पहाड़ों पर बारिश से बुरा हाल... मसूरी-देहरादून हाईवे फिर बंद, मंडी में भी भूस्खलन

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं. इससे मसूरी-देहरादून मार्ग सहित कई सड़कें बंद हो गई हैं. प्रशासन ने बड़े और भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई है. प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के लिए घर खाली कराए गए हैं.

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मसूरी-देहरादून मार्ग पर भूस्खलन से सड़कों पर जाम लग गया. हिमाचल प्रदेश के मंडी में भी पहाड़ों मलबा दरक गया. (फोटो-ITG) मसूरी-देहरादून मार्ग पर भूस्खलन से सड़कों पर जाम लग गया. हिमाचल प्रदेश के मंडी में भी पहाड़ों मलबा दरक गया. (फोटो-ITG)

सागर शर्मा / सनी धर्मवीर

  • देहरादून/ मंडी,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:40 PM IST

उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बारिश के बीच भूस्खलन ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. मसूरी-देहरादून मार्ग पर शनिवार सुबह फिर पहाड़ का मलबा सड़क पर आ गया. इससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह रुक गया. सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई. प्रशासन ने बाद में आवाजाही शुरू कराई. हालांकि भारी और बड़े वाहनों पर रोक लगा दी गई है.

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वहीं हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भी शनिवार सुबह बड़ा भूस्खलन हुआ. यहां पहाड़ी का भारी मलबा नीचे नाले में जा गिरा. खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तीन घर खाली करा दिए. राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में अभी तक किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं है.

मसूरी-देहरादून मार्ग पर फिर आया मलबा

मसूरी-देहरादून मार्ग पर पिछले कुछ समय से लगातार भूस्खलन हो रहा है. शनिवार सुबह सड़क का एक हिस्सा दोबारा क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद सड़क पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई. कुछ समय के लिए वाहनों के पहिये थम गए.

प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद सड़क पर धीरे-धीरे आवाजाही शुरू कराई गई. फिलहाल छोटे वाहनों को सावधानी के साथ निकाला जा रहा है. लगातार भूस्खलन के खतरे को देखते हुए भारी और बड़े वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है.

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प्रशासन के मुताबिक सड़क को पूरी तरह दो-तरफा ट्रैफिक के लिए खोलने में करीब 8 से 10 दिन लग सकते हैं. तब तक वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

स्थानीय निवासी दीपक ने बताया कि बरसात का करीब एक महीना अभी बाकी है. ऐसे में सड़क के कई हिस्सों पर भूस्खलन का खतरा बना हुआ है. कोलूखेत पानी वाले बेंड के आसपास भी पहाड़ से मलबा सड़क पर आ सकता है. अगर ऐसा हुआ तो आवाजाही फिर से प्रभावित होगी.

बारिश के दौरान पहाड़ी इलाकों में लगातार पत्थर और मलबा गिरने से वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ रही हैं. स्थानीय लोग सड़क पर सफर करते समय सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं.

मंडी के नागनाला में भी खिसकी पहाड़ी 

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में भी शनिवार सुबह भूस्खलन की घटना हुई. यह घटना उत्तरशाल इलाके की कटौला तहसील के नागनाला क्षेत्र में हुई. सुबह अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा नीचे की ओर आने लगा. मलबा नीचे स्थित नाले में जा गिरा. 

भूस्खलन का पूरा मंजर देखकर आसपास मौजूद लोग कुछ देर के लिए सहम गए. इस घटना का वीडियो भी सामने आया है. वीडियो में पहाड़ी से मलबा तेजी से नीचे आता दिखाई दे रहा है.

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लैंडस्लाइड के बाद प्रशासन ने आसपास के इलाके का जायजा लिया. संभावित खतरे को देखते हुए तीन घरों को एहतियात के तौर पर खाली करा दिया गया. इन घरों में रहने वाले परिवारों ने फिलहाल आसपास के दूसरे घरों में शरण ली है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रख रहा है.

कटौला के नायब तहसीलदार नेक राम ने भूस्खलन की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि घटना में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में जरूरी एहतियाती कदम उठाए हैं.

लगातार बारिश के कारण पहाड़ कमजोर हो रहे हैं. इससे सड़कें और रिहायशी इलाके प्रभावित हो रहे हैं. दोनों जगह प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है. लोगों से भी खतरे वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है.

भारी बारिश और आपदाओं से 111 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून की भारी बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने जमकर तबाही मचाई है. राज्य में अब तक 111 लोगों की जान जा चुकी है. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधानसभा में लिखित जवाब देते हुए बताया कि पिछले पांच महीनों में राज्य में औसतन 109.80 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. साथ ही बादल फटने की तीन घटनाएं भी सामने आई हैं.

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इन आपदाओं की वजह से इंसानी जिंदगियों के अलावा मकानों, सड़कों, पुलों, बिजली और पानी की योजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है. सरकार की तरफ से अब तक 1,871 प्रभावित परिवारों को राहत राशि बांट दी गई है. जबकि जिन 1,260 परिवारों को मुआवजा नहीं मिला है, उनमें से ज्यादातर ने आरएमएस पोर्टल पर आवेदन नहीं किया था या उनके फॉर्म अधूरे थे.

इस भयंकर तबाही के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्राकृतिक आपदाओं से सबसे ज्यादा 87 मौतें सिरमौर जिले में हुई हैं. जबकि सोलन में 239 घरों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है और कांगड़ा में सबसे अधिक 736 सड़कें टूटी हैं,

यह भी पढ़ें: सोलन में धंसी सड़क, नाले के ऊपर हवा में लटका ट्रक... हिमाचल में मॉनसून का तांडव

राज्य में कुल 12 पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनमें सबसे ज्यादा नुकसान लाहुल-स्पीति में हुआ है. इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 1 अगस्त तक आपदा राहत के रूप में कुल 802.56 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं.

 प्रशासन का कहना है कि औपचारिकताएं पूरी होते ही बाकी बचे सभी प्रभावित परिवारों को भी जल्द ही मुआवजा दे दिया जाएगा.

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