आजकल घर बनाने के बाद दीवारों और छतों में दरारों की समस्या आम हो गई है. लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी कुछ समय बाद ही घरों में क्रैक्स आने लग जाते हैं. इन दरारों से कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती है. फिर दीवारों में सीलन और सीपेज की प्रॉब्लम होने लगती है.
कई बार घर में दरार आने की वजह आसपास की आवोहवा के मुताबिक सही सीमेंट का इस्तेमाल नहीं करना भी हो सकता है. घरों को दरार से सुरक्षित रखने के लिए कंस्ट्रक्शन के समय सही सीमेंट का इस्तेमाल करने से इससे हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है. ऐसा ही एक कारगर बिल्डिंग मटेरियल है लो हीट सीमेंट.
लो हीट सीमेंट एक विशेष प्रकार का पोर्टलैंड सीमेंट होता है. इसमें पानी मिलाने पर 'हाइड्रेशन' के दौरान बहुत कम गर्मी निकलती है. वहीं कोई भी नॉर्मल सीमेंट ज्यादा हीट छोड़ता है. इस वजह से प्लास्टर या जोड़ में दरार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है. वहीं लो हीट सीमेंट के साथ यह समस्या नहीं होती है.
क्या है इस सीमेंट की खासियत
लो-हीट सीमेंट को हाइड्रेशन के दौरान कम गर्मी पैदा करने के लिए डिजाइन किया गया है. सीमेंट में पानी मिलने के बाद ज्यादा हीट निकलने से होने वाली थर्मल क्रैकिंग के जोखिम को यह सीमेंट कम कर देता है. क्योंकि, लो हीट सीमेंट जमने की प्रक्रिया के दौरान कम गर्मी छोड़ता है. इससे अंदरूनी और बाहरी तापमान में अंतर की वजह से कंक्रीट में थर्मल क्रैक नहीं आते हैं.
इस सीमेंट की शुरुआती मजबूती भले ही थोड़ी धीमी होती है. लेकिन लंबे समय में इसकी अंतिम ताकत बहुत अच्छी और स्थिर होती है. इस सीमेंट से कंस्ट्रक्शन में कम दरारें आती हैं. इस वजह से स्ट्रक्चर के अंदर पानी का रिसाव और सीलन नहीं होती है.
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इस सीमेंट की कीमत भी ज्यादा नहीं होती है. यानी इसके इस्तेमाल में खर्चा भी ज्यादा नहीं होता है. इसकी कीमत भी नॉर्मल ओपीसी और पीपीसी सीमेंट के रेंज में होती है. 320 रुपये बोरा से शुरू होकर स्पेशल ग्रेड में 1300 रुपये बोरा तक लो हीट सीमेंट आसानी से मिल जाता है.
दीवार, छत और पिलर हो जाती है मजबूत
अब सवाल उठता है कि इस लो हीट सीमेंट का इस्तेमाल घर के किस हिस्से को बनाने में किया जाता है? घरों को मजबूत बनाने और दरारों से सुरक्षित रखने के लिए इन सीमेंट का भी इस्तेमाल किया जाता है. खासकर, सामान्य घरों में ईंट की जुड़ाई, प्लास्टर, छत ढलाई, पिलर की ढलाई के लिए भी लो हीट सीमेंट का इस्तेमाल होता है. क्योंकि यह प्लास्टर या कंक्रीट में बारीक दरारें नहीं पड़ने देता और सीलन रोकता है.
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इस लो हीट सीमेंट का का इस्तेमाल मुख्य रूप से बड़े पैमाने के और भारी कंक्रीट निर्माण में किया जाता है. जहां पानी और सीमेंट के रिएक्शन से ज्यादा गर्मी निकलने के कारण दरारें आने का खतरा होता है. खासकर, बांधों और पुलों की मोटी दीवारों और नींव में इसका इस्तेमाल होता है. क्योंकि, इन जगहों पर सामान्य सीमेंट डालने पर अत्यधिक गर्मी से अंदरूनी दरारें आ सकती हैं.
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