बिना रेंट एग्रीमेंट के रह रहे हैं किराएदार? क्या मकान मालिक कभी भी निकाल सकता है, जानें नियम

बिना रेंट एग्रीमेंट के किराए के मकान में रह रहे हैं? जानिए क्या मकान मालिक आपको कभी भी घर से निकाल सकता है, किराएदार के पास कौन से कानूनी अधिकार होते हैं.

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 और घर खाली कराने के लिए नोटिस देना कब जरूरी होता है. ( Photo: ITG) और घर खाली कराने के लिए नोटिस देना कब जरूरी होता है. ( Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 24 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

आजकल बड़े शहरों में बहुत से लोग किराए के मकान में रहते हैं. इनमें कई ऐसे किराएदार भी होते हैं, जिन्होंने मकान मालिक के साथ कोई लिखित रेंट एग्रीमेंट नहीं बनवाया होता. शुरुआत में मकान मालिक और किराएदार के बीच मौखिक बातचीत के आधार पर ही किराया तय हो जाता है और लोग रहने लगते हैं. लेकिन जब मकान मालिक अचानक घर खाली करने के लिए कहता है, तब किराएदार के मन में सवाल उठता है कि क्या बिना रेंट एग्रीमेंट के उसे कभी भी घर से निकाला जा सकता है?

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इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. सिर्फ रेंट एग्रीमेंट न होने का मतलब यह नहीं है कि मकान मालिक जब चाहे, किराएदार को घर से बाहर कर सकता है. किराएदारी के मामले में कई कानूनी पहलू मायने रखते हैं, जैसे किराया देने का तरीका, मकान मालिक और किराएदार के बीच हुई बातचीत और संबंधित राज्य में लागू कानून.

क्या बिना रेंट एग्रीमेंट के भी किराएदार के अधिकार होते हैं?
कई लोगों को लगता है कि रेंट एग्रीमेंट नहीं होने पर किराएदार के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं बचता. लेकिन ऐसा मानना सही नहीं है. कुछ परिस्थितियों में मकान मालिक और किराएदार के बीच मौखिक समझौते के आधार पर भी किराएदारी हो सकती है. कानून के मुताबिक, अगर मकान एक साल से ज्यादा समय के लिए किराए पर दिया जा रहा है, तो आमतौर पर रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है. वहीं, कम अवधि के लिए कुछ मामलों में मौखिक समझौते के आधार पर भी मकान किराए पर दिया जा सकता है. हालांकि, इसके नियम राज्य के कानून और मकान मालिक-किराएदार के बीच तय शर्तों पर भी निर्भर करते हैं. इसलिए रेंट एग्रीमेंट नहीं होने पर भी किराएदार के पास अपने पक्ष में सबूत जुटाने और कानून के तहत अपने अधिकारों की रक्षा करने का विकल्प हो सकता है.

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क्या मकान मालिक अचानक घर खाली करने को कह सकता है?
मकान मालिक को अपना घर वापस लेने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह हर परिस्थिति में किराएदार को तुरंत बाहर कर सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि किराएदारी किस कानून के तहत आती है, उसकी शर्तें क्या हैं और घर खाली कराने की वजह क्या है. उदाहरण के लिए, अगर किराएदार लंबे समय से किराया नहीं दे रहा है, मकान का गलत इस्तेमाल कर रहा है या किराएदारी की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है, तो मकान मालिक कानूनी कार्रवाई कर सकता है. लेकिन घर खाली कराने के आधार और प्रक्रिया संबंधित राज्य के कानून के अनुसार तय होते हैं.

इसका मतलब है कि किराएदार को सिर्फ इसलिए घर छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि उसके पास लिखित रेंट एग्रीमेंट नहीं है. हालांकि, यह भी जरूरी नहीं कि एग्रीमेंट नहीं होने से किराएदार को अनिश्चित समय तक घर में रहने का अधिकार मिल जाए.

कितने दिन का नोटिस देना जरूरी है?
इसका जवाब हर मामले में अलग हो सकता है. कानून के मुताबिक, कुछ मामलों में मकान मालिक को किराएदार से घर खाली कराने के लिए 15 दिन का लिखित नोटिस देना होता है. लेकिन यह नियम हर जगह और हर किराएदार पर लागू नहीं होता. नोटिस कितने दिन का होना चाहिए, यह किराएदारी की शर्तों और संबंधित राज्य के कानून पर भी निर्भर करता है. इसके अलावा, किराएदारी खत्म करने का नोटिस देना और किराएदार को जबरन घर से बाहर निकालना दो अलग बातें हैं. विवाद होने पर मकान मालिक को लागू कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ सकता है.

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अगर मकान मालिक जबरदस्ती घर से निकाले तो क्या करें?
अगर कोई किराएदार बिना लिखित रेंट एग्रीमेंट के रह रहा है और मकान मालिक अचानक घर खाली करने का दबाव बना रहा है, तो उसे कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

किराया देने का सबूत रखें: ऑनलाइन पेमेंट, बैंक स्टेटमेंट, किराए की रसीद और मकान मालिक के साथ हुई बातचीत संभालकर रखें.

