इतिहास में कई ऐसे शासकों के किस्से मिलते हैं, जिनकी क्रूरता सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ऐसी ही एक कहानी हंगरी की काउंटेस एलिजाबेथ बाथरी की है. उस पर नौकरानियों और किसान परिवारों की लड़कियों को यातनाएं देने और उनकी हत्या करने के गंभीर आरोप लगे थे.
बाद की कहानियों में तो यहां तक दावा किया गया कि वह लड़कियों के खून में नहाती थी, क्योंकि उसे लगता था कि इससे उसकी जवानी और खूबसूरती बरकरार रहेगी. हालांकि, खून में नहाने वाली बात को इतिहासकार अक्सर बाद की किंवदंती मानते हैं.
आलीशान महल में चलता था खौफनाक खेल
कहानी 17वीं सदी के शुरुआती वर्षों की है. 29 दिसंबर 1609 या 1610 को काउंट ज्योर्गी थुर्जो राजा मैथियस के आदेश पर हंगरी के सेजथे कैसल पहुंचा. वहां उसने कथित तौर पर बाथरी को युवा लड़कियों को यातना देते हुए पाया.
बाथरी पहले से ही इलाके में अपनी क्रूरता के लिए बदनाम थी. उस पर नौकरों और गरीब किसानों को प्रताड़ित करने और उनकी हत्या करने के आरोप लगते रहे थे. लेकिन उसका ऊंचा खानदान और प्रभावशाली रिश्तेदार उसके लिए ढाल बने हुए थे. यही वजह थी कि लंबे समय तक कोई उसके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.
बड़े खानदान में हुआ था जन्म
एलिजाबेथ बाथरी का जन्म 1560 में ट्रांसिल्वेनिया के एक बेहद प्रभावशाली परिवार में हुआ था. उसके रिश्तेदारों में राजा, कार्डिनल, शूरवीर और न्यायाधीश तक शामिल थे.
हालांकि, उसके परिवार में कुछ ऐसे लोग भी थे, जिनके बारे में बेहद विचलित करने वाली बातें कही जाती थीं. उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, उसके एक चाचा ने उसे शैतानी प्रथाओं की जानकारी दी थी. जबकि उसकी एक रिश्तेदार ने उसे यौन विकृतियों और क्रूर व्यवहार से जुड़ी बातें सिखाईं.
15 साल की उम्र में बाथरी की शादी काउंट नदाशी से कर दी गई. शादी के बाद दोनों सेजथे कैसल में रहने लगे. कहा जाता है कि पत्नी की क्रूर रुचियों को देखते हुए उसके पति ने उसके लिए महल में एक यातना कक्ष तक बनवाया था.
नौकरानियों के शरीर पर शहद लगाकर उन पर चीटियां छोड़ देती
बाथरी पर अपनी नौकरानियों को बेहद दर्दनाक यातनाएं देने का आरोप था. बताया जाता है कि वह लड़कियों के नाखूनों के नीचे पिन और सुइयां चुभोती थी. कई बार लड़कियों को बांधकर उनके शरीर पर शहद लगा दिया जाता और उन्हें मधुमक्खियों और चींटियों के बीच छोड़ दिया जाता था. ये यातनाएं इतनी क्रूर थीं कि पीड़ितों की हालत बेहद खराब हो जाती थी.
उसका पति भी इन क्रूरताओं में शामिल था. हालांकि कुछ विवरणों के मुताबिक वह कभी-कभी बाथरी की हिंसक प्रवृत्ति पर रोक लगाने की कोशिश करता था.
पति की मौत के बाद बढ़ गई क्रूरता
1600 के शुरुआती वर्षों में बाथरी के पति की मौत हो गई. इसके बाद उस पर और ज्यादा क्रूर होने का आरोप लगा. उसने अपनी पूर्व नर्स इलोना जू और स्थानीय महिला डोरोत्ता स्जेंटेस की मदद से कथित तौर पर गरीब परिवारों की लड़कियों को निशाना बनाना शुरू किया. इन लड़कियों को अगवा कर महल में लाया जाता और उन्हें यातनाएं दी जातीं.
कहा जाता है कि बाथरी अपने पीड़ितों के शरीर को काटती थी. एक लड़की को कथित तौर पर उसी के शरीर का मांस पकाकर खाने के लिए मजबूर किया था. वह खुद भी लड़कियों के शरीर का मांस पकाकर खा जाती थी.
क्या सच में खून से नहाती थी?
यही वह कहानी है, जिसने एलिजाबेथ बाथरी को इतिहास की सबसे खौफनाक महिलाओं में शामिल कर दिया. किंवदंतियों के मुताबिक, बाथरी को लगता था कि युवा लड़कियों का खून उसकी उम्र को रोक सकता है और उसकी खूबसूरती को बनाए रख सकता है. इसी वजह से उसके बारे में मशहूर हो गया कि वह लड़कियों के खून से नहाती थी.
इसी कहानी के कारण बाद में उसे 'ब्लड काउंटेस' यानी 'खूनी काउंटेस' कहा जाने लगा और कुछ लोगों ने उसे इतिहास की शुरुआती 'वैम्पायर' जैसी शख्सियतों से जोड़ दिया.
लेकिन यहां एक जरूरी बात है. उसके खून से नहाने की कहानी के ठोस ऐतिहासिक सबूत नहीं हैं. यह दावा उसके बारे में बाद में लोकप्रिय हुई किंवदंतियों का हिस्सा माना जाता है. इतना जरूर है कि उसके खिलाफ लड़कियों को प्रताड़ित करने और उनकी हत्या के गंभीर आरोप लगे थे.
जब शिकार अमीर परिवारों की लड़कियां बनने लगीं...
बाथरी के खिलाफ लंबे समय तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई. क्योंकि उसका परिवार स्थानीय प्रशासन में बेहद प्रभावशाली था. लेकिन आखिरकार हालात तब बदले, जब उसके कथित शिकार सिर्फ गरीब परिवारों की लड़कियां नहीं रहे.
उस पर स्थानीय कुलीन परिवारों की बेटियों को भी निशाना बनाने का आरोप लगा. इसके बाद राजा मैथियस ने मामले में हस्तक्षेप किया. जनवरी 1611 में बाथरी और उसके साथियों पर मुकदमा चला. उस पर 80 हत्याओं के आरोप लगाए गए. उसके सहयोगियों को दोषी ठहराया गया और उन्हें सजा दी गई. लेकिन बाथरी को मौत की सजा नहीं मिली.
महल के एक कमरे में कैद कर दी गई
बाथरी को उसी के कैसल के एक कमरे में बंद कर दिया गया. कमरे में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था. सिर्फ हवा और खाना पहुंचाने के लिए छोटी-छोटी जगहें छोड़ी गई थीं.
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वह करीब तीन साल तक इसी तरह कैद रही. अगस्त 1614 में एलिजाबेथ बाथरी अपने कमरे में मृत पाई गई. उसकी मौत के सदियों बाद भी उसका नाम क्रूरता, रहस्य और डरावनी कहानियों से जुड़ा हुआ है. हालांकि उसके खिलाफ लगाए गए अपराधों की संख्या और 'खून से नहाने' जैसी कहानियों की ऐतिहासिक सच्चाई पर आज भी बहस होती है, लेकिन एलिजाबेथ बाथरी की कहानी इतिहास की सबसे रहस्यमय और भयावह कथाओं में जरूर गिनी जाती है.
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