शराब की दुकान चलाने वालों को लेकर यह आम धारणा है कि उनकी कमाई खूब होती होगी. क्योंकि, शराब एक ऐसी चीज है, जिसका धंधा शायद ही मंदा होता है. चाहे दुकान शहर में हो, या किसी छोटे कस्बे में भीड़ हर जगह एक जैसी ही होती है. ऐसे में जानते हैं कि शराब की एक बोतल बेचने पर कितना मुनाफा होता है, सरकार शराब बेचने वालों को कितना मार्जिन देती है.
भारत के अलग- अलग राज्यों शराब को लेकर अलग- अलग नीति है और इसके तहत शराब की दुकानों का आवंटन होता है. यही वजह है कि दो अलग- अलग जगहों पर दो शराब की दुकानों की बिक्री एक बराबर होने पर भी, उनका मुनाफा अलग-अलग हो सकता है.
क्योंकि इस व्यवसाय में, कमाई केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितना बेचते हैं. यह इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपने द्वारा बेची जाने वाली शराब को कितनी अच्छी तरह नियंत्रित करते हैं. क्योंकि, शराब की दुकान का लाइसेंस एक निश्चित समय के लिए ही मिलता है और इस दौरान जितनी और जिस तरह की शराब बिकती है, उसी मुताबिक, मार्जिन और मुनाफा मिलता है.
जगह पर निर्भर करती है शराब दुकान की कमाई
शराब की दुकान की कमाई चार मुख्य फैक्टर पर निर्भर करती है - स्थान, ग्राहकों की संख्या, राज्य के नियम और स्टोर का प्रबंधन कितना अच्छा है.छोटे शहर या अर्ध-शहरी शराब की दुकानों में एक महीने में अगर करीब 10–25 लाख रुपये की शराब बिकती है तो लाभ का मार्जिन 5– 8% हो सकता है. ऐसे में दुकानदार को 50 हजार से डेढ़ लाख रुपये महीने की कमाई हो सकती है.
अगर कोई दुकान किसी ठीक- ठाक शहर के बीच में प्रमुख जगह पर स्थित है तो उसकी मासिक बिक्री 30 से 70 लाख रुपये और बेचे जाने वाले शराब के ब्रांड के मुताबिक मार्जिन अगर 6 से 10 प्रतिशत तक हो सकता है. ऐसे में शहर में चलने वाले एक दुकान के महीने भर की कमाई 2 से 5 लाख रुपये हो सकती है.
वहीं अगर भीड़भाड़ वाले मेट्रो शहर या टूरिस्ट स्पॉट पर कोई दुकान है, जैसे दिल्ली, गुड़गांव, मुंबई, बैंगलोर, गोवा, आदि में तो एक दुकान 1 करोड़ या उससे ज्यादा की भी पूरे महीने में बिक्री कर सकता है. ऐसे दुकानों में जो ब्रांड और प्रोडक्ट बिकते हैं उन पर 8 से 12 प्रतिशत तक का मार्जिन मिल सकता है और शुद्ध मासिक लाभ 6 से 12 लाख रुपये तक पहुंच सकता है.
अलग- अलग तरह की शराब के मुताबिक मिलती है मार्जिन
यह जान लें कि शराब का कारोबार उच्च लाभ वाला व्यवसाय नहीं है. यह उच्च मात्रा वाला, कम लाभ वाला व्यवसाय है. क्योंकि, शराब के अलग- अलग प्रोडक्ट और ब्रांड पर अलग- अलग मार्जिन यानी कमीशन दुकानदारों को मिलता है.
बीयर पर जहां 3 से 6% तक लाभ मिल सकता है. वहीं आईएमएफएल यानी व्हिस्की, वोदका, रम पर 6 से 10%, प्रीमियम और इम्पोर्डेट शराब पर 10 से 18% और वाइन पर 10 से 20% तक लाभ मिलता है.
अधिकांश स्टोरों का सारे प्रोडक्ट मिलाकर मार्जिन का औसत 6 से 9% होता है. इसलिए यदि आपका स्टोर एक महीने में 50 लाख रुपये की बिक्री करता है, तो खर्चों से पहले आपका सकल लाभ लगभग 3-4 लाख रुपये हो सकता है.
शराब कारोबार के जिन बातों से ज्यादातर लोग अनजान है, वो यह है कि दुकानदार को शराब पर जो मार्जिन मिलता है, उसे वो सीधे घर नहीं ले जाते हैं. इनमें से आपको किराया, स्टाफ की सैलरी, बिजली बिल, बोतलों के टूटने या शराब की बर्बादी, स्टॉक में कम बिकने या धीमा बिकने वाले माल का भी भुगतान करना होता है.
शराब दुकान खोलना फायदे का सौदा तो है, लेकिन इसमें वैसी बंपर कमाई नहीं होती, जितनी बंपर बिक्री होने पर हम अनुमान लगाते हैं. अगर कम मार्जिन वाली शराब ज्यादा बिक रही है तो कमाई बहुत ज्यादा नहीं होगी और ज्यादा मार्जिन वाली शराब अगर ठीक- ठाक भी बिक रही है तो कमाई अच्छी हो सकती है.
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