500 देते हैं, उसके पीछे रेलवे की तरफ से भी अच्छी-खासी रकम खर्च की जाती है.
अब सवाल है कि ₹500 की टिकट पर रेलवे अपनी तरफ से कितने रुपये खर्च करता है और आखिर इस सब्सिडी का पूरा हिसाब क्या है? रेलवे ने इसका जवाब लोकसभा में दिया है. वित्त वर्ष 2024-25 में यात्रियों को किराए में कुल करीब ₹60,239 करोड़ की सब्सिडी दी गई.
₹500 की टिकट का आसान हिसाब समझिए
तो चलिए इसे आसान भाषा में समझते हैं. मान लीजिए आपने ट्रेन की टिकट के लिए ₹500 दिए. रेलवे के मुताबिक, यात्री किराया रेलवे को होने वाली यात्रा की पूरी लागत का करीब 57 फीसदी होता है, जबकि बाकी 43 फीसदी लागत रेलवे सब्सिडी के तौर पर खुद खर्च करता है. यानी अगर किसी यात्री से टिकट के लिए ₹500 लिए गए, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उस यात्री को ट्रेन में सफर कराने की पूरी लागत सिर्फ ₹500 है. अगर ₹500 को 57 फीसदी किराया माना जाए, तो ट्रेन में उस यात्रा को उपलब्ध कराने की वास्तविक लागत करीब ₹877 बैठती है. इसमें से लगभग ₹500 यात्री देता है और करीब ₹377 रेलवे सब्सिडी के तौर पर खर्च करता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो ₹500 की टिकट पर औसतन करीब ₹377 की सब्सिडी का हिसाब बनता है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह सिर्फ एक आसान उदाहरण है. 43 फीसदी सब्सिडी का आंकड़ा पूरे यात्री किराए के औसत पर आधारित है. हर ट्रेन, हर रूट, हर क्लास और हर टिकट पर सब्सिडी की रकम बिल्कुल ₹377 ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है.
रेलवे ने खुद बताया पूरा फार्मूला
रेलवे ने अपने जवाब में कहा कि अगर किसी यात्री को ट्रेन से सफर कराने में ₹100 की लागत आती है, तो यात्री से टिकट के रूप में सिर्फ ₹57 लिए जाते हैं. बाकी ₹43 रेलवे की ओर से सब्सिडी के रूप में वहन किए जाते हैं. इसी फॉर्मूले को ₹500 की टिकट पर लगाएं तो तस्वीर आसानी से समझ आती है. यात्री द्वारा दिए गए ₹500, कुल लागत के 57 फीसदी के बराबर माने जाएं तो रेलवे की तरफ से करीब ₹377 की अतिरिक्त लागत वहन की जाती है. यानी यात्री को ट्रेन यात्रा की वास्तविक लागत के मुकाबले काफी कम रकम में सफर करने का मौका मिलता है.
एक साल में ₹60 हजार करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी
रेलवे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में यात्री टिकटों पर करीब ₹60,239 करोड़ की सब्सिडी दी गई. रेलवे का कहना है कि यह सब्सिडी सभी यात्रियों को दी जाती है. इसका मतलब है कि रेलवे सिर्फ कुछ खास वर्ग के यात्रियों को ही राहत नहीं देता, बल्कि सामान्य यात्रियों को भी टिकट किराए में इस सब्सिडी का फायदा मिलता है.
रेलवे ने अपने जवाब में वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग यात्रियों और दूसरी श्रेणियों के यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं का भी जिक्र किया. यानी रेलवे की ओर से यात्रियों को किराए में राहत के साथ-साथ कई तरह की अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं.
तो ₹500 की टिकट पर कितनी सब्सिडी?
सीधे और आसान शब्दों में समझें तो अगर ₹500 की टिकट को उदाहरण मानें, तो 43 फीसदी सब्सिडी के हिसाब से करीब ₹377 रेलवे की तरफ से वहन किए जाने वाली लागत** के रूप में समझी जा सकती है. इस तरह यात्री की ₹500 की टिकट की वास्तविक यात्रा लागत करीब ₹877 के आसपास हो सकती है. लेकिन ध्यान रखें, यह औसत आंकड़े से निकाला गया उदाहरण है. किसी खास ट्रेन या टिकट पर वास्तविक सब्सिडी इससे अलग हो सकती है.
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