नर्मदा नदी पर बना पहला बांध है बरगी डैम... जहां डूबा 30 टूरिस्ट से भरा क्रूज

मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित बरगी डैम, नर्मदा नदी पर बना पहला बांध है. इसके निर्माण में 16 साल लग गए थे. यह जबलपुर का एक फेमस टूरिस्ट स्पॉट है और नौका विहार ही इसका मुख्य आकर्षण है.

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बरगी डैम का मुख्य आकर्षण नौका विहार है (Photo - jabalpur.nic.in) बरगी डैम का मुख्य आकर्षण नौका विहार है (Photo - jabalpur.nic.in)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 8:43 PM IST

जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम में एक बड़ा हादसा हुआ है. डैम में पर्यटकों से भरी एक क्रूज अचानक डूब गई. सभी नौका विहार के लिए क्रूज पर सवार थे.  जब क्रूज डैम के बीच गई, तभी तेज हवाएं चलने लगी. इस वजह से क्रूज असंतुलित होकर डैम में डूब गया. हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू का काम शुरू कर दिया है, फिर भी कई लोग लापता है. बताया गया है कि 35 लोग सवार थे, जिनमें से कई की डूबकर मौत हो गई

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नर्मदा पर बना बरगी डैम जबलपुर का एक पॉपुलर टूरिस्ट स्पॉट है. मध्य प्रदेश टूरिज्म के वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, बरगी बांध साल भर खुला रहता है.  यहां की नौका विहार यहां की मुख्य एक्टिविटी और आकर्षण है, जो बांध में पर्याप्त जलस्तर और कम बारिश होने पर ही संभव है.

अक्टूबर से अप्रैल तक बरगी बांध घूमने का सबसे अच्छा समय बताया गया है. क्योंकि, इस दौरान मौसम साफ रहता है और डैम में पर्याप्त पानी होता है. फिर भी अचानक मौसम में आए बदलाव की वजह से दुर्घटना हो गई. 

1974 में शुरू हुआ था डैम का निर्माण
बरगी बांध जबलपुर शहर से मात्र 40 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. नर्मदा नदी पर बनी 30 प्रमुख बांध परियोजनाओं में से यह नदी पर बने पहले पूर्ण बांधों में से एक है. यह नदी मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी नदी मानी जाती है और गंगा एवं हिमालय से भी पुरानी है.

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बरगी डैम का निर्माण 1974 में शुरू हुआ और 1990 में पूरा हुआ.  इस परियोजना को पूरा होने में लगभग 16 वर्ष लगे. इस प्रक्रिया के दौरान, बड़ी संख्या में गांवों को  दूसरी जगह शिफ्ट  किया गया था. क्योंकि वे बैकवाटर कैचमेंट क्षेत्र में स्थित हैं. बांध का पानी जबलपुर, मंडला और सिवनी जिलों के क्षेत्रों में फैला हुआ है.

मुख्य डैम  बरगी गांव के पास स्थित है. इस वजह से इसका नाम बरगी डैम पड़ा है. यह गांव एनएच-7 के पास है, जो जबलपुर-नागपुर को जोड़ता है. इस डैम का इस्तेमाल सिंचाई परियोजनाओं और 90 मेगावाट क्षमता की पनबिजली उत्पादन में  किया जाता है.  बरगी डायवर्जन योजना के लागू होने से सिंचाई क्षेत्र बढ़कर 4370 वर्ग किलोमीटर हो गया है. बरगी बांध से निकलने वाली नहरें कई जिलों को पानी की आपूर्ति कर रही हैं और नहरों पर काम अभी भी जारी है.

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होता है नौकाविहार
सिंचाई और बिजली उत्पादन के अलावा, इस बांध का इस्तेमाल क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी किया जाता है.  बरगी बांध का बैकवाटर एक विशाल झील का निर्माण करता है जिसमें पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं. इसी वजह से मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने बरगी डैम में नौकाविहार, रिजॉर्ट और अन्य सुविधाएं शुरू की है. इसी के तहत डैम में नौका विहार और  क्रूज का संचालन होता है.

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बरगी बांध की ऊंचाई 69 मीटर और लंबाई 5.4 किलोमीटर है. इसका बैकवाटर 75 किलोमीटर लंबी और 4.5 किलोमीटर चौड़ी झील का निर्माण करता है. बांध का निर्माण 105 मेगावाट (वर्तमान में 90 मेगावाट (2x45 मेगावाट)) पनबिजली उत्पादन और 2980 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है.

 नर्मदा पर बने दूसरे डैम में भी होता है नौकाविहार
बरगी डैम की तरह ही नर्मदा पर इंदिरा सागर डैम भी बनाया गया है. इसे हनुवंतिया तापू के नाम से जाना जाता है. इसका जलाशय भारत के सबसे बड़े जलाशयों में से एक है. यहां भी बरगी की तरह नौकाविहार की सुविधाएं हैं.  

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