मेले में आपने रंग-बिरंगे मिक्की माउस झूले जरूर देखे होंगे. हवा से फूलने वाले इन झूलों पर बच्चे उछल-कूद करते हैं और खूब मस्ती करते हैं. बच्चों को इसमें खेलने के लिए 10 मिनट के 100-150 रुपये लगते हैं. यही वजह है कि मेले में ऐसे झूले लगाने वाले लोगों के लिए कमाई का मौका बन सकता है. खास बात यह है कि इसके लिए बहुत बड़ी दुकान या जगह की जरूरत नहीं होती. आप अपनी पूंजी के हिसाब से छोटा या बड़ा झूला खरीदकर कारोबार शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं.
ऐसे झूले सिर्फ मेले में ही नहीं, बल्कि शादी-ब्याह, जन्मदिन की पार्टियों, स्कूल के कार्यक्रमों, सोसाइटी के आयोजनों और दूसरे समारोहों में भी लगाए जाते हैं. अगर सही जगह पर झूला लगाने का मौका मिल जाए और बच्चों की अच्छी भीड़ आए, तो इससे कमाई की संभावना बन सकती है. आइए समझते हैं कि हवा वाला मिक्की माउस झूला कितने रुपये में आता है और इससे एक दिन में कितनी कमाई हो सकती है.
कितने रुपये में आता है मिक्की माउस झूला?
इंडिया मार्ट पर झूला बेचने वाली कंपनी के मालिक संजय ने बताया कि हवा वाले मिक्की माउस झूले अलग-अलग आकार में मिलते हैं. इनकी कीमत झूले के आकार और बनावट के हिसाब से अलग हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, ब्लोअर सहित कई ऑप्शन में ये झूला उपलब्ध हैं. ब्लोअर एक ऐसी मशीन होती है, जो झूले में लगातार हवा भरकर उसे फुलाए रखती है. हवा वाला मिक्की माउस झूला अलग-अलग आकार में आता है.
12×18 साइज के झूले की कीमत ब्लोअर सहित 52,000 रुपये है. वहीं, 14×22 साइज का झूला 85,000 रुपये में मिलता है, जबकि 18×26 साइज के बड़े झूले की कीमत 1 लाख 15 हजार रुपये है. ब्लोअर झूले में लगातार हवा भरकर उसे फुलाए रखता है. इस तरह आप अपने बजट और मेले में उपलब्ध जगह के हिसाब से छोटा या बड़ा झूला खरीदकर कारोबार शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं.
इस हिसाब से छोटा झूला खरीदने के लिए करीब 52 हजार रुपये खर्च करने होंगे. वहीं, मध्यम आकार के झूले की कीमत 85 हजार रुपये और बड़े झूले की कीमत करीब 1.15 लाख रुपये है. खरीदने से पहले विक्रेता से झूले की सामग्री, ब्लोअर, ढुलाई, लगाने के खर्च और मरम्मत की सुविधा के बारे में जानकारी जरूर लें.
10 मिनट के 100 रुपये, एक घंटे में कितनी कमाई?
शास्त्री नगर पार्क में झूला लगाने वाले नदीम ने बताया कि इस कारोबार से होने वाली कमाई बच्चों की संख्या और झूले के लगातार चलने पर निर्भर करती है. उन्होंने कमाई का हिसाब समझाते हुए बताया कि अगर मेले में एक बच्चे से 10 मिनट खेलने के 100 रुपये लिए जाते हैं और एक बार में चार बच्चे झूले पर बैठ सकते हैं, तो एक राउंड से 400 रुपये मिलते हैं.
नदीम के बताए हिसाब के मुताबिक, अगर झूले पर लगातार बच्चे आते रहें और चारों जगह भरी रहें, तो एक घंटे में छह राउंड पूरे हो सकते हैं. इस तरह एक घंटे में कुल 2,400 रुपये की कमाई हो सकती है. हालांकि, यह कमाई तभी संभव है, जब झूला लगातार चलता रहे और हर राउंड में चारों बच्चे मौजूद हों. अगर बच्चों के आने में देरी होती है या झूला कुछ समय खाली रहता है, तो कमाई कम हो सकती है.
