स्मित मछार के इस अदम्य साहस की कहानी ने पूरे देश-दुनिया को भावुक कर दिया है. लेकिन अकोला के एक परिवार के लिए यह सिर्फ बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि उनके अपने भांजे की जिंदगी और मौत से जुड़ा वो पल है, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे.
स्मित मछार की मां गीताबेन का मायका अकोला में है और शहर के कोलखेड़ इलाके में रहने वाला जोगी परिवार स्मित का ननिहाल है. कोलखेड़ चौक इलाके में रहने वाले इस परिवार में बड़े मामा दीपक जोगी, मंझले मामा राजेंद्र जोगी, छोटे मामा सुरेश जोगी, संगीता मामी और ममेरी बहन खुशी हैं. स्मित की मां गीताबेन का बचपन भी अकोला में बीता. उनकी शुरुआती पढ़ाई मुंगीलाल बाजोरिया स्कूल में हुई. इसी शहर से उनकी यादें और परिवार के रिश्ते जुड़े रहे.
परिवार के मुताबिक, जब उन्हें पता चला कि कॉकपिट में हमले के बावजूद स्मित ने हिम्मत नहीं छोड़ी, बल्कि विमान और यात्रियों को बचाने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष किया, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए. परिवार का कहना है कि स्मित ने संकट के उस दौर में हनुमान चालीसा का जाप करते हुए खुद को संभाला और विमान को सुरक्षित रखने की कोशिश जारी रखी.
भांजे पर गर्व
यह पल परिवार के लिए दर्द और गर्व, दोनों का था. इस परिवार से एक्सक्लूसिव बातचीत आज तक संवाददाता धनंजय साबले ने की. बड़े मामा दीपक जोगी ने कहा, 'जब बहन का फोन आया और हमें पता चला कि स्मित पर कॉकपिट में हमला हुआ है, उस वक्त हमारे होश उड़ गए थे. लेकिन जब पता चला कि उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और यात्रियों की जान बचाने के लिए डटा रहा, तो हमें अपने भांजे पर गर्व हुआ.'
परिवार के लिए सबसे राहत भरा पल तब आया, जब स्मित की सलामती की जानकारी उन्हें मिली. बड़े मामा दीपक जोगी बताते हैं कि उस वक्त ऐसा लगा जैसे उनकी जान में जान वापस आ गई हो. स्मित की तबीयत और उनके सुरक्षित होने की खबर ने परिवार के आंसुओं को राहत और खुशी में बदल दिया. दीपक जोगी ने कहा, 'जब हमें उसकी सलामती की खबर मिली, तब जाकर हमारे मन को राहत मिली. हमारा भांजा सुरक्षित है, यही हमारे लिए सबसे बड़ी बात थी.'
धनंजय साबले