आजकल सिर्फ बड़ी-बड़ी कोठियों या लग्जरी बंगलों में ही लिफ्ट नहीं लगती. घर में बुजुर्ग हों, किसी को सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती हो या घर दो-तीन मंजिल का हो, तो होम लिफ्ट काफी काम की साबित हो सकती है. यही वजह है कि भारत में घरों के लिए छोटी और कॉम्पैक्ट लिफ्ट का चलन भी बढ़ रहा है.
लेकिन जैसे ही घर में लिफ्ट लगाने की बात आती है, सबसे पहला सवाल यही होता है कि आखिर इसका खर्च कितना आएगा? अगर आपको लगता है कि घर में लिफ्ट लगवाना सिर्फ करोड़पतियों के बस की बात है, तो ऐसा नहीं है. आजकल एक सामान्य होम लिफ्ट लगवाने का खर्च करीब 8 लाख रुपये से शुरू होकर 30 लाख रुपये या उससे ज्यादा तक जा सकता है.
हालांकि, हर घर में इसका खर्च एक जैसा नहीं होता. लिफ्ट किस तरह की है. कितनी मंजिलों तक जाएगी. केबिन कितना बड़ा है. डिजाइन और फीचर्स कैसे हैं और घर में कितना सिविल काम करना पड़ेगा. इन सब चीजों से कीमत बदल जाती है.
सिर्फ लिफ्ट खरीदने का खर्च कितना है?
होम लिफ्ट की कीमत आम तौर पर करीब 6 लाख रुपये से शुरू होकर 25 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है. इसमें लिफ्ट के उपकरण, केबिन, दरवाजे, ड्राइव सिस्टम और कंट्रोल सिस्टम जैसी चीजें शामिल होती हैं.
कॉम्पैक्ट और नॉर्मल यूज वाली होम लिफ्ट सस्ती पड़ सकती है. वहीं, ज्यादा मंजिलों के लिए लिफ्ट, बड़ा केबिन, बेहतर डिजाइन, ऑटोमैटिक दरवाजे और दूसरे एडवांस फीचर्स जोड़ने पर कीमत बढ़ती जाती है. यानी लिफ्ट खरीदने का बजट तय करते समय सिर्फ शुरुआती कीमत देखकर फैसला करना ठीक नहीं है.
लिफ्ट लगाने का चार्ज भी अलग होता है
लिफ्ट खरीदने के बाद उसे घर में फिट करने का खर्च भी आता है. इंस्टॉलेशन पर करीब 50 हजार से 2 लाख रुपये तक खर्च हो सकता है. इसमें आम तौर पर लिफ्ट को साइट तक पहुंचाना, उसे इंस्टॉल करना, टेस्टिंग और कमीशनिंग जैसी सेवाएं शामिल होती हैं. हालांकि, वास्तविक रकम साइट और लिफ्ट के मॉडल के हिसाब से अलग हो सकती है.
सिविल वर्क का खर्च बढ़ा सकता है बजट
घर में पहले से लिफ्ट के लिए जगह बनी हुई है तो खर्च कम हो सकता है. लेकिन अगर लिफ्ट के लिए नया शाफ्ट बनाना पड़े, पिट तैयार करनी हो या घर के स्ट्रक्चर में बदलाव करना पड़े, तो बजट बढ़ सकता है.
ऐसे सिविल वर्क पर करीब 50 हजार से 5 लाख रुपये या उससे ज्यादा खर्च हो सकता है. इसमें शाफ्ट बनाना, पिट का काम, स्ट्रक्चरल बदलाव और फिनिशिंग जैसी चीजें शामिल हो सकती हैं. यही वह खर्च है जिसे कई लोग शुरुआत में बजट में नहीं जोड़ते और बाद में उनका कुल खर्च बढ़ जाता है.
बिजली का खर्च भी जोड़ें
लिफ्ट चलाने के लिए घर में उचित बिजली कनेक्शन और वायरिंग की जरूरत होती है. इसके लिए करीब 20 हजार से 1 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है.इसमें अलग बिजली सप्लाई, वायरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड में जरूरी बदलाव और दूसरे इलेक्ट्रिकल कनेक्शन शामिल हो सकते हैं.
लिफ्ट की कीमत और इंस्टॉलेशन के अलावा GST भी लागू हो सकता है. इसलिए कंपनी से कोटेशन लेते समय यह जरूर पूछें कि बताई गई कीमत में टैक्स शामिल है या अलग से देना होगा.
यानी सिर्फ लिफ्ट की कीमत देखकर अपना बजट तय करने के बजाय उपकरण, इंस्टॉलेशन, सिविल वर्क, इलेक्ट्रिकल काम और टैक्स समेत पूरा खर्च पूछना बेहतर रहेगा.
हर साल मेंटेनेंस पर भी खर्च होगा
लिफ्ट लगवाने के बाद काम खत्म नहीं हो जाता. इसे सुरक्षित और सही तरीके से चलाने के लिए समय-समय पर सर्विस और मेंटेनेंस जरूरी है.
होम लिफ्ट का एनुअल मेंटेंनेंस कॉन्ट्रेक्ट यानी AMC करीब 12 हजार से 40 हजार रुपये या उससे ज्यादा सालाना हो सकता है. इसमें सामान्य तौर पर नियमित मेंटेनेंस, सुपरविजन, सर्विसिंग और तकनीकी सहायता जैसी सेवाएं शामिल होती हैं.
अगर आप घर में लिफ्ट लगवाने की योजना बना रहे हैं, तो सामान्य तौर पर 8 लाख से 30 लाख रुपये या उससे ज्यादा का बजट मानकर चलना व्यावहारिक है. छोटे और साधारण सेटअप में खर्च कम रह सकता है, जबकि प्रीमियम लिफ्ट, ज्यादा मंजिलें, बड़ा केबिन और ज्यादा सिविल काम होने पर लागत काफी बढ़ सकती है.
सबसे जरूरी बात यह है कि लिफ्ट चुनने से पहले घर का साइट इंस्पेक्शन करा लें. इससे पता चल जाएगा कि कितनी जगह चाहिए, किस तरह का शाफ्ट बनाना होगा और सिविल व इलेक्ट्रिकल काम पर कितना खर्च आएगा.
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इस तरह पहले से सही प्लानिंग करने पर अचानक आने वाले अतिरिक्त खर्च से बचा जा सकता है और लिफ्ट की इंस्टॉलेशन भी ज्यादा आसानी से पूरी हो सकती है.
कुल मिलाकर, घर में लिफ्ट लगवाना अब सिर्फ बेहद महंगे बंगलों तक सीमित नहीं है. जरूरत और बजट के हिसाब से कॉम्पैक्ट होम लिफ्ट भी लगाई जा सकती है. बस लिफ्ट की कीमत के साथ इंस्टॉलेशन, सिविल वर्क, बिजली और सालाना मेंटेनेंस का खर्च भी जोड़कर चलें. इससे आपको शुरुआत में ही अंदाजा हो जाएगा कि आपके घर में लिफ्ट लगवाने का कुल बजट कितना बैठेगा.
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