उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई एक अनूठी पहल अब जनअभियान का रूप लेती जा रही है. जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की ओर से शुरू किए गए "एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं" अभियान को लोगों का अच्छा समर्थन मिल रहा है. अब तक इस अभियान के तहत 2500 से अधिक पुस्तकें एकत्रित की जा चुकी हैं.
इस अभियान की खास बात यह है कि लोगों के घरों में पढ़ने के बाद रखी उपयोगी किताबें अब दूसरे विद्यार्थियों और पाठकों के काम आ रही हैं. जनपदवासी अपनी ऐसी पुस्तकें दान कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल वे खुद कर चुके हैं, लेकिन जो किसी दूसरे व्यक्ति के लिए पढ़ाई और ज्ञान का महत्वपूर्ण साधन बन सकती हैं. अभियान के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ी किताबों के साथ धार्मिक और आध्यात्मिक साहित्य, सामान्य ज्ञान, उपन्यास और अलग-अलग विषयों की अन्य उपयोगी पुस्तकें भी जमा की जा रही हैं.
जिलाधिकारी विशाल मिश्रा की ओर से शुरू की गई इस मुहिम को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का भी समर्थन मिला है. मुख्यमंत्री धामी अभियान के तहत अब तक 151 पुस्तकें दान कर चुके हैं. इसके अलावा जनपद के कई जिला स्तरीय अधिकारी और आईएएस अधिकारी भी अपनी पुस्तकें दान कर इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं. आम लोगों के साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी आगे आकर किताबें दान कर रहे हैं. इससे अभियान को और बढ़ावा मिला है और बड़ी संख्या में लोग अपनी उपयोगी किताबें पुस्तकालयों के लिए उपलब्ध करा रहे हैं.
जरूरतमंद विद्यार्थियों को मिल रही निशुल्क किताबें
अभियान के तहत एकत्रित की गई पुस्तकों को जनपद के अलग-अलग पुस्तकालयों में रखा जा रहा है. यहां विद्यार्थी और दूसरे पाठक इन किताबों का निशुल्क अध्ययन कर सकते हैं. इस पहल से खास तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं को फायदा मिल रहा है. जिन विद्यार्थियों के लिए महंगी किताबें खरीदना आसान नहीं है, उनके लिए पुस्तकालय में उपलब्ध ये किताबें पढ़ाई में मददगार साबित हो रही हैं.
अभियान का मकसद सिर्फ किताबें इकट्ठा करना नहीं है. इसके पीछे यह सोच है कि एक व्यक्ति के पास पढ़ी जा चुकी किताब अगर किसी दूसरे विद्यार्थी तक पहुंच जाए, तो वही किताब कई लोगों के ज्ञान का माध्यम बन सकती है. यही "एक पुस्तक दान करें, ज्ञान का वृक्ष लगाएं" अभियान का मूल संदेश भी है. एक किताब एक व्यक्ति के ज्ञान को बढ़ाती है, लेकिन जब वही किताब दूसरों तक पहुंचती है तो उसका लाभ कई लोगों को मिलता है.
अभियान के जरिए लोगों को अपनी ऐसी किताबें दान करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जो उनके लिए अब उपयोगी नहीं हैं, लेकिन दूसरे विद्यार्थियों और पाठकों के लिए काम आ सकती हैं. रुद्रप्रयाग में शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे लोगों के बीच जागरूकता और सहभागिता का संदेश दे रही है. बड़ी संख्या में लोग आगे आकर अपनी किताबें दान कर रहे हैं. इससे पुस्तकालयों में अलग-अलग विषयों की पढ़ने की सामग्री उपलब्ध हो रही है. जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने कहा कि लोग इन पुस्तकों का लाभ जनपद के पुस्तकालयों में ले सकते हैं. उन्होंने बताया कि अभियान में आम जनता के साथ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी पुस्तक दान कर रहे हैं.
छात्रों को मिल रही हर तरह की किताबें
पुस्तकालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें यहां अच्छी सुविधाएं मिल रही हैं. उन्हें अलग-अलग तरह की पुस्तकें पढ़ने के लिए मिल रही हैं. इससे उनकी पढ़ाई और तैयारी में मदद मिल रही है. रुद्रप्रयाग में शुरू हुआ यह अभियान अब किताबों के दान से आगे बढ़कर पढ़ने और ज्ञान साझा करने की संस्कृति को मजबूत करने की कोशिश बन रहा है. 2500 से अधिक किताबों का एकत्र होना बताता है कि इस पहल में लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है. एक व्यक्ति द्वारा दान की गई किताब अब कई विद्यार्थियों और पाठकों के ज्ञान का जरिया बन रही है. यही इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत है.
प्रवीण सेमवाल