कौन से हैं वो 7 कागज, जिन्हें जमीन खरीदने से पहले देख लें, नहीं होगा फ्रॉड

जमीन खरीदने से पहले सिर्फ रजिस्ट्री देखना काफी नहीं है. खसरा-खतौनी, जमाबंदी, म्यूटेशन,एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट समेत इन 7 दस्तावेजों की जांच करना जरूरी है, ताकि जमीन के मालिकाना हक, कर्ज और विवाद की जानकारी मिल सके.

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जमीन खरीदने से पहले यह जरूर जांचें कि उस पर कोई मौजूदा बोझ या दर्ज लेन-देन तो नहीं है. ( PHOTO: ITG) जमीन खरीदने से पहले यह जरूर जांचें कि उस पर कोई मौजूदा बोझ या दर्ज लेन-देन तो नहीं है. ( PHOTO: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

Property Buying Tips: जमीन खरीदना जिंदगी का बड़ा फैसला होता है. लोग अपनी जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट, खेत या मकान के लिए जमीन खरीदते हैं. लेकिन कई बार कागजों की ठीक से जांच न करने पर खरीदार फंस जाता है. जमीन किसी और के नाम होती है, उस पर पहले से कर्ज होता है या फिर जमीन को लेकर विवाद चल रहा होता है. ऐसे में सिर्फ जमीन देखकर या बेचने वाले की बात पर भरोसा करके पैसा देना सही नहीं है. जमीन खरीदने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेज जरूर चेक करने चाहिए. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि ये 7 कागज कौन से हैं और इनमें क्या देखना चाहिए.

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1. सेल डीड (Sale Deed) यानी रजिस्ट्री
सबसे पहले जमीन की सेल डीड यानी रजिस्ट्री देखें. इससे पता चलता है कि जमीन किस व्यक्ति के नाम है और वह उसे बेचने का अधिकार रखता है या नहीं. रजिस्ट्री में जमीन का खसरा नंबर, क्षेत्रफल, मालिक का नाम और जमीन से जुड़ी दूसरी जानकारी होती है. इसे जमीन के मौजूदा रिकॉर्ड से मिलाकर जरूर देखें. ध्यान रखें कि सिर्फ रजिस्ट्री की कॉपी देखकर संतुष्ट न हों. इसकी जानकारी संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से भी मिलाएं.

2. मदर डीड (Mother Deed) यानी पुराना मालिकाना रिकॉर्ड
मदर डीड से जमीन के पुराने मालिकों और उसके स्वामित्व का इतिहास पता करने में मदद मिलती है. मान लीजिए आज जमीन बेचने वाला व्यक्ति कह रहा है कि वह इसका मालिक है. ऐसे में यह देखना जरूरी है कि जमीन उसके पास आई कैसे. पहले यह किसके नाम थी और उसके बाद मालिकाना हक किस तरह बदला. इससे जमीन के टाइटल यानी मालिकाना हक की पूरी कड़ी समझने में मदद मिलती है.

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3.  बंधक या कर्ज की जानकारी (Encumbrance Certificate )
इनकंब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate - EC) बहुत जरूरी दस्तावेज है. इससे पता लगाने में मदद मिलती है कि जमीन पर कोई रजिस्टर्ड कर्ज, बंधक या अन्य कानूनी लेन-देन तो नहीं है. अगर जमीन किसी बैंक के पास गिरवी है और आप बिना जांच किए उसे खरीद लेते हैं, तो बाद में परेशानी हो सकती है. इसलिए जमीन खरीदने से पहले यह जरूर जांचें कि उस पर कोई मौजूदा बोझ या दर्ज लेन-देन तो नहीं है.

4. खसरा-खतौनी / जमाबंदी रिकॉर्ड
जमीन का खसरा-खतौनी, जमाबंदी या संबंधित भूमि रिकॉर्ड राज्य के हिसाब से अलग नाम से मिल सकता है. इस रिकॉर्ड में जमीन का खसरा नंबर, क्षेत्रफल, मालिकाना जानकारी और जमीन से जुड़ी दूसरी जानकारी मिल सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि जमीन पर मौजूद जानकारी को दस्तावेजों से मिलाएं. कहीं ऐसा तो नहीं कि बेचने वाला जितनी जमीन बता रहा है, रिकॉर्ड में उसका क्षेत्रफल उससे कम है.

5. म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज रिकॉर्ड
म्यूटेशन को कई जगह दाखिल-खारिज कहा जाता है. जमीन के मालिकाना हक में बदलाव होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड में उस बदलाव की एंट्री की जाती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति ने जमीन खरीदी है, विरासत में जमीन मिली है या किसी दूसरे तरीके से मालिकाना हक बदला है, तो संबंधित रिकॉर्ड में उसका असर दिखाई दे सकता है. इसलिए यह देखना जरूरी है कि जमीन बेचने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित सरकारी रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज है या नहीं.

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6. नक्शा और जमीन की सीमाएं
जमीन का नक्शा और उसकी सीमाएं भी जरूर चेक करें. कागज में जमीन का क्षेत्रफल कुछ और हो और मौके पर जमीन की स्थिति कुछ और, तो बाद में विवाद हो सकता है. जमीन का खसरा नंबर, चारों तरफ की सीमाएं और मौके पर मौजूद जमीन को रिकॉर्ड से मिलाना जरूरी है. खासकर प्लॉट खरीदते समय यह देखना चाहिए कि जमीन का रास्ता कहां से है और वह रास्ता रिकॉर्ड में भी मौजूद है या नहीं.

7. जमीन पर कोई केस या कानूनी विवाद तो नहीं
जमीन खरीदने से पहले यह भी जांचना जरूरी है कि जमीन को लेकर कोई कोर्ट केस, पारिवारिक विवाद, अधिग्रहण या अन्य कानूनी समस्या तो नहीं चल रही. कई बार जमीन का मालिकाना हक परिवार के कई लोगों के बीच विवादित होता है. ऐसी स्थिति में सिर्फ एक व्यक्ति से जमीन खरीदने पर भविष्य में दूसरा पक्ष आपत्ति कर सकता है. इसलिए जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और उपलब्ध कानूनी जानकारी की जांच जरूर करें.

सिर्फ 7 कागज देखना ही काफी नहीं
इन दस्तावेजों की जांच करने के बाद भी जल्दबाजी में पूरी रकम न दें. जमीन के दस्तावेजों में नाम, खसरा नंबर, क्षेत्रफल और सीमाओं को आपस में मिलाएं. अगर जमीन विरासत में मिली है, कई लोगों के नाम है या उस पर पहले से कोई विवाद दिखाई दे रहा है, तो स्थानीय वकील या प्रॉपर्टी से जुड़े विशेषज्ञ से दस्तावेजों की जांच कराना बेहतर रहता है.

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सबसे जरूरी बात यह है कि जमीन खरीदते समय सिर्फ बेचने वाले की बात पर भरोसा न करें. कागजों में मालिकाना हक साफ है या नहीं, जमीन पर कोई कर्ज या विवाद तो नहीं और मौके की जमीन रिकॉर्ड से मेल खाती है या नहीं. इन बातों की जांच के बाद ही आगे बढ़ें.

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