मेले में रोज 200 से 400 बच्चे आएं तो कितनी होगी कमाई?
नदीम के बताए प्रति बच्चे 100 रुपये और 10 मिनट खेलने के हिसाब से देखें, तो अगर एक दिन में 200 बच्चे झूले पर खेलते हैं, तो कुल 20,000 रुपये की कमाई होगी. वहीं, 300 बच्चों के खेलने पर यह रकम 30,000 रुपये और 400 बच्चों के खेलने पर 40,000 रुपये तक पहुंच सकती है. हालांकि, इस कमाई के लिए झूले की क्षमता और समय का हिसाब समझना भी जरूरी है. एक बार में चार बच्चे खेल सकते हैं और हर राउंड 10 मिनट का होता है. ऐसे में 200 बच्चों को खेलने के लिए करीब 8 घंटे 20 मिनट और 400 बच्चों को खेलने के लिए करीब 16 घंटे 40 मिनट तक झूला लगातार चलाना होगा. इसलिए बताए रेट के आधार पर यह संभावित कमाई का हिसाब है. असल कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि मेले में कितने बच्चे आते हैं, झूला कितनी देर चलता है और दिनभर में कितने राउंड पूरे हो पाते हैं.
कमाई में से कितना पैसा बचेगा?
नदीम के मुताबिक, झूले से होने वाली पूरी कमाई को मुनाफा नहीं माना जा सकता. इस कारोबार में भी कई तरह के खर्च होते हैं, जिन्हें कमाई का हिसाब लगाते समय ध्यान में रखना जरूरी है. मेले में झूला लगाने के लिए जगह का किराया, ब्लोअर चलाने के लिए बिजली, झूले को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का खर्च और उसकी देखरेख और मरम्मत पर पैसा खर्च हो सकता है.
उदाहरण के लिए, अगर किसी दिन झूले से 20,000 रुपये की कमाई होती है और जगह के किराये, बिजली, ढुलाई व दूसरे जरूरी खर्चों पर कुल 5,000 रुपये खर्च हो जाते हैं, तो 15,000 रुपये बचेंगे. हालांकि, यह केवल उदाहरण के तौर पर समझाया गया हिसाब है. असल में कितना पैसा बचेगा, यह रोज होने वाली कमाई और खर्चों पर निर्भर करेगा.
शादी-ब्याह और स्कूल के कार्यक्रमों में भी मिल सकता है काम
नदीम ने बताया कि मिक्की माउस झूले का इस्तेमाल सिर्फ मेलों के अलावा कई जगहों पर किया जा रहा है. शादी-ब्याह, जन्मदिन की पार्टियों, स्कूल के कार्यक्रमों और स्थानीय समारोहों में भी बच्चों के मनोरंजन के लिए ऐसे झूले लगाए जा सकते हैं. इन कार्यक्रमों में कमाई का तरीका अलग होता है. कहीं बच्चों से खेलने के हिसाब से पैसे लिए जा सकते हैं, तो कहीं आयोजक झूला लगाने के लिए दिन भर के पैसे देता है.
झूला खरीदने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?
अगर आप भी मिक्की माउस झूले का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने बजट और इलाके में इसकी मांग का पता लगाएं. झूला खरीदते समय उसकी मजबूती, क्वालिटी, हवा भरने वाली मशीन और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की जांच जरूर करें. बच्चों को झूले पर चढ़ाते और उतारते समय निगरानी रखना भी जरूरी है. तेज हवा, बारिश या खराब मौसम में झूले को चलाने से पहले निर्माता के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें. इसके अलावा, झूले को ले जाने, रखने और चलाने में आने वाले खर्चों का हिसाब भी पहले से लगा लें.
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