नोटिस को नजरअंदाज न करें: मकान मालिक की ओर से कोई कानूनी नोटिस मिले तो उसे ध्यान से पढ़ें और जरूरत पड़ने पर वकील से सलाह लें.

जबरदस्ती होने पर मदद लें: ताला बदलने, सामान बाहर फेंकने या धमकी देने जैसी स्थिति में स्थानीय पुलिस या वकील से संपर्क किया जा सकता है. सही कानूनी उपाय मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.

किराया समय पर देते रहें: किराया देने का रिकॉर्ड रखने से यह साबित करने में मदद मिल सकती है कि आप किराएदार के रूप में वहां रह रहे थे.

रेंट एग्रीमेंट बनवाना क्यों जरूरी है?
रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किराएदार, दोनों के लिए जरूरी शर्तों को स्पष्ट करता है. इसमें किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, किराएदारी की अवधि, नोटिस पीरियड और दूसरी शर्तें लिखी जा सकती हैं. इससे भविष्य में विवाद होने पर दोनों पक्षों को अपना मामला साबित करने में मदद मिलती है. केंद्र सरकार ने 2021 में मॉडल टेनेंसी एक्ट को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए भेजा था. हालांकि, इसे पूरे देश में एक समान रूप से लागू कानून मानना सही नहीं होगा. किराएदारी के नियम राज्य और स्थानीय कानूनों के हिसाब से अलग हो सकते हैं.

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कुल मिलाकर, बिना रेंट एग्रीमेंट के रहने का मतलब यह नहीं है कि मकान मालिक आपको कभी भी घर से निकाल सकता है. लेकिन इससे किराएदारी की शर्तों को साबित करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए किराएदार और मकान मालिक, दोनों के लिए लिखित समझौता करना बेहतर है. किसी विवाद में सही जवाब जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि मकान किस राज्य में है और उस पर कौन-सा कानून लागू होता है.

मॉडल टेनेंसी एक्ट क्या है और इससे मकान मालिक-किराएदार को क्या फायदा होगा?
किराए के मकान को लेकर मकान मालिक और किराएदार के बीच होने वाले विवादों को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल टेनेंसी एक्ट तैयार किया था. इसे 7 जून 2021 को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए भेजा गया था. राज्य चाहें तो इसके आधार पर नया कानून बना सकते हैं या अपने मौजूदा 
किराएदारी कानून में बदलाव कर सकते हैं. इस कानून का मकसद मकान मालिक और किराएदार, दोनों के हितों का ध्यान रखना और किराए के मकानों से जुड़े विवादों को जल्दी सुलझाने की व्यवस्था बनाना है.

1. किराएदारी के विवाद जल्द सुलझाने की कोशिश
मॉडल टेनेंसी एक्ट में किराएदारी से जुड़े मामलों को जल्दी निपटाने की व्यवस्था की गई है. इसके तहत रेंट कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल को कोशिश करनी होगी कि वे मामलों का निपटारा 60 दिनों के भीतर करें. अगर किसी मामले में देरी होती है, तो उसकी वजह लिखित रूप में दर्ज करनी होगी.

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2. जरूरी सेवाएं बंद करने पर भी नियम
अगर मकान मालिक या कोई अन्य व्यक्ति किराएदार के घर की जरूरी सेवाएं बंद कर देता है, तो किराएदार संबंधित रेंट अथॉरिटी से शिकायत कर सकता है. मामले की जांच के बाद अथॉरिटी जरूरी सेवाएं बहाल करने का अंतरिम आदेश दे सकती है. ऐसी शिकायत पर एक महीने के भीतर जांच करने का भी प्रावधान बताया गया है.

3. मकान मालिक और किराएदार की जिम्मेदारियां तय
इस कानून में मकान मालिक और किराएदार, दोनों की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है. अगर किरायेदारी के समझौते में किसी बात पर अलग सहमति नहीं है, तो कानून में दी गई जिम्मेदारियों के आधार पर मामला देखा जा सकता है. इससे दोनों पक्षों के बीच विवाद कम करने में मदद मिल सकती है.

4. किराएदारी से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे
मॉडल टेनेंसी एक्ट के तहत किराएदारी की जानकारी देने के लिए मकान मालिक और किराएदार की ओर से जमा किए गए दस्तावेज रेंट अथॉरिटी के पास सुरक्षित रखने का प्रावधान है.

किराएदार और मकान मालिक के लिए इसका क्या मतलब है?
इस कानून का मकसद किराए के मकान से जुड़े नियमों को ज्यादा स्पष्ट बनाना है, ताकि मकान मालिक और किराएदार के बीच विवाद होने पर उन्हें सुलझाने का एक तय रास्ता मिल सके. हालांकि, एक जरूरी बात मॉडल टेनेंसी एक्ट को केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनाने के लिए भेजा था. यह अपने आप पूरे देश में एक समान रूप से लागू नहीं हो गया था. इसलिए किसी किराएदार को मकान से निकालने, नोटिस देने या रेंट एग्रीमेंट से जुड़े विवाद में संबंधित राज्य में लागू कानून देखना जरूरी है.

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