नेहा बोरा इन दिनों दिल्ली के प्रोटेस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. अब उनकी एक टी-शर्ट भी लोगों का ध्यान खींच रही है. टी-शर्ट पर बनी खोपड़ी और उसके नीचे लिखा ‘वन पीस’ देखकर सोशल मीडिया पर लोग इसके मायने पूछ रहे हैं. आखिर यह सिर्फ एक एनीमे का निशान है या इसके पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा है? इसकी कहानी समुद्री लुटेरों से शुरू होकर आज के Gen-Z प्रोटेस्ट तक पहुंचती है.
10 और 11 अक्टूबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा इसी डिजाइन वाली टी-शर्ट में नजर आईं. उनकी तस्वीरें सामने आने के बाद ‘वन पीस’ के इस सिंबल को लेकर चर्चा तेज हो गई.
पहले समझिए, खोपड़ी वाले झंडे का इतिहास क्या है?
इतिहास में खोपड़ी और हड्डियों वाले डिजाइन के शुरुआती रिकॉर्ड 17वीं सदी के आखिर तक मिलते हैं. 1700 के आसपास समुद्री डाकू इमैनुएल विन के झंडे पर खोपड़ी, हड्डियां और घंटे वाला डिजाइन दर्ज किया गया था.
17वीं और 18वीं सदी में समुद्री लुटेरे अलग-अलग डिजाइन वाले झंडों का इस्तेमाल करते थे. काला झंडा कई बार सामने वाले जहाज को डराकर आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने का संकेत होता था. लाल झंडे का इस्तेमाल ज्यादा घातक इरादे का संकेत देने के लिए किया जाता था.
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खोपड़ी, हड्डियां, कंकाल, तलवार और घंटे जैसे निशान मौत और खतरे का संदेश देते थे. यानी झंडा सिर्फ पहचान नहीं था, बल्कि समुद्र में दूर से दिया जाने वाला एक मनोवैज्ञानिक संदेश भी था- हमें देखकर फैसला कर लो कि लड़ना है या आत्मसमर्पण करना है.
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‘वन पीस’ ने खोपड़ी वाले झंडे को नई पहचान दी
1997 में जापानी मंगा आर्टिस्ट इचिरो ओडा ने ‘वन पीस’ नाम की मंगा सीरीज शुरू की. कहानी समुद्री लुटेरों की दुनिया पर आधारित है और इसका मुख्य किरदार है मंकी डी. लूफी.लूफी का सपना दुनिया का सबसे बड़ा पाइरेट किंग बनना है. वह अपने साथियों के साथ समुद्र में सफर करता है और ‘वन पीस’ नाम के रहस्यमयी खजाने की तलाश करता है.उसके ग्रुप को स्ट्रॉ हैट पाइरेट कहा जाता है.
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इनके झंडे पर खोपड़ी बनी है, जिसके ऊपर स्ट्रॉ हैट दिखाई देता है. कहानी में वे ताकतवर और दमनकारी शासकों के खिलाफ खड़े होते हैं, लोगों की मदद करते हैं और उस व्यवस्था को चुनौती देते हैं. यह आजादी, विद्रोह और दमन के खिलाफ खड़े होने की पॉप-कल्चर भाषा बन गया.
नेपाल में भी दिखा वन पीस वाला झंडा
नेपाल में भी Gen-Z के प्रदर्शनों के दौरान ‘वन पीस’ का झंडा नजर आया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सरकार के बैन के विरोध से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया. युवाओं ने ‘वन पीस’ के स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स वाले झंडे को सत्ता के खिलाफ विरोध और बदलाव की मांग के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया. प्रदर्शन इतना उग्र हुआ कि पुलिस से झड़पों में कई लोगों की मौत हुई और आखिरकार तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा.
इंडोनेशिया में सरकार के खिलाफ असहमति का निशान बना
इंडोनेशिया में 2025 के दौरान वन पीस का झंडा घरों, गाड़ियों, मोटरसाइकिलों और ट्रकों तक पर दिखाई देने लगा.
शुरुआत में ट्रक ड्राइवरों ने सरकार की नीतियों और ओवरलोडिंग नियमों को लेकर अपनी नाराजगी जताने के लिए इसका इस्तेमाल किया. इसके बाद युवाओं के प्रदर्शनों में भी यही झंडा पहुंच गया.
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