ट्रेन में सामान बेचने वाले दो ट्रेनों के गुजरते ही नीचे क्यों बैठ जाते हैं? इसके पीछे है साइंस

तेज रफ्तार से गुजरती ट्रेन के पास खड़े होने पर कई बार ऐसा महसूस होता है, जैसे हवा इंसान को अपनी ओर खींच रही हो. लेकिन क्या चलती ट्रेन सच में किसी व्यक्ति को खींचती है? जानिए ट्रेन के आसपास हवा की स्पीड और दबाव में बदलाव के पीछे का विज्ञान और ट्रेन से सुरक्षित दूरी बनाए रखना क्यों जरूरी है.

Advertisement
ट्रेन में सामान बेचते वक्त दो ट्रेनें आ जाएं, तो वेंडर क्यों बैठ जाते हैं? ट्रेन में सामान बेचते वक्त दो ट्रेनें आ जाएं, तो वेंडर क्यों बैठ जाते हैं?

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:08 AM IST

जब कोई ट्रेन तेज रफ्तार से गुजरती है, तो आपने महसूस किया होगा कि उसके पास खड़े होने पर हवा का तेज झोंका आता है. कई बार ऐसा लगता है, जैसे ट्रेन अपने पास खड़े इंसान को अपनी ओर खींच रही हो. यही वजह है कि रेलवे स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के पास जाने या प्लेटफॉर्म के किनारे खड़े होने को लेकर लोगों के मन में कई सवाल आते हैं. लेकिन क्या सच में चलती ट्रेन किसी इंसान को अपनी ओर खींचती है? क्या ट्रेन के पास खड़े होने से कोई व्यक्ति उसकी तरफ खींच सकता है? या फिर इसके पीछे हवा के दबाव और स्पीड से जुड़ा साइंस काम करता है? आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं.

Advertisement

क्या सच में चलती ट्रेन इंसान को अपनी ओर खींचती है?
सीधे शब्दों में कहें तो ट्रेन किसी चुंबक की तरह इंसान को अपनी ओर नहीं खींचती. लेकिन जब कोई ट्रेन तेज रफ्तार से गुजरती है, तो उसके आसपास हवा की स्पीड और दबाव में बदलाव होता है. इससे पास खड़े व्यक्ति को तेज हवा का झटका लग सकता है और उसका बैलेंस बिगड़ सकता है. ट्रेन जितनी तेज रफ्तार से गुजरती है, उसके आसपास हवा का बहाव उतना ही तेज और अस्थिर हो सकता है. ट्रेन के आकार, उसकी रफ्तार, आसपास की जगह और हवा की स्थिति के हिसाब से इसका असर अलग-अलग हो सकता है. यानी, अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि ट्रेन उसे अपनी ओर खींच रही है, तो इसके पीछे हवा की स्पीड और दबाव में होने वाले बदलाव की भूमिका हो सकती है.

Advertisement

ट्रेन के पास हवा का दबाव कैसे बदलता है?
इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लेते हैं. जब आप सड़क पर खड़े होते हैं और कोई बड़ी बस तेज रफ्तार से आपके पास से गुजरती है, तो आपको हवा का झटका महसूस हो सकता है. ट्रेन के मामले में भी कुछ ऐसा ही होता है, हालांकि ट्रेन का आकार बड़ा और उसकी रफ्तार काफी तेज हो सकती है. जब ट्रेन आगे बढ़ती है, तो वह अपने सामने की हवा को हटाती है और अपने आसपास हवा के बहाव को बदलती है. ट्रेन के किनारों के पास हवा तेजी से बह सकती है. इससे आसपास के कुछ हिस्सों में दबाव कम हो सकता है, जबकि दूसरे हिस्सों में दबाव बढ़ सकता है. 

हवा के दबाव में इस अंतर और तेज बहाव के कारण व्यक्ति को धक्का लगने जैसा महसूस हो सकता है. कुछ परिस्थितियों में हवा का बहाव व्यक्ति को ट्रेन की ओर भी अस्थिर कर सकता है. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर स्थिति में व्यक्ति ट्रेन की ओर ही खिंचेगा, ऐसा नहीं है. हवा का असर कभी धक्का देने जैसा महसूस हो सकता है, तो कभी खिंचाव जैसा.

क्या ट्रेन के पास खड़ा व्यक्ति गिर सकता है?
हां, ऐसा हो सकता है. तेज रफ्तार से गुजरने वाली ट्रेन के आसपास हवा का दबाव और बहाव अचानक बदल सकता है. अगर कोई व्यक्ति ट्रेन के बहुत करीब खड़ा है, तो हवा का झटका उसके शरीर का बैलेंस बिगाड़ सकता है. इसके अलावा, ट्रेन के पहियों और पटरियों के आसपास मौजूद खतरे, अचानक होने वाली हलचल और व्यक्ति का अपना संतुलन भी दुर्घटना की वजह बन सकते हैं. इसलिए यह मानना गलत होगा कि जब तक ट्रेन शरीर को सीधे नहीं छूती, तब तक कोई खतरा नहीं है. ट्रेन के बेहद करीब खड़े होने पर बिना सीधे संपर्क के भी गंभीर दुर्घटना हो सकती है.

Advertisement

रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म के किनारे अक्सर पीली लाइन बनी होती है. इसका मकसद यात्रियों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की याद दिलाना है. यात्रियों को ट्रेन आने या गुजरने के दौरान इस लाइन के पीछे रहना चाहिए और ट्रेन के बिल्कुल किनारे पर खड़े होने से बचना चाहिए. ट्रेन के आने-जाने के दौरान हवा का तेज बहाव, भीड़ का दबाव या अचानक होने वाली हलचल किसी व्यक्ति का संतुलन बिगाड़ सकती है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और चलने-फिरने में परेशानी महसूस करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. ध्यान रखें कि पीली लाइन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था और उसके नियम स्टेशन के हिसाब से अलग हो सकते हैं. इसलिए स्टेशन पर लगे संकेतों और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करना चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »