नाम बदलकर रह रहा था सुरेंद्र कोली, तीन दिन पहले खोली दुकान, फिर... सुसाइड केस में नए खुलासे

हरिद्वार में सदाराम के नाम से रह रहे शख्स की पहचान निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली के रूप में हुई. उसने तीन दिन पहले ही भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू की थी. शुक्रवार सुबह दुकान नहीं खुली तो मालिक ने शटर उठाया. अंदर सुरेंद्र फंदे से लटका मिला. वह काफी डिप्रेशन में था.

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सुरेंद्र कोली ने चाय की दुकान में किया सुसाइड. (File Photo: ITG) सुरेंद्र कोली ने चाय की दुकान में किया सुसाइड. (File Photo: ITG)

मुदित अग्रवाल / अरविंद ओझा

  • हरिद्वार ,
  • 18 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:27 PM IST

उत्तराखंड के हरिद्वार में एक शख्स तीन महीने से सिडकुल की सिक्योरिटी कंपनी में काम कर रहा था. स्थानीय लोग उसे सदाराम के नाम से जानते थे. तीन दिन पहले उसने भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान भी शुरू कर दी. सब कुछ सामान्य दिख रहा था, लेकिन शुक्रवार सुबह दुकान का शटर नहीं उठा. जब दुकान मालिक ने शटर उठाया तो अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए. सदाराम के नाम से रह रहा शख्स रस्सी के फंदे से लटका हुआ था. तुरंत ही उसे इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी. पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की. मृतक के पास कोई पहचान पत्र नहीं था. उसके सामान की तलाशी ली गई तो आधार कार्ड मिला. इसी दस्तावेज के आधार पर उसकी पहचान निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली के रूप में हुई. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा. 

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शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि सुरेंद्र कोली पिछले करीब तीन महीने से हरिद्वार के सिडकुल में एक सिक्योरिटी कंपनी में काम कर रहा था. इसके बाद उसने भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू करने का फैसला किया. दुकान शुरू किए उसे महज तीन दिन ही हुए थे. दुकान उसने धर्मेंद्र कौशिक नाम के शख्स से किराए पर ली थी. धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र उनसे सदाराम के नाम से मिला था. वह एक दोस्त के जरिए उनके संपर्क में आया था. उसने काम दिलाने की बात कही थी और बताया था कि वह शुगर का मरीज है. इसके बाद उसे दुकान दे दी गई.

धर्मेंद्र के मुताबिक, उन्हें भी यह जानकारी नहीं थी कि जिस व्यक्ति को वह सदाराम के नाम से जानते हैं, उसका असली नाम सुरेंद्र कोली है. इसके अलावा धर्मेंद्र ने पुलिस को बताया कि आत्महत्या से एक दिन पहले यानी गुरुवार शाम सुरेंद्र काफी डिप्रेशन में दिख रहा था. उसी दिन उसके परिवार में किसी बच्चे का जन्मदिन था और उसके पास पैसे नहीं थे.  यह सुनकर धर्मेंद्र ने उसे शाम को 2000 रुपये दिए थे.  इसके बाद उसे इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, इसकी वजह अभी साफ नहीं हो पाई है.

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सुबह दुकान नहीं खुली तो शटर उठाकर देखा

धर्मेंद्र कौशिक ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार सुबह चाय की दुकान पर लोग खड़े थे. लेकिन दुकान नहीं खुली थी. जब उन्होंने देखा कि शटर ढीला है तो उसे उठाया. अंदर सुरेंद्र रस्सी से लटका हुआ था. धर्मेंद्र ने बताया कि वह पहले सुरेंद्र को पहचान भी नहीं पाए. वह उसे सदाराम के नाम से जानते थे. उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वह निठारी कांड से जुड़े सुरेंद्र कोली हैं. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच शुरू कर दी.

शहर कोतवाली के एसएचओ कुंदन सिंह राणा के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब  साढ़े 11 बजे पुलिस को सूचना मिली कि कोतवाली थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली है. मौके पर पहुंचने के बाद उसकी पहचान की जांच की गई. पुलिस के अनुसार, मृतक ने रस्सी से ऊपर बांधकर फांसी लगाई थी. उसके पास तत्काल कोई आईडी नहीं मिली थी. बाद में सामान की तलाशी के दौरान मिले आधार कार्ड से उसकी पहचान सुरेंद्र कोली के तौर पर हुई. पुलिस ने उसके परिवार वालों को घटना की जानकारी दे दी है.

रोशनाबाद में रहता था, काम मांगने पहुंचा था धर्मेंद्र के पास

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दुकान मालिक धर्मेंद्र ने बताया कि सुरेंद्र पहले रोशनाबाद में रहता था. स्थानीय लोग भी उसे सताराम के नाम से ही जानते थे. फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है. पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या की असली वजह अभी सामने नहीं आई है. परिवार वालों से पूछताछ के बाद ही इसके बारे में जानकारी मिल सकेगी.

 